{"_id":"616888133329c92e83237eef","slug":"pahadi-wali-mata-lalitpur-news-jhs20661382","type":"story","status":"publish","title_hn":"हर मुराद पूरी करती हैं पहाड़ी वाली माता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हर मुराद पूरी करती हैं पहाड़ी वाली माता
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ललितपुर/ कारीटोरन। ब्लॉक बार अंतर्गत ग्राम कारीटोरन में पहाड़ पर स्थित पहाड़ी वाली माता भक्तों की सभी मुराद पूरी करने के लिए प्रसिद्ध हैं। ग्रामीणों का मानना है कि मंदिर पर आने वाले सभी भक्तों की माता मनोकामना पूरी करतीं हैं। मंदिर पर नवरात्र की धूम मची है। श्रद्धालु सुबह से जल अर्पित कर दर्शनों को पहुंच रहे हैं।
ग्राम में मंदिर का निर्माण गांव की रक्षा के लिए वर्ष 1970 में माता मंदिर का निर्माण पहाड़ पर किया गया था। मंदिर पहाड़ पर होने से पहाड़ वाली माता नाम से मंदिर प्रसिद्ध है। पहले मंदिर तक पहुंचने के लिए सीढ़ी नहीं थीं, मंदिर तक पहुंचना मुश्किल होता था। ग्रामवासियों का मानना है कि मां अपने भक्तों की हर मुराद पूरी करती हैं। ग्रामीण क्षेत्र में शारदीय नवरात्र की धूम मची है। नवरात्र महोत्सव में नौ दिन तक ग्रामवासी सुबह से ही जल अभिषेक व दर्शनों के लिए पहुंचते हैं। गांव निवासी अरजन, दुरजू, रागवर, राम्फे बताते हैं कि पहले मंदिर तक पहुंचने का रास्ता काफी दुर्गम था, लोगों को मंदिर तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है जिसके बाद ग्रामीणों ने सीढ़ियों का निर्माण करा लिया। साथ ही बताते हैं कि गांव में कई बार हैजा बीमारी फैल जाती थी, जिसके बाद ग्रामीणों ने देवी मां की प्रार्थना करते हुए पहाड़ पर मूर्ति को बैठाया था। माता प्रतिमा की स्थापना के बाद हैजा सदा के लिए समाप्त हो गया। माता मंदिर में भक्त नवरात्र के साथ ही वर्ष भर आते हैं।
विज्ञापन
ग्राम में मंदिर का निर्माण गांव की रक्षा के लिए वर्ष 1970 में माता मंदिर का निर्माण पहाड़ पर किया गया था। मंदिर पहाड़ पर होने से पहाड़ वाली माता नाम से मंदिर प्रसिद्ध है। पहले मंदिर तक पहुंचने के लिए सीढ़ी नहीं थीं, मंदिर तक पहुंचना मुश्किल होता था। ग्रामवासियों का मानना है कि मां अपने भक्तों की हर मुराद पूरी करती हैं। ग्रामीण क्षेत्र में शारदीय नवरात्र की धूम मची है। नवरात्र महोत्सव में नौ दिन तक ग्रामवासी सुबह से ही जल अभिषेक व दर्शनों के लिए पहुंचते हैं। गांव निवासी अरजन, दुरजू, रागवर, राम्फे बताते हैं कि पहले मंदिर तक पहुंचने का रास्ता काफी दुर्गम था, लोगों को मंदिर तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है जिसके बाद ग्रामीणों ने सीढ़ियों का निर्माण करा लिया। साथ ही बताते हैं कि गांव में कई बार हैजा बीमारी फैल जाती थी, जिसके बाद ग्रामीणों ने देवी मां की प्रार्थना करते हुए पहाड़ पर मूर्ति को बैठाया था। माता प्रतिमा की स्थापना के बाद हैजा सदा के लिए समाप्त हो गया। माता मंदिर में भक्त नवरात्र के साथ ही वर्ष भर आते हैं।

कारीटोरन मंदिर में देवी प्रतिमा- फोटो : LALITPUR
विज्ञापन