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वैक्सीन लगवाने नहीं पहुंच रहे लोग, खराब हो रही डोज
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ललितपुर। एक ओर सभी से वैक्सीन लगवाने की अपील की जा रही है लेकिन लोग वैक्सीन लगवाने केंद्रों पर नहीं पहुंच रहे हैं। कम लोगों के पहुंचने पर वायल खोले जाने से डोज खराब हो रहे हैं। ऐसी ही स्थिति जनपद के कई सेंटरों पर बनी हुई है। जहां पर एक दिन में 50 से 100 फीसदी डोज खराब हो रहे हैं।
संक्रमण से बचाव के लिए गाइडलाइन जारी कर वैक्सीनेशन के लिए जोर दिया जा रहा है। इसे लेकर प्रशासन के आला अधिकारी भी अधिक से अधिक टीकाकरण कराए जाने के लिए जोर दे रहे हैं। शुरूआती दौर में वैक्सीन के आने पर लोगों को महामारी से बचाव की उम्मीद जगी और टीकाकरण के लिए रुचि दिखाई। पहले टीकाकरण के दौरान लाभार्थियों की लंबी लाइनें लग रहीं थीं, और अधिकांश लोगों ने पहली डोज लगवाई। अब कई वैक्सीन को लेकर लोग रुचि नहीं ले रहे हैं। कई टीकाकरण केंद्र लाभार्थियों के न आने से सूने पड़े हैं। एक वायल खुलने पर दस लोगों को टीका लगता है। केंद्रों पर दस लोग तक नहीं पहुंच रहे हैं। स्वास्थ्य कर्मियों के फोन करने के बाद भी टीकाकरण के लिए नहीं पहुंच रहे हैं। ऐसे में कई स्वास्थ्य केंद्रों पर वैक्सीन खुलने के बाद लाभार्थियों के न आने के चलते डोज खराब हो रहे हैं। कुछ केंद्रों पर तो 50 से 100 फीसदी डोज तक खराब हो रहे हैं।
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इन केंद्रों पर हुई वैक्सीन खराब
ब्लॉक तालबेहट के ग्राम खांदी के उपकेंद्र पर 100 फीसदी डोज खराब हुए। उपकेंद्र जमालपुर में 80 फीसदी, पूरा बिरधा न्यू पीएचसी पर 50 फीसदी डोज खराब हुए। ब्लॉक जखौरा बांसी न्यू पीएचसी पर 80 फीसदी, उपकेंद्र घिसौली में 70 फीसदी, उपकेंद्र देवरी में 40, ग्राम बुढ़वार न्यू पीएचसी पर 60 प्रतिशत, ब्लॉक मड़ावरा के उपकेंद्र बम्हौरी में 90 प्रतिशत, बमराना में 70 फीसदी, ब्लॉक महरौनी के न्यू पीएचसी सौजना में 80 फीसदी डोज खराब हुए हैं।
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कई बार वैक्सीन खुलने के बाद नहीं आए लाभार्थी
एक वैक्सीन में दस डोज निकलते हैं। एक वैक्सीन खुलने पर दस लोगों को टीकाकरण किया जाना अनिवार्य है लेकिन कई बार वैक्सीन खुलने के बाद लाभार्थी नहीं आए। इससे दवा खराब हो गई। कई बार तो एक ही डोज लगा और लाभार्थी न होने से नौ डोज खराब हो गए हैं।
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वैक्सीन के एक वायल में 10 डोज होते हैं। वैक्सीनेशन के लिए कम लोगों के आने पर डोज खराब हो जाते हैं। डोज खराब न हों, इसके लिए विभाग द्वारा लगातार प्रयास किया जा रहा है।
- डॉ. डीके गर्ग, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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संक्रमण से बचाव के लिए गाइडलाइन जारी कर वैक्सीनेशन के लिए जोर दिया जा रहा है। इसे लेकर प्रशासन के आला अधिकारी भी अधिक से अधिक टीकाकरण कराए जाने के लिए जोर दे रहे हैं। शुरूआती दौर में वैक्सीन के आने पर लोगों को महामारी से बचाव की उम्मीद जगी और टीकाकरण के लिए रुचि दिखाई। पहले टीकाकरण के दौरान लाभार्थियों की लंबी लाइनें लग रहीं थीं, और अधिकांश लोगों ने पहली डोज लगवाई। अब कई वैक्सीन को लेकर लोग रुचि नहीं ले रहे हैं। कई टीकाकरण केंद्र लाभार्थियों के न आने से सूने पड़े हैं। एक वायल खुलने पर दस लोगों को टीका लगता है। केंद्रों पर दस लोग तक नहीं पहुंच रहे हैं। स्वास्थ्य कर्मियों के फोन करने के बाद भी टीकाकरण के लिए नहीं पहुंच रहे हैं। ऐसे में कई स्वास्थ्य केंद्रों पर वैक्सीन खुलने के बाद लाभार्थियों के न आने के चलते डोज खराब हो रहे हैं। कुछ केंद्रों पर तो 50 से 100 फीसदी डोज तक खराब हो रहे हैं।
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इन केंद्रों पर हुई वैक्सीन खराब
ब्लॉक तालबेहट के ग्राम खांदी के उपकेंद्र पर 100 फीसदी डोज खराब हुए। उपकेंद्र जमालपुर में 80 फीसदी, पूरा बिरधा न्यू पीएचसी पर 50 फीसदी डोज खराब हुए। ब्लॉक जखौरा बांसी न्यू पीएचसी पर 80 फीसदी, उपकेंद्र घिसौली में 70 फीसदी, उपकेंद्र देवरी में 40, ग्राम बुढ़वार न्यू पीएचसी पर 60 प्रतिशत, ब्लॉक मड़ावरा के उपकेंद्र बम्हौरी में 90 प्रतिशत, बमराना में 70 फीसदी, ब्लॉक महरौनी के न्यू पीएचसी सौजना में 80 फीसदी डोज खराब हुए हैं।
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कई बार वैक्सीन खुलने के बाद नहीं आए लाभार्थी
एक वैक्सीन में दस डोज निकलते हैं। एक वैक्सीन खुलने पर दस लोगों को टीकाकरण किया जाना अनिवार्य है लेकिन कई बार वैक्सीन खुलने के बाद लाभार्थी नहीं आए। इससे दवा खराब हो गई। कई बार तो एक ही डोज लगा और लाभार्थी न होने से नौ डोज खराब हो गए हैं।
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वैक्सीन के एक वायल में 10 डोज होते हैं। वैक्सीनेशन के लिए कम लोगों के आने पर डोज खराब हो जाते हैं। डोज खराब न हों, इसके लिए विभाग द्वारा लगातार प्रयास किया जा रहा है।
- डॉ. डीके गर्ग, मुख्य चिकित्सा अधिकारी