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पहले दिल से, अब दिमाग से बन रहीं फिल्में
ब्यूरो/अमर उजाला
Updated Tue, 16 Jun 2015 11:43 PM IST
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उन्होंने कहा कि पिछले दशकों में किरदार सामाजिक एवं सांस्कृतिक भूमिकाओं को महत्व देते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। ज्यादा पैसा कमाने की होड़ में निर्माताओं ने इनका परिवेश बदल दिया है। उन्होंने कहा कि विलेन का किरदार समाज को सीख देता है कि गलत कार्य करने वाले का अंजाम गलत होता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने फिल्म सिटी बनाने की जो घोषणा की है वह तारीफ के काबिल है। इससे प्रदेश की प्रतिभाओं को अवसर तथा पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि उनकी सबसे पसंदीदा फिल्म राम तेरी गंगा मैली व हिना है। नकारात्मक भूमिका निभाने की एक घटना सुनाते हुए उन्हाेंने कहा कि फिल्म प्रेम रोग रिलीज होने के कुछ दिनों बाद वह शूटिंग के सिलसिले में हैदराबाद गए थे, जहां महिलाओं ने उनको देखते ही गालियां देनी शुरू कर दी थीं।