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कोर्ट में तेज आवाज में बोलने पर मिली कठघरे में रहने की सजा
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ललितपुर। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में एक मामले की सुनवाई के दौरान आत्मसमर्पण को आए कठघरे में खड़े एक आरोपी से उसका एक साथी वकील के लिए पैसे मांगने के लिए जोर से चिल्लाकर बोलने लगा। इससे न्यायिक कार्य प्रभावित होने के चलते सीजेएम ने तेज आवाज में बोलने वाले व्यक्ति को न्यायालय उठने तक कठघरेे में रहने की सजा सुनाई है।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में सोमवार को एक मामले में आत्मसमर्पण के लिए आया आरोपी रमेश कठघरे में खड़ा था। तभी उसकी जमानत देने के लिए साथ में आए व्यक्ति नारायण ने उससे तेज आवाज में चिल्लाते हुए कहा कि पैसे दो वकील ने नकल के लिए मांगे हैं।
उसी समय अन्य मामलों में भी न्यायालय में सुनवाई चल रही थी। जब नारायण चिल्लाया तो वहां मौजूद अन्य सभी अधिवक्ताओं, कर्मचारियों और सीजेएम तक का ध्यान बोलने वाले व्यक्ति की ओर गया और इससे न्यायालय का कार्य भी प्रभावित हुआ। उसके इस व्यवहार पर सीजेएम के आदेश पर तत्काल उक्त व्यक्ति को अभिरक्षा में ले लिया और उसे अपना पक्ष रखने का भी मौका दिया गया। जिस पर नारायण ने जानकारी न होने के कारण गलती मानी और क्षमा की याचनाएं भी कीं। सीजेएम ने इस मामले में सुनवाई के बाद धारा 345 के तहत प्रक्रिया का पालन करते हुए दोषी नारायण को न्यायालय उठने तक के समय के लिए अभिरक्षा में रखने का दंड दिया गया। यह मामला दिन भर अधिवक्ताओं में चर्चा का विषय बना रहा।
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मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में सोमवार को एक मामले में आत्मसमर्पण के लिए आया आरोपी रमेश कठघरे में खड़ा था। तभी उसकी जमानत देने के लिए साथ में आए व्यक्ति नारायण ने उससे तेज आवाज में चिल्लाते हुए कहा कि पैसे दो वकील ने नकल के लिए मांगे हैं।
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उसी समय अन्य मामलों में भी न्यायालय में सुनवाई चल रही थी। जब नारायण चिल्लाया तो वहां मौजूद अन्य सभी अधिवक्ताओं, कर्मचारियों और सीजेएम तक का ध्यान बोलने वाले व्यक्ति की ओर गया और इससे न्यायालय का कार्य भी प्रभावित हुआ। उसके इस व्यवहार पर सीजेएम के आदेश पर तत्काल उक्त व्यक्ति को अभिरक्षा में ले लिया और उसे अपना पक्ष रखने का भी मौका दिया गया। जिस पर नारायण ने जानकारी न होने के कारण गलती मानी और क्षमा की याचनाएं भी कीं। सीजेएम ने इस मामले में सुनवाई के बाद धारा 345 के तहत प्रक्रिया का पालन करते हुए दोषी नारायण को न्यायालय उठने तक के समय के लिए अभिरक्षा में रखने का दंड दिया गया। यह मामला दिन भर अधिवक्ताओं में चर्चा का विषय बना रहा।
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