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एकल में शांति और अनेकत्व में अशांति : निर्भय सागर
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ललितपुर। आचार्य निर्भय सागर महाराज ने कहा कि आकिंचन धर्म आत्मा की उस दशा का नाम है जहां बाहरी राग छूट जाता है किंतु आंतरिक संकल्प विकल्पों की परिणति को भी विश्राम मिल जाता है। वह शुक्रवार को पर्यूषण पर्व पर पार्श्वनाथ दिगंबर जैन अटा मंदिर में धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे।
आचार्यश्री ने कहा कि बाहरी वस्तुओं के त्याग के बाद भी मन में मैं और मेरे धन का भाव निरंतर चलता रहता है और मुक्ति की यात्रा नहीं कर पाती है। आधा का धर्म जीवन की यात्रा को एकांकी बढ़ाने का धर्म है जिसमें अपने और पराए का भेद समझकर निर्विकल्प एकांकी आत्मा की अनुभूति में उतरना पड़ता है। उन्होंने कहा कि एकल में शांति और अनेकत्व में अशांति है। एकाकीपन में आनंद की अनुभूति होती है, वही आत्मकल्याण में साधक है।
धर्म सभा का शुभारंभ आचार्य विद्यासागर महाराज आचार्य अभिनंदन सागर महाराज, आचार्य विपुल सागर महाराज के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर श्रेष्ठीजनों ने किया। प्रारंभ में तत्वार्थ सूत्र का वाचन आचार्य संघ के सानिध्य में हुआ। प्रातःकाल आचार्य श्री के सान्निध्य में श्रावकों को ध्यान की साधना कराई गई। दिगंबर जैन पंचायत के अध्यक्ष डॉ. अक्षय टड़या, अशोक दैलवारा, राजेंद्र जैन, मनोज जैन, अजय जैन गंगचारी, सतीश नजा, शीलचंद्र अनोरा, मीडिया प्रभारी अक्षय अलया ने आचार्य श्री को श्रीफल अर्पित कर अनंत चतुर्थी पर आयोजित कार्यक्रम के लिए आशीर्वाद लिया। धर्मसभा का संचालन महामंत्री डॉ. आकाश ने किया।
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अभिनंदनोदय तीर्थ में मुनि सुदत्त सागर महाराज एवं मुनि पदमदत्त सागर महाराज के सानिध्य में श्रावकों ने प्रभु अभिषेक शांतिधारा की। उन्होंने जीवन में शांति के लिए धर्म से जुड़ने को कहा। उधर, अभिनंदनोदय तीर्थ, जैन अटामंदिर, आदिनाथ बड़ा मंदिर, पार्श्वनाथ नया मंदिर, आदिनाथ मंदिर गांधीनगर, चंद्रप्रभू मंदिर डोडाघाट, शांतिनगर मंदिर गांधीनगर, इलाइट जैन मंदिर, सिविल लाइन, वाहुवलिनगर पार्श्वनाथ कॉलोनी एंड्रोशिया कॉलोनी में प्रातःकाल से मंदिर पूजन अभिषेक के साथ पुण्यार्जन कर रहे हैं। पर्यूषण पर्व पर जैन मंदिरों में बालक बालिका मंडल ने आकर्षक झांकी लगाई जो आकर्षण का केंद्र रही।
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आचार्यश्री ने कहा कि बाहरी वस्तुओं के त्याग के बाद भी मन में मैं और मेरे धन का भाव निरंतर चलता रहता है और मुक्ति की यात्रा नहीं कर पाती है। आधा का धर्म जीवन की यात्रा को एकांकी बढ़ाने का धर्म है जिसमें अपने और पराए का भेद समझकर निर्विकल्प एकांकी आत्मा की अनुभूति में उतरना पड़ता है। उन्होंने कहा कि एकल में शांति और अनेकत्व में अशांति है। एकाकीपन में आनंद की अनुभूति होती है, वही आत्मकल्याण में साधक है।
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धर्म सभा का शुभारंभ आचार्य विद्यासागर महाराज आचार्य अभिनंदन सागर महाराज, आचार्य विपुल सागर महाराज के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर श्रेष्ठीजनों ने किया। प्रारंभ में तत्वार्थ सूत्र का वाचन आचार्य संघ के सानिध्य में हुआ। प्रातःकाल आचार्य श्री के सान्निध्य में श्रावकों को ध्यान की साधना कराई गई। दिगंबर जैन पंचायत के अध्यक्ष डॉ. अक्षय टड़या, अशोक दैलवारा, राजेंद्र जैन, मनोज जैन, अजय जैन गंगचारी, सतीश नजा, शीलचंद्र अनोरा, मीडिया प्रभारी अक्षय अलया ने आचार्य श्री को श्रीफल अर्पित कर अनंत चतुर्थी पर आयोजित कार्यक्रम के लिए आशीर्वाद लिया। धर्मसभा का संचालन महामंत्री डॉ. आकाश ने किया।
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अभिनंदनोदय तीर्थ में मुनि सुदत्त सागर महाराज एवं मुनि पदमदत्त सागर महाराज के सानिध्य में श्रावकों ने प्रभु अभिषेक शांतिधारा की। उन्होंने जीवन में शांति के लिए धर्म से जुड़ने को कहा। उधर, अभिनंदनोदय तीर्थ, जैन अटामंदिर, आदिनाथ बड़ा मंदिर, पार्श्वनाथ नया मंदिर, आदिनाथ मंदिर गांधीनगर, चंद्रप्रभू मंदिर डोडाघाट, शांतिनगर मंदिर गांधीनगर, इलाइट जैन मंदिर, सिविल लाइन, वाहुवलिनगर पार्श्वनाथ कॉलोनी एंड्रोशिया कॉलोनी में प्रातःकाल से मंदिर पूजन अभिषेक के साथ पुण्यार्जन कर रहे हैं। पर्यूषण पर्व पर जैन मंदिरों में बालक बालिका मंडल ने आकर्षक झांकी लगाई जो आकर्षण का केंद्र रही।