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नर्सिंग होम ने मासूम व प्रसूताओं को संक्रमण के खतरे में डाला
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नर्सिंग होम के बाहर लगाई गई बल्लियां
- फोटो : LALITPUR
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ललितपुर। जनपद में एक तरफ कोरोना का संक्रमण तेजी से फैल रहा है, वहीं जिम्मेदारों की लापरवाही भी थमने का नाम नहीं ले रही है। एक नर्सिंगहोम कर्मी के संक्रमित होने की पुुष्टि के बाद भी दो दिन तक प्रसव होते रहे, लेकिन अस्पताल को सील नहीं किया गया। अस्पताल को रविवार को सील किया गया।
शासन द्वारा भले ही कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हों, लेकिन जिम्मेदारों की उदासीनता इस पर भारी पड़ रही है। कोरोना संक्रमित क्षेत्र को सील कर कंटेनमेंट जोन घोषित करने का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही कार्यस्थल को सैनिटाइज कर सील करने का प्रावधान है। लेकिन, जिले में खुलेआम शासन के निर्देशों की धज्जियां उड़ाकर आम जन के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
ऐसी ही स्थिति जिले में कोरोना संक्रमण रोकने को लेकर बनी हुई है। शहर के एक नर्सिंग होम के कर्मचारी में लक्षण होने के कारण 10 जुलाई को सैंपल लिया गया, जिसकी रिपोर्ट उसी दिन शाम को पॉजिटिव आई। उसे उपचार के लिए झांसी रेफर कर दिया गया। उसके मोहल्ले को कंटेनमेंट जोन घोषित कर सील कर दिया गया।
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लेकिन, जिस नर्सिंग होम का कर्मचारी था, उसे न तो सैनिटाइज किया गया और न ही सील किया गया। इतना ही नहीं नर्सिंग पूर्व की भांति चलता रहा। यहां पर प्रसव अधिक होते हैं। इससे नर्सिंग होम में अधिक भीड़ रहती है। इससे बच्चे व प्रसूता को संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। इसके बाद भी न तो नर्सिंगहोम को सील किया गया और न ही प्रसव करने पर प्रतिबंध लगाया गया। इतना ही नहीं नर्सिंग होम संचालक भी मानवीय संवेदनाओं को भूल गए।
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एक नर्सिंग होम कर्मी के कोरोना पॉजिटिव होने के दो दिन बाद अस्पताल को सील किया गया। इस संबंध में नोडल अधिकारी से वार्ता की जाएगी।
- डॉ. प्रताप सिंह, मुख्यि चिकित्सा अधिकारी
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शासन द्वारा भले ही कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हों, लेकिन जिम्मेदारों की उदासीनता इस पर भारी पड़ रही है। कोरोना संक्रमित क्षेत्र को सील कर कंटेनमेंट जोन घोषित करने का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही कार्यस्थल को सैनिटाइज कर सील करने का प्रावधान है। लेकिन, जिले में खुलेआम शासन के निर्देशों की धज्जियां उड़ाकर आम जन के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
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ऐसी ही स्थिति जिले में कोरोना संक्रमण रोकने को लेकर बनी हुई है। शहर के एक नर्सिंग होम के कर्मचारी में लक्षण होने के कारण 10 जुलाई को सैंपल लिया गया, जिसकी रिपोर्ट उसी दिन शाम को पॉजिटिव आई। उसे उपचार के लिए झांसी रेफर कर दिया गया। उसके मोहल्ले को कंटेनमेंट जोन घोषित कर सील कर दिया गया।
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लेकिन, जिस नर्सिंग होम का कर्मचारी था, उसे न तो सैनिटाइज किया गया और न ही सील किया गया। इतना ही नहीं नर्सिंग पूर्व की भांति चलता रहा। यहां पर प्रसव अधिक होते हैं। इससे नर्सिंग होम में अधिक भीड़ रहती है। इससे बच्चे व प्रसूता को संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। इसके बाद भी न तो नर्सिंगहोम को सील किया गया और न ही प्रसव करने पर प्रतिबंध लगाया गया। इतना ही नहीं नर्सिंग होम संचालक भी मानवीय संवेदनाओं को भूल गए।
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एक नर्सिंग होम कर्मी के कोरोना पॉजिटिव होने के दो दिन बाद अस्पताल को सील किया गया। इस संबंध में नोडल अधिकारी से वार्ता की जाएगी।
- डॉ. प्रताप सिंह, मुख्यि चिकित्सा अधिकारी