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रेलवे अन्य राज्यों में भेजेगा पावर प्लांट की फ्लाई ऐश
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ललितपुर। उदयुपरा स्थित पॉवर प्लांट की साइडिंग से अब रेलवे द्वारा देश के विभिन्न हिस्सों में पॉवर प्लांट की फ्लाई ऐश को भेजा जाएगा। इसके लिए ऐशटेक प्राइवेट कंपनी ने रेलवे से संपर्क किया है। ऐसे में अब कोयला लेकर आने वाली मालगाड़ियां ही वापस लौटने पर प्लांट की फ्लाई ऐश भी साथ ले जाएंगी, इससे जहां रेलवे को मुनाफा होगा, वहीं अन्य राज्यों में फ्लाई ऐश पहुंचने से उसका उपयोग भी भवन निर्माण आदि में हो सकेगा।
ललितपुर-खजुराहो रेल लाइन पर स्थित उदयपुरा रेलवे स्टेशन के पास स्थित बजाज पॉवर प्लांट को जहां रेलवे द्वारा हजारों टन कोयला मुहैया कराया जाता है, वहीं अब रेलवे द्वारा पॉवर प्लांट से निकलने वाली फ्लाई ऐश को भी देश के विभिन्न राज्यों में ले जाने की तैयारी है। एक दिन में करीब पांच रैक मालगाड़ी कोयला पॉवर प्लांट के लिए मुहैया कराया जाता है इस दौरान बहुत सी फ्लाई ऐश बच भी जाती है, जिसके निस्तारण का उचित प्रबंध आसपास नहीं हो पाता है। ऐसे में भारी मात्रा में एकत्रित होने के बाद उसे आसपास के खेतों व खाली जगहों पर डालने से स्थानीय लोगों को भी दिक्कत हो रही थी और इसके साथ ही उससे उड़ने वाली धूल भी लोगों के लिए परेशानी का सबब बनती जा रही थी। लेकिन अब शीघ्र ही प्लांट से निकलने वाली फ्लाई ऐश के उचित उपयोग और निस्तारण के लिए रेलवे, पावर प्लांट और ऐशटेक (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड द्वारा इस फ्लाई ऐश के निस्तारण की कारगर योजना तैयार की है और अब रेलवे द्वारा कंपनियों के करार होने से उदयपुरा पावर प्लांट साइडिंग से देश के विभिन्न हिस्सों को फ्लाई ऐश को भेजा जाएगा।
ट्रायल हुआ, नवरात्रि में शुरू हो सकेगी लोडिंग
रेलवे और पॉवर प्लांट के अधिकारियों द्वारा इसके लिए ट्रायल भी कर लिया गया है। इसके लिए प्लांट की फ्लाई ऐश को मालगाड़ी की बोगी में इस प्रकार से भरा जाएगा, ताकि एक कैप्सूल की तरह फ्लाई ऐश बंद रहे और बोगी से बाहर बिल्कुल भी न उड़ सके। इसके लिए मालगाड़ी की बोगी को चारों ओर से पूरी तरह पैक करने के बाद ही आगे बढ़ाया जाएगा।
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सीमेंट निर्माण और हाइवे फिलिंग में आती है काम
पावर प्लांट से निकलने वाली यह फ्लाई ऐश सीमेंट बनाने और हाइवे फिलिंग करने के काम आती है। हालांकि उपजाऊ जमीन पर डालने से उचित प्रबंध नहीं किए जाने से यह नुकसान दायक भी होती है। लेकिन फ्लाई ऐश डालने के बाद यदि ऊपर से मिट्टी का भराव किया जाए, तो वह जमीन भी उपजाऊ होती है।
जो कोयले की मालगाड़ी आती थी और इसके बाद खाली मालगाड़ी लौटती थी, लेकिन अब खाली मालगाड़ियों में डिमांड के अनुसार फ्लाई ऐश को भी अलग-अलग राज्यों में भेजा जाएगा।
संदीप माथुर, मंडल रेल प्रबंधक, झांसी।
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रैक की बोगी में ऐश को भरकर कैप्सूल बनाने का ट्रायल भी कर लिया गया है। इस कार्य में चीफ ऑपरेटिंग ऑफीसर एन मिश्रा, चीफ सीएसओ डा.एबी सिंह और इकाई प्रमुख एन सार का विशेष योगदान रहा है।
नयन शर्मा, पीआरओ, बजाज पावर प्लांट।
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ललितपुर-खजुराहो रेल लाइन पर स्थित उदयपुरा रेलवे स्टेशन के पास स्थित बजाज पॉवर प्लांट को जहां रेलवे द्वारा हजारों टन कोयला मुहैया कराया जाता है, वहीं अब रेलवे द्वारा पॉवर प्लांट से निकलने वाली फ्लाई ऐश को भी देश के विभिन्न राज्यों में ले जाने की तैयारी है। एक दिन में करीब पांच रैक मालगाड़ी कोयला पॉवर प्लांट के लिए मुहैया कराया जाता है इस दौरान बहुत सी फ्लाई ऐश बच भी जाती है, जिसके निस्तारण का उचित प्रबंध आसपास नहीं हो पाता है। ऐसे में भारी मात्रा में एकत्रित होने के बाद उसे आसपास के खेतों व खाली जगहों पर डालने से स्थानीय लोगों को भी दिक्कत हो रही थी और इसके साथ ही उससे उड़ने वाली धूल भी लोगों के लिए परेशानी का सबब बनती जा रही थी। लेकिन अब शीघ्र ही प्लांट से निकलने वाली फ्लाई ऐश के उचित उपयोग और निस्तारण के लिए रेलवे, पावर प्लांट और ऐशटेक (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड द्वारा इस फ्लाई ऐश के निस्तारण की कारगर योजना तैयार की है और अब रेलवे द्वारा कंपनियों के करार होने से उदयपुरा पावर प्लांट साइडिंग से देश के विभिन्न हिस्सों को फ्लाई ऐश को भेजा जाएगा।
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ट्रायल हुआ, नवरात्रि में शुरू हो सकेगी लोडिंग
रेलवे और पॉवर प्लांट के अधिकारियों द्वारा इसके लिए ट्रायल भी कर लिया गया है। इसके लिए प्लांट की फ्लाई ऐश को मालगाड़ी की बोगी में इस प्रकार से भरा जाएगा, ताकि एक कैप्सूल की तरह फ्लाई ऐश बंद रहे और बोगी से बाहर बिल्कुल भी न उड़ सके। इसके लिए मालगाड़ी की बोगी को चारों ओर से पूरी तरह पैक करने के बाद ही आगे बढ़ाया जाएगा।
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सीमेंट निर्माण और हाइवे फिलिंग में आती है काम
पावर प्लांट से निकलने वाली यह फ्लाई ऐश सीमेंट बनाने और हाइवे फिलिंग करने के काम आती है। हालांकि उपजाऊ जमीन पर डालने से उचित प्रबंध नहीं किए जाने से यह नुकसान दायक भी होती है। लेकिन फ्लाई ऐश डालने के बाद यदि ऊपर से मिट्टी का भराव किया जाए, तो वह जमीन भी उपजाऊ होती है।
जो कोयले की मालगाड़ी आती थी और इसके बाद खाली मालगाड़ी लौटती थी, लेकिन अब खाली मालगाड़ियों में डिमांड के अनुसार फ्लाई ऐश को भी अलग-अलग राज्यों में भेजा जाएगा।
संदीप माथुर, मंडल रेल प्रबंधक, झांसी।
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रैक की बोगी में ऐश को भरकर कैप्सूल बनाने का ट्रायल भी कर लिया गया है। इस कार्य में चीफ ऑपरेटिंग ऑफीसर एन मिश्रा, चीफ सीएसओ डा.एबी सिंह और इकाई प्रमुख एन सार का विशेष योगदान रहा है।
नयन शर्मा, पीआरओ, बजाज पावर प्लांट।