मड़ावरा (ललितपुर)। आर्यिका रत्न अंतरमति माता ने कहा कि जैन धर्म के अनुसार जिसको मोक्ष प्राप्त हो जाता है उस मनुष्य का जन्म लेना सार्थक हो जाता है। उन्होंने कहा कि तीर्थंकर पार्श्वनाथ क्षमा के प्रतीक हैं। उन्होंने कमठ का उपसर्ग सहन करते हुए भी वह क्षमा को धारण किया था। वह मंगलवार को मोक्ष सप्तमी के अवसर धर्म सभा को संबोधित कर रहीं थी। इस मौके पर निर्वाण लाडू सजाओ प्रतियोगिता आयोजित की गई। जिसमें प्रथम, द्वितीय, तृतीय और सांत्वना पुरस्कार प्रदान किए गए।
वर्णीनगर मड़ावरा में आचार्य श्रेष्ठ 108 विद्यासागर महाराज और आर्यिका रत्न 105 आदर्शमति माता जी के मंगल आशीर्वाद से आर्यिका रत्न 105 अंतरमति, ऐतिहासिक चातुर्मास चल रहा। मोक्ष सप्तमी पर भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक महोत्सव बडे़ हर्ष व उत्साह से मनाया गया। ब्रह्मचारी संजीव भैया कटंगी के निर्देशन में विधि-विधान पूर्वक पूजन व निर्वाण लाडू चढ़ाया गया। प्रात:काल की बेला में भगवान जिनेंद्र का जलाभिषेक किया गया साथ ही कोरोना रोग निवारणार्थ विश्व शांति की कामना को शांतिधारा कर सर्वजन सुखाय की कामना की गई। आर्यिका रत्न अंतरमति, अनुग्रहमति, अक्षयमति, निर्मदमति, ध्यानमति माताजी ससंघ के पावन सानिध्य में नगर की ह्रदयस्थली श्री महावीर विद्या विहार के परिसर में भगवान नेमिनाथ एवं पार्श्वनाथ विधान का आयोजन किया गया। मंडल पर सम्मेद शिखर की सभी टोंको के साथ तलहटी के मंदिर के साथ 80 अर्घ समर्पित किए। भगवान पार्श्वनाथ मोक्ष कल्याणक महोत्सव में निर्वाण लाडू भक्तिभाव के साथ समर्पित किया गया।