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हवा में जहर घोल रहे वाहन
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 10 Nov 2016 12:26 AM IST
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pollution lalitpur
- फोटो : demo
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जिले में बिना प्रदूषण जांच के हजारों वाहन फर्राटा भर रहे हैं। वाहनों के प्रदूषण प्रमाण पत्र तो जांचे जा रहे हैं, लेकिन इनकी फिटनेस और उससे निकलने वाले धुएं की मात्रा पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इससे सुबह आठ से रात आठ बजे तक मुख्य चौराहों और बाजारों के पास हवा में प्रदूषण की मात्रा अधिक पाई जा रही है। परिवहन और यातायात विभाग की लापरवाही से लोगों को सांस और एलर्जिक बीमारियां घेर रही हैं।
शहरी क्षेत्रों में प्रतिदिन वाहनों से निकलने वाले धुएं से प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। राज्य व केंद्र सरकारों द्वारा नियमों में बदलाव कर प्रदूषण पर लगातार सख्ती की जा रही है। यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट ने भी बढ़ रहे वाहनों के प्रदूषण पर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार से ठोस नीति बनाने के लिए जवाब तलब किया है। एआरटीओ व यातायात प्रशासन द्वारा प्रदूषण की जांच मात्र कागज देखने तक ही सीमित रह गई है। प्रदूषण जांच के लिए जनपद में मात्र चार केंद्र ही हैं। यहां वाहनों की जांच किस स्तर पर की जा रही है, इसकी समीक्षा नियमित नहीं हो रही है। यही वजह है कि धुआं निकाल रहे वाहन फर्राटा भर रहे हैं। सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक मुख्य चौराहों और सड़कों के पास धुएं का स्तर अधिक है। ऐसे में दुकानदारों, ठेला लगाने वालों को सांस, एलर्जी समेत विभिन्न प्रकार की बीमारियां चपेट में ले रही हैं। चिकित्सक मास्क लगाने की सलाह दे रहे हैं।
एआरटीओ व यातायात विभाग द्वारा बड़े व कॉमर्शियल वाहनों के प्रदूषण प्रमाण पत्रों की जांच तो की जाती है, लेकिन वाहन से निकलने वाले धुएं की मात्रा नहीं जांची जा रही है। इसके अलावा वाहनों की फिटनेस पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जनपद में एल्फाबैटिकल क्रम में पंद्रह सीरीज तक सभी प्रकार के वाहन संचालित हो रहे हैं, जिसके अंतर्गत एक सीरीज में करीब नौ से दस हजार वाहनों के पंजीकरण है। ऐसे में पूरे जनपद में करीब सत्तर से अस्सी हजार विभिन्न प्रकार के वाहनों से धुआं निकल रहा है। इनमें से अधिकांश वाहनों की फिटनेस खराब होने से वह अधिक मात्रा में धुआं निकालकर वातावरण प्रदूषित कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक कॉमर्शियल वाहनों को छोड़कर अधिकांश वाहन चालकों द्वारा प्रदूषण की जांच नहीं कराई जाती है। जबकि जनपद के सत्तर फीसदी दो पहिया वाहन चालक प्रदूषण की जांच नहीं करवाते हैं।
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मिट्टी के तेल से संचालित हो रहे तीन पहिया वाहन
ललितपुर। जनपद में बहुत से तीन पहिया वाहन तो मिट्टी के तेल से संचालित हो रहे हैं। वाहन चालकों द्वारा तीन पहिया वाहनों में डीजल पेट्रोल की जगह मिट्टी का तेल डालकर फिर उसमें मोबिल ऑयल मिला दिया जाता है। ऐसे में यह वाहन सामान्य से बहुत अधिक धुआं फेंकते हैं, जिससे शहर की ताजा हवा भी खराब हो रही है। ऐसे वाहनों से फैलने वाले प्रदूषण पर कार्रवाई न होने से यह खुलेआम नियमों का उल्लंघन करते संचालित हो रहे हैं।
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शहरी क्षेत्रों में प्रतिदिन वाहनों से निकलने वाले धुएं से प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। राज्य व केंद्र सरकारों द्वारा नियमों में बदलाव कर प्रदूषण पर लगातार सख्ती की जा रही है। यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट ने भी बढ़ रहे वाहनों के प्रदूषण पर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार से ठोस नीति बनाने के लिए जवाब तलब किया है। एआरटीओ व यातायात प्रशासन द्वारा प्रदूषण की जांच मात्र कागज देखने तक ही सीमित रह गई है। प्रदूषण जांच के लिए जनपद में मात्र चार केंद्र ही हैं। यहां वाहनों की जांच किस स्तर पर की जा रही है, इसकी समीक्षा नियमित नहीं हो रही है। यही वजह है कि धुआं निकाल रहे वाहन फर्राटा भर रहे हैं। सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक मुख्य चौराहों और सड़कों के पास धुएं का स्तर अधिक है। ऐसे में दुकानदारों, ठेला लगाने वालों को सांस, एलर्जी समेत विभिन्न प्रकार की बीमारियां चपेट में ले रही हैं। चिकित्सक मास्क लगाने की सलाह दे रहे हैं।
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एआरटीओ व यातायात विभाग द्वारा बड़े व कॉमर्शियल वाहनों के प्रदूषण प्रमाण पत्रों की जांच तो की जाती है, लेकिन वाहन से निकलने वाले धुएं की मात्रा नहीं जांची जा रही है। इसके अलावा वाहनों की फिटनेस पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जनपद में एल्फाबैटिकल क्रम में पंद्रह सीरीज तक सभी प्रकार के वाहन संचालित हो रहे हैं, जिसके अंतर्गत एक सीरीज में करीब नौ से दस हजार वाहनों के पंजीकरण है। ऐसे में पूरे जनपद में करीब सत्तर से अस्सी हजार विभिन्न प्रकार के वाहनों से धुआं निकल रहा है। इनमें से अधिकांश वाहनों की फिटनेस खराब होने से वह अधिक मात्रा में धुआं निकालकर वातावरण प्रदूषित कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक कॉमर्शियल वाहनों को छोड़कर अधिकांश वाहन चालकों द्वारा प्रदूषण की जांच नहीं कराई जाती है। जबकि जनपद के सत्तर फीसदी दो पहिया वाहन चालक प्रदूषण की जांच नहीं करवाते हैं।
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मिट्टी के तेल से संचालित हो रहे तीन पहिया वाहन
ललितपुर। जनपद में बहुत से तीन पहिया वाहन तो मिट्टी के तेल से संचालित हो रहे हैं। वाहन चालकों द्वारा तीन पहिया वाहनों में डीजल पेट्रोल की जगह मिट्टी का तेल डालकर फिर उसमें मोबिल ऑयल मिला दिया जाता है। ऐसे में यह वाहन सामान्य से बहुत अधिक धुआं फेंकते हैं, जिससे शहर की ताजा हवा भी खराब हो रही है। ऐसे वाहनों से फैलने वाले प्रदूषण पर कार्रवाई न होने से यह खुलेआम नियमों का उल्लंघन करते संचालित हो रहे हैं।