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तालाब बन गए खेल के मैदान, पान की सिंचाई के लिए परेशान हो रहे किसान

Wed, 11 May 2022 11:30 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 11 May 2022 11:30 PM IST
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Ponds became playgrounds, farmers getting worried about betel irrigation
पाली(ललितपुर)। भीषण गर्मी में गिरते जलस्तर से पान की खेती प्रभावित हो रही है। जिले में पान की खेती के क्षेत्र के तालाब बेलाताल, नागौरी, रामसागर, मटियारी पानी नहीं होने से खेल के मैदान नजर आ रहे हैं। कुओं में अंधेरा छा गया तो कुइयां खाली पड़ी हैं। ऐसे में पाली में पान की खेती करने वाले किसान मटकों में पानी लेकर आ रहे हैं और क्यारियों की सिंचाई कर रहे हैं। पानी ढोते-ढोते किसानों के कंधे बैठे जा रहे हैं। वहीं जहां आसपास नलकूप के साधन हैं तो वहां मोल पानी खरीदकर काम चलाया जा रहा है।
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जिले में अब केवल कस्बा पाली में ही पान की खेती होती है। मगर पानी की कमी के चलते पान की खेती का क्षेत्रफल घटता जा रहा है। वहीं जिले के अन्य क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदा और पानी की समस्या के चलते पान किसानों ने खेती छोड़ दी है। कस्बा पाली में पान की खेती नागौरी तालाब, बेलाताल तालाब, रामसागर क्षेत्र में होती है। मार्च में किसान क्यारियों में नई बेल की रोपाई करते हैं और नए बरेजे तैयार करते हैं। पान की खेती को बनाए रखने के लिए हर रोज सुबह-शाम उसमें सिंचाई की जरुरत पड़ती है। जहां फसल थोड़ी पुरानी हो जाती है, तो किसान छोटे इंजन से सिंचाई कर लेते हैं।
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अगर बेल की रोपाई मार्च-अप्रैल में हुई तो इसके लिए किसान मटके से सिंचाई करते हैं। एक मटके में करीब 50 से 70 लीटर पानी आता है। इन दिनों क्षेत्र में पानी की संकट है। ऐसे में किसान मटकों में पानी लाकर सिंचाई कर रहे हैं। तालाब में पानी नहीं होने से किसान कंधे पर मटके में पानी लेकर आ रहे हैं। पानी की परेशानी देख किसान परेशान हैं। अगर आगे मानसून देर से आया तो जून-जुलाई के माह में पानी के लिए और भी कठिन समस्या उतपन्न हो जाएगी ।
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तालाब गहरीकरण के नाम पर खेल
राजस्व भूलेख नक्शे में नगर पंचायत पाली एवं ग्राम पंचायत पाली ग्रामीण एक ही है। हालांकि यहां चुनाव जरूर अलग-अलग होते हैं। पाली ग्रामीण के अंतर्गत आने वाले बेलाताल तालाब पर मनरेगा के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2021-22में गहरीकरण का कार्य 6.50 लाख रुपये से कराया गया लेकिन तालाब गहरा नहीं हो सका। तालाब की मेड़ पर जरूर मिट्टी पड़ी है, जिसके आसपास कार्य का एक बोर्ड लगा हुआ है।
ऐसे होती है पान की खेती..
पान की खेती के लिए पूरे साल बेल तैयार करके मार्च-अप्रैल में इसकी रोपाई की जाती है। जुलाई-अगस्त तक पान तैयार हो जाता है। सर्दी हो गर्मी इसमें बराबर सिंचाई की जरूरत पड़ती है। किसान मटकेनुमा भारी लुटिया में जलस्रोत से पानी भरकर उसे कंधे के सहारे लाकर सिंचाई करता है। बुंदेलखंड में पाली के लगभग 300 परिवार पान की खेती पर निर्भर हैं।
बेलाताल में एक दर्जन से ज्यादा कुइयां पान किसानों की हैं। जिनमें पानी के नाम पर किसी में कीचड़ है तो कोई सूखी पड़ी है। मनरेगा के अंतर्गत गहरीकरण हुआ लेकिन धरातल पर दिख नहीं रहा है। इतनी राशि से अगर कुइयों का गहरीकरण हो जाता तो आधी से ज्यादा कुइयों में पानी उपलब्ध हो जाता है। -महेश चौरसिया , पान किसान
गर्मी का मौसम और पानी की कमी के बीच पानी ढोने को मजबूर होना पड़ा रहा। तालाब, कुइयां सूखी पड़ी हैं। जरूरत ज्यादा बढ़ी तो किसी के नलकूप से पानी मोल लेकर कुइयों को भर देते हैं। वरना हर रोज दूर से कंधे पर मटके लाकर पानी ढोने को मजबूर हैं। - रामसेवक चौरसिया , पान किसान
अधिकांश पान किसान भूमिहीन हैं। ठेके की जमीन पर पान की खेती कर रहे हैं। पान वरेजो क्षेत्र में विद्युत लाइन का बिल किसानों की जेब पर भारी पड़ेगा, जिससे किसान कनेक्शन लेने से कतराते हैं। भरे जलाशयों में सरकारी नलकूप लग जाए तो किसानों की परेशानी काफी हद तक दूर हो जाएगी। -आशीष चौरसिया पान किसान, अध्यक्ष बजरंगसेना पाली

कुछ सालों से पानी की कमी भी किसानों को रुला देती है। बच्चे तो कहते हैं कि पापा छोड़ दो पान की खेती लेकिन यहां रोजगार के कोई अवसर नहीं है। जिसके चलते मजबूरन पान की खेती करनी पड़ती है। पानी की इतनी कमी है कि बूढ़े कंधे तो जवाब दे ही रहे हैं। बच्चों के कंधे भी बैठे जा रहे हैं। -भूरे चौरसिया, पान किसान
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