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200 पशुपालकों को डेयरी उत्पादन एवं प्रबंधन विषय पर दिया प्रशिक्षण
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ललितपुर। कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से 200 पशुपालकों को डेयरी उत्पादन एवं प्रबंधन विषय पर प्रशिक्षण दिया गया। केंद्र की अध्यक्ष डॉ. सरिता देवी ने कहा कि केंद्र सरकार के डेयरी एवं पशुपालन विभाग की ओर से संचालित इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसानों के तकनीकी ज्ञान में बढ़ोतरी के साथ-साथ वैज्ञानिक विधि से डेयरी फार्मिंग और प्रबंधन द्वारा उनकी आमदनी बढ़ाना है। युवकों को इस प्रशिक्षण के माध्यम से रोजगार के अवसर भी उपलब्ध होंगे।
पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. मारूफ अहमद ने कहा कि तीन दिवसीय कार्यक्रम में 40 पशुपालकों के समूह का प्रशिक्षण बरखेरा, खिरियामिश्र, पठौराकलां, परौदा और ककरूआ गांव में हुआ। प्रशिक्षण के माध्यम से किसानों को वैज्ञानिक विधि से पशुपालन केे तरीके सिखाए गए। उन्होंने कहा कि जिले की जलवायु के अनुसार पशुओं की उन्नत नस्लें एवं उनके आवास की व्यवस्था और पोषण आहार की व्यवस्था होनी चाहिए। पशुओं में होने वाली विभिन्न बीमारियों एवं उनके उपचार के विषय में भी पशुपालकों को जानकारी दी गई। इस मौके पर पशुओं में विभिन्न टीकाकरण के बारे में किसानों को प्रशिक्षित किया गया, ताकि वे पशुओं में होने वाली बीमारियों से बचाव कर सकें। वर्ष भर पशुओं का हरे चारे की उपलब्धता के लिए साइलेज बनाने पर जोर दिया गया, ताकि पशुओं को उच्च गुणवत्ता वाला चारा उपलब्ध हो सके। कार्यक्रम के दौरान किसान को अच्छी नस्लों के पशुओं को पालने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
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पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. मारूफ अहमद ने कहा कि तीन दिवसीय कार्यक्रम में 40 पशुपालकों के समूह का प्रशिक्षण बरखेरा, खिरियामिश्र, पठौराकलां, परौदा और ककरूआ गांव में हुआ। प्रशिक्षण के माध्यम से किसानों को वैज्ञानिक विधि से पशुपालन केे तरीके सिखाए गए। उन्होंने कहा कि जिले की जलवायु के अनुसार पशुओं की उन्नत नस्लें एवं उनके आवास की व्यवस्था और पोषण आहार की व्यवस्था होनी चाहिए। पशुओं में होने वाली विभिन्न बीमारियों एवं उनके उपचार के विषय में भी पशुपालकों को जानकारी दी गई। इस मौके पर पशुओं में विभिन्न टीकाकरण के बारे में किसानों को प्रशिक्षित किया गया, ताकि वे पशुओं में होने वाली बीमारियों से बचाव कर सकें। वर्ष भर पशुओं का हरे चारे की उपलब्धता के लिए साइलेज बनाने पर जोर दिया गया, ताकि पशुओं को उच्च गुणवत्ता वाला चारा उपलब्ध हो सके। कार्यक्रम के दौरान किसान को अच्छी नस्लों के पशुओं को पालने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
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