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तालाब सूखा, छिन गया रोजगार

Sat, 14 May 2016 12:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 14 May 2016 12:54 AM IST
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Pond drained , was robbed of employment
bundelkhand sankt, lalitpur news - फोटो : amar ujala
बांसी (ललितपुर)। सूखा की मार से ब्लाक जखौरा के ग्राम हर्षपुर के किसानों का रोजगार छिन गया है। यहां के ग्रामीण प्राचीन तालाब में पैदा होने वाली सिंघाड़े और मुरार की फसल से अपना जीवकोपार्जन करते थे, लेकिन इस बार तालाब में पानी नहीं होने के कारण यह फसल नहीं हो पाईं हैं।  क्षेत्र में पच्चीस वर्ष बाद ऐसा संकट आया है।
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जिले में सबसे अधिक 22 मजरों (छोटे गांव) वाले ग्राम हर्षपुर में लगभग तीन हजार सहरिया जाति के लोग रहते हैं। यहां की आबादी लगभग आठ हजार है। यहां के मजरे दूर- दूर बसे हैं। 14.48 एकड़ के रकवा वाले तालाब में बरसात के समय पानी भर जाता है। तालाब की जमीन से डेढ़ सैकड़ा किसान परिवार जुड़े हैं। तालाब की जमीन पर सिंघाड़ा और मुरार की खेती होती है, जिसकी पूरे जिले में बिक्री होती है। लेकिन, इस वर्ष सूखा के कारण करीब 25 वर्ष में पहली बार यह तालाब सूख गया है।
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इस कारण यहां के किसानों के सामने रोजी- रोटी का संकट खड़ा हो गया है। इस तालाब में पानी रहने से भूमि तो सिंचित होती ही है, इस तालाब में सिघाड़े व मुरार उगाए जाते हैं, जिससे इन परिवारों की रोजी- रोटी चलती है।
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दरअसल, यह तालाब पिछले दस वर्ष से यहां से निकली नहर के पानी से भरता आ रहा है, लेकिन इस वर्ष नहर का पानी तालाब में नहीं भर सका। यदि प्रशासन समय रहते ध्यान देता, तो तालाब में पानी भरा होता और भूमि पर फसल उग रही होती। वहीं, गांव की स्थिति यह है कि मुख्य मजरा चौपार है। यहां की प्यास बुझाने के लिए एक मात्र हैंडपंप का सहारा है। सहरिया बस्ती झरपुरा में तीन सौ आदिवासी परिवार रहते हैं, यहां के कुआं सूख गए हैं।

एकमात्र हैंडपंप के सहारे ग्रामीण अपनी प्यास बुझा रहे हैं। चौपार के पास दलित बस्ती में बना सरकारी कुआं पहली बार सूखा है। अब दलित बस्ती के लोग एक किमी दूर स्थित हैंडपंप पर कतार में खड़े रहकर पानी लाकर अपनी प्यास बुझा रहे हैं। अनेक मजरों में टैंकर के सहारे पानी आपूर्ति की जा रही है।


आदिवासी मुहल्ला झरपुरा के कुआं सूख गए हैं। एक हैंडपंप ही मुहल्लावासियों का सहारा है, उसका वाटर लेबल भी दिनोंदिन कम होता जा रहा है।
- नंदू सहरिया

तालाब सूखने से गांव में जलसंकट अधिक गहरा गया है। सरकार से और टैंकर द्वारा पानी वितरण की मांग की गई है, जल्द ही टैंकर चलेंगे जिससे गांववासियों को राहत मिल सके।
- सोहन लाल श्रीवास
क्षेत्र पंचायत सदस्य हर्षपुर

गांव में दो टैंकर चलाकर मजरों में पानी दिया जा रहा है। पेयजल संकट देखते हुए प्रशासन से और हैंडपंप लगाने की मांग की गई है।
- अशोक यादव
ग्राम प्रधान, हर्षपुर
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