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28 साल बाद पहली बार ठाठबाट से नहीं निकलेगी भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा
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जगदीश मंदिर में विराजमान भगवान श्री जगन्नाथ जी
- फोटो : LALITPUR
ललितपुर। शहर में इस बार भगवान जगन्नाथजी की रथयात्रा निकाले जाने की परंपरा कोरोना वायरस के चलते बदल सकती है। मंदिर समिति ने जिला प्रशासन से पुरी की तर्ज पर रथों को सीमित श्रद्धालुओं के साथ घंटाघर से सावरकर चौराहा तक अथवा मंदिर प्रांगण में ही 50 श्रद्धालुओं के साथ रथयात्रा का आयोजन करने की अनुमति मांगी है।
शहर के मध्य घंटाघर के पास स्थित श्रीजगदीश मंदिर में विराजमान भगवान श्रीजगन्नाथ की रथयात्रा का आयोजन हर वर्ष परंपरा के अनुसार पुरी की तर्ज पर जून में किया जाता है। मंदिर समिति द्वारा शहर में 28 वर्षों से श्री जगन्नाथ रथयात्रा का आयोजन राजसी ठाठबाट के साथ किया जा रहा है। लेकिन, इस बार रथयात्रा निकाले जाने की परंपरा कोरोना वायरस महामारी के चलते बदल सकती है। हालांकि, मंदिर समिति की मांग पर जिला प्रशासन विचार कर रहा है। यदि जिला प्रशासन की अनुमति रथयात्रा निकालने की मिल जाती है तो कुछ जरूरी शर्तों के साथ घंटाघर से सावरकर चौक तक या फिर केवल मंदिर प्रांगण में ही भगवान श्रीजगन्नाथजी, बलभद्रजी एवं सुभद्राजी को रथों में बैठाकर मंदिर प्रांगण तक लाया जाएगा और फिर इसके बाद परंपरा निभाकर सीमित श्रद्धालुओं के बीच आरती कर सभी भगवानों के विग्रहों को मंदिर में वापस विराजमान किया जाएगा।
इसमें श्रद्धालुओं को सोशल डिस्टेंस का पालन भी करना होगा और सभी श्रद्धालुओं का मास्क पहनकर ही आयोजन में शामिल होना होगा। इस दौरान श्रद्धालु भगवान के रथों को भी नहीं खींच सकेंगे और न ही अधिक समय तक मंदिर प्रांगण में रुक सकेंगे। एक-एक कर श्रद्धालुओं को भगवान के दर्शन कराए जाएंगे और भगवान जगन्नाथ का भात रूपी प्रसाद वितरण किया जाएगा।
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23 को निकाली जाती है रथयात्रा
श्री जगदीश मंदिर समिति के पदाधिकारियों व सदस्यों की बैठक सोमवार को मंदिर प्रांगण में हुई। इसमें समिति के सदस्यों ने रथयात्रा के आयोजन को लेकर चर्चा की। समिति ने निर्णय लिया कि जिला प्रशासन की अनुमति मिलने के बाद सीमित श्रद्घालुओं की उपस्थिति में ही परंपरा निभाई जाएगी। रथयात्रा का आयोजन 23 जून को होना है। बैठक में बताया गया कि श्रीजगदीश मंदिर समिति ने जिला प्रशासन से 23 जून को रथयात्रा निकालने की अनुमति मांगी है। बैठक में मंदिर समिति के सुधांशु शेखर हुंडैत, चंद्रविनोद हुंडैत, विभाकांत हुंडैत, हृदेश हुंडैत, पंकज हुंडैत, विजय गोपाल हुंडैत, अनुज, किंजल्क, संजीव हुंडैत, पीयूष हुंडैत उपस्थित रहे।
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शहर के मध्य घंटाघर के पास स्थित श्रीजगदीश मंदिर में विराजमान भगवान श्रीजगन्नाथ की रथयात्रा का आयोजन हर वर्ष परंपरा के अनुसार पुरी की तर्ज पर जून में किया जाता है। मंदिर समिति द्वारा शहर में 28 वर्षों से श्री जगन्नाथ रथयात्रा का आयोजन राजसी ठाठबाट के साथ किया जा रहा है। लेकिन, इस बार रथयात्रा निकाले जाने की परंपरा कोरोना वायरस महामारी के चलते बदल सकती है। हालांकि, मंदिर समिति की मांग पर जिला प्रशासन विचार कर रहा है। यदि जिला प्रशासन की अनुमति रथयात्रा निकालने की मिल जाती है तो कुछ जरूरी शर्तों के साथ घंटाघर से सावरकर चौक तक या फिर केवल मंदिर प्रांगण में ही भगवान श्रीजगन्नाथजी, बलभद्रजी एवं सुभद्राजी को रथों में बैठाकर मंदिर प्रांगण तक लाया जाएगा और फिर इसके बाद परंपरा निभाकर सीमित श्रद्धालुओं के बीच आरती कर सभी भगवानों के विग्रहों को मंदिर में वापस विराजमान किया जाएगा।
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इसमें श्रद्धालुओं को सोशल डिस्टेंस का पालन भी करना होगा और सभी श्रद्धालुओं का मास्क पहनकर ही आयोजन में शामिल होना होगा। इस दौरान श्रद्धालु भगवान के रथों को भी नहीं खींच सकेंगे और न ही अधिक समय तक मंदिर प्रांगण में रुक सकेंगे। एक-एक कर श्रद्धालुओं को भगवान के दर्शन कराए जाएंगे और भगवान जगन्नाथ का भात रूपी प्रसाद वितरण किया जाएगा।
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23 को निकाली जाती है रथयात्रा
श्री जगदीश मंदिर समिति के पदाधिकारियों व सदस्यों की बैठक सोमवार को मंदिर प्रांगण में हुई। इसमें समिति के सदस्यों ने रथयात्रा के आयोजन को लेकर चर्चा की। समिति ने निर्णय लिया कि जिला प्रशासन की अनुमति मिलने के बाद सीमित श्रद्घालुओं की उपस्थिति में ही परंपरा निभाई जाएगी। रथयात्रा का आयोजन 23 जून को होना है। बैठक में बताया गया कि श्रीजगदीश मंदिर समिति ने जिला प्रशासन से 23 जून को रथयात्रा निकालने की अनुमति मांगी है। बैठक में मंदिर समिति के सुधांशु शेखर हुंडैत, चंद्रविनोद हुंडैत, विभाकांत हुंडैत, हृदेश हुंडैत, पंकज हुंडैत, विजय गोपाल हुंडैत, अनुज, किंजल्क, संजीव हुंडैत, पीयूष हुंडैत उपस्थित रहे।