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बागी उम्मीदवार राजनैतिक दलों का बिगाड़ रहे खेल
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- फोटो : voting.jpg
ललितपुर। जिला पंचायत के चुनावों में टिकट नहीं मिलने से नाराज कई नेताओं ने स्वयं, पत्नी या रिश्तेदारों का नामांकन भरवाकर राजनीतिक दलों का समीकरण बिगाड़ दिया है। इस समस्या से सबसे ज्यादा सत्तारूढ़ दल भाजपा जूझती दिख रही है। हालांकि पार्टी के जिम्मेदार नेताओं ने ऐसे उम्मीदवारों को अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए चेताया था। इसके बाद भी बागी उम्मीदवार पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं।
जिला पंचायत सदस्य पद के लिए चुनाव प्रचार तेज हो गया है। पार्टी नेताओं द्वारा अपने अधिकृत प्रत्याशी के पक्ष में जनसंपर्क किया जा रहा है। इस दौरान उन्हें बागियों के प्रचार से पार्टी के प्रत्याशी को नुकसान होने का अंदेशा सताने लगा है। नामांकन पत्र वापसी तक पार्टी की ओर से बागियों को मनाने की पूरी कोशिश की गई लेकिन अधिकतर बागी अपना पर्चा वापस लेने के लिए तैयार नहीं हुए। समाजवादी पार्टी ने इस स्थिति को पहले ही भांप लिया था, इस कारण उसने चार सीटों पर अपने अधिकृत प्रत्याशी घोषित ही नहीं किए। ऐसी सीटों पर एक से अधिक पार्टी के नेता चुनाव लड़ रहे हैं। कांग्रेस भी बागी नेताओं से परेशान है। सबसे ज्यादा परेशानी में भाजपा दिखाई दे रही है। सिलावन व खितवांस सीट पर बागी उम्मीदवार पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों के लिए कड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं। कुछ नेता ऐसे हैं, जिन्होंने कार्रवाई से बचने के लिए पत्नी, भाई या रिश्तेदारों को मैदान में उतार दिया है। वहीं कुछ नेता हैं जिन्होंने दूसरे दलों से अपने परिजनों को टिकट दिलाकर पार्टी नेताओं को अपनी हैसियत का अहसास करा दिया है। उधर, नवनियुक्त जिलाध्यक्ष राजकुमार जैन व सदर विधायक रामरतन कुशवाहा ने प्रेस वार्ता कर बागी उम्मीदवारों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की बात कही थी। हालांकि, पार्टी अभी तक बागियों के खिलाफ कोई निर्णय नहीं ले पाई है, फिलहाल ऐसे मामले चर्चा का विषय बने हैं।
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अधिकृत उम्मीदवारों के विरोध में उतरे बागियों के प्रति पार्टी गंभीर है। उनके खिलाफ कार्रवाई के संबंध में विचार-विमर्श किया जा रहा है।
देवेंद्र गुुरु, जिला मीडिया प्रभारी
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जिला पंचायत सदस्य पद के लिए चुनाव प्रचार तेज हो गया है। पार्टी नेताओं द्वारा अपने अधिकृत प्रत्याशी के पक्ष में जनसंपर्क किया जा रहा है। इस दौरान उन्हें बागियों के प्रचार से पार्टी के प्रत्याशी को नुकसान होने का अंदेशा सताने लगा है। नामांकन पत्र वापसी तक पार्टी की ओर से बागियों को मनाने की पूरी कोशिश की गई लेकिन अधिकतर बागी अपना पर्चा वापस लेने के लिए तैयार नहीं हुए। समाजवादी पार्टी ने इस स्थिति को पहले ही भांप लिया था, इस कारण उसने चार सीटों पर अपने अधिकृत प्रत्याशी घोषित ही नहीं किए। ऐसी सीटों पर एक से अधिक पार्टी के नेता चुनाव लड़ रहे हैं। कांग्रेस भी बागी नेताओं से परेशान है। सबसे ज्यादा परेशानी में भाजपा दिखाई दे रही है। सिलावन व खितवांस सीट पर बागी उम्मीदवार पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों के लिए कड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं। कुछ नेता ऐसे हैं, जिन्होंने कार्रवाई से बचने के लिए पत्नी, भाई या रिश्तेदारों को मैदान में उतार दिया है। वहीं कुछ नेता हैं जिन्होंने दूसरे दलों से अपने परिजनों को टिकट दिलाकर पार्टी नेताओं को अपनी हैसियत का अहसास करा दिया है। उधर, नवनियुक्त जिलाध्यक्ष राजकुमार जैन व सदर विधायक रामरतन कुशवाहा ने प्रेस वार्ता कर बागी उम्मीदवारों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की बात कही थी। हालांकि, पार्टी अभी तक बागियों के खिलाफ कोई निर्णय नहीं ले पाई है, फिलहाल ऐसे मामले चर्चा का विषय बने हैं।
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अधिकृत उम्मीदवारों के विरोध में उतरे बागियों के प्रति पार्टी गंभीर है। उनके खिलाफ कार्रवाई के संबंध में विचार-विमर्श किया जा रहा है।
देवेंद्र गुुरु, जिला मीडिया प्रभारी