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दस साल से खस्ताहाल भवन में बैठकर पढ़ने को मजबूर है नौनिहाल
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स्कूल के कमरें की दीवार में पड़ी दरारें
- फोटो : LALITPUR
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सिलावन (ललितपुर)। महरौनी ब्लॉक क्षेत्र के छपरट स्थित प्राथमिक विद्यालय के बच्चे करीब 10 साल से खस्ताहाल भवन में बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। अभिभावकों और प्रधानाध्यापक ने कई बार अफसरों को इसकी जानकारी दी लेकिन यहां मरम्मत तक कराना मुनासिब नहीं समझा गया।
बेसिक शिक्षा परिषद भले ही विद्यालय भवनों के निर्माण व रख-रखाव पर पैसा बहा रहा हो, लेकिन इसका असर विद्यालयों की स्थिति पर नजर नहीं आता। क्षेत्र के कई विद्यालय ऐसे हैं, जो मरम्मत के अभाव में जीर्णशीर्ण हो चुके हैं। उनमें से प्राथमिक विद्यालय छपरट भी एक है। यहां नौनिहालों को बैठने तक की जगह नहीं हैं। स्कूल की दीवारों में इतनी बड़ी दरारें पड़ गई हैं कि उसमें से आरपार आसानी से देखा जा सकता हैं। बारिश के समय न सिर्फ छत से पानी टपक रहा हैं बल्कि छत में लगी सीमेंट की कंक्रीट भी गिर रही है। इसके चलते लिंटर की सरिया भी दिखने लगी है। अनहोनी की आशंका के चलते अभिभावक भी बच्चों को विद्यालय भेजने में कतराने लगे हैं। शिक्षकों का कहना है कि विद्यालय भवन की दीवारों में आई दरारों एवं खस्ताहाल हो चुके लिंटर के चलते भवन अब गिरे तब गिरे की स्थिति में हैं जिसके चलते नौनिहालों में हमेशा भय बना रहता है। ग्रामीणों ने डीएम से स्कूल की मरम्मत करवाने की मांग की है।
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प्राथमिक विद्यालय छपरट पिछले कई वर्षों से खस्ताहाल स्थिति में हैं, जिससे नौनिहालों की जान का खतरा बना हुआ हैं। विभाग को तुरंत इस ओर ध्यान देकर वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए। कैलाश
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विद्यालय भवन के बारे में कई बार अधिकारियों को अवगत कराया लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा हैं। लगता है कि अधिकारी किसी हादसे का इंतजार कर रहे हैं। शिवचरन परिहार
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विद्यालय के कमरे खस्ताहाल हैं अधिकारियों को जानकारी होने के बाद भी इस स्कूल की मरम्मत तक कराना तक मुनासिब नहीं समझा जा रहा। बच्चों को बैठने तक की जगह नहीं हैं। ग्यासी
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विद्यालय भवन की खस्ताहाल स्थिति को लेकर पिछले दस वर्षों से लिखित एवं मौखिक रूप से विभागीय अधिकारियों को बराबर अवगत कराया जा रहा हैं। बच्चों की कक्षा लगाने के लिए सुरक्षित जगह नहीं है। आफताब अहमद, प्रधानाध्यापक
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बोले जिम्मेदार
प्राथमिक विद्यालय छपरट काफी खस्ताहाल स्थिति में पहुंच गया हैं। अभिभावकों व प्रधानाचार्य की मांग पर इसकी जांच हो चुकी हैं जल्द ही नया निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। राजकुमार पुरोहित, खंड शिक्षा अधिकारी महरौनी
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बेसिक शिक्षा परिषद भले ही विद्यालय भवनों के निर्माण व रख-रखाव पर पैसा बहा रहा हो, लेकिन इसका असर विद्यालयों की स्थिति पर नजर नहीं आता। क्षेत्र के कई विद्यालय ऐसे हैं, जो मरम्मत के अभाव में जीर्णशीर्ण हो चुके हैं। उनमें से प्राथमिक विद्यालय छपरट भी एक है। यहां नौनिहालों को बैठने तक की जगह नहीं हैं। स्कूल की दीवारों में इतनी बड़ी दरारें पड़ गई हैं कि उसमें से आरपार आसानी से देखा जा सकता हैं। बारिश के समय न सिर्फ छत से पानी टपक रहा हैं बल्कि छत में लगी सीमेंट की कंक्रीट भी गिर रही है। इसके चलते लिंटर की सरिया भी दिखने लगी है। अनहोनी की आशंका के चलते अभिभावक भी बच्चों को विद्यालय भेजने में कतराने लगे हैं। शिक्षकों का कहना है कि विद्यालय भवन की दीवारों में आई दरारों एवं खस्ताहाल हो चुके लिंटर के चलते भवन अब गिरे तब गिरे की स्थिति में हैं जिसके चलते नौनिहालों में हमेशा भय बना रहता है। ग्रामीणों ने डीएम से स्कूल की मरम्मत करवाने की मांग की है।
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प्राथमिक विद्यालय छपरट पिछले कई वर्षों से खस्ताहाल स्थिति में हैं, जिससे नौनिहालों की जान का खतरा बना हुआ हैं। विभाग को तुरंत इस ओर ध्यान देकर वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए। कैलाश
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विद्यालय भवन के बारे में कई बार अधिकारियों को अवगत कराया लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा हैं। लगता है कि अधिकारी किसी हादसे का इंतजार कर रहे हैं। शिवचरन परिहार
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विद्यालय के कमरे खस्ताहाल हैं अधिकारियों को जानकारी होने के बाद भी इस स्कूल की मरम्मत तक कराना तक मुनासिब नहीं समझा जा रहा। बच्चों को बैठने तक की जगह नहीं हैं। ग्यासी
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विद्यालय भवन की खस्ताहाल स्थिति को लेकर पिछले दस वर्षों से लिखित एवं मौखिक रूप से विभागीय अधिकारियों को बराबर अवगत कराया जा रहा हैं। बच्चों की कक्षा लगाने के लिए सुरक्षित जगह नहीं है। आफताब अहमद, प्रधानाध्यापक
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बोले जिम्मेदार
प्राथमिक विद्यालय छपरट काफी खस्ताहाल स्थिति में पहुंच गया हैं। अभिभावकों व प्रधानाचार्य की मांग पर इसकी जांच हो चुकी हैं जल्द ही नया निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। राजकुमार पुरोहित, खंड शिक्षा अधिकारी महरौनी