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टंकियों में नहीं पानी, कैसे कटे जिंदगानी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 20 Dec 2016 01:04 AM IST
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water crisis, lalitpur news
- फोटो : demo
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नगर पंचायत पाली में लोगों को पीने के पानी के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ठंड में भी पानी के लिए लोगों को एक- एक बूंद को भटकना पड़ रहा है। अधिकांश आबादी हैंडपंप पर निर्भर है। पंद्रह साल से जल संस्थान के पास पानी की व्यवस्था का जिम्मा है, लेकिन विभाग अब तक यहां की समस्या को दूर नहीं कर सका है।
पाली की आबादी लगभग 22 हजार है। लगभग पच्चीस सौ मकान हैं, जिनमें से मात्र 542 में ही पानी के कनेक्शन हैं। इनमें भी कई उपभोक्ताओं के घरों में पानी नही पहुंच रहा है। 2001 से पहले तक पाली की
पेयजल व्यवस्था जलनिगम के हवाले थी। रणछोर धाम से निकलने वाली बेतवा नदी का पानी धौर्रा से सप्लाई होकर पाली के उपभोक्ताओं को मिलता था। सन 2001 में जलनिगम की सारी व्यवस्थाएं जल संस्थान के पास आ गई तो लोगों को लगा कि पेयजल समस्या दूर होगी, लेकिन अब भी यहां पानी का संकट बरकरार है। यहां पानी की टो टंकियां थीं। जल निगम की टंकी जवाब दे गयी है। सिर्फ बड़ी टंकी का ही सहारा है। चार नलकूप हैं, जिनमें से दो बंद हैं। पर्याप्त बिजली न मिलने से यह नलकूप टंकी को कभी पूरा नहीं भर पाते जिसके चलते आपूर्ति पटरी से उतरी रहती है। वार्ड नंबर 4,5,7,9,10 मे पानी कहीं कम तो कहीं बिल्कुल नहीं पहुंचता है। टिपुआ, मंदिर मुहल्ला, मधवापूरा, मस्जिद मुहल्ला में पानी नहीं पहुंचता है। ऐसे हालातों में 245 हैंडपंप का ही आसरा है। दिनभर हैंडपंपों पर भीड़ रहती है।
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नलकूप नहीं हुआ सफल
नगर पंचायत ने 13 वें वित्त आयोग से नीलकंठ मार्ग पर नलकूप खुदवाया गया था। इसका पानी तो मीठा निकला लेकिन जलधारा पर्याप्त नहीं निकली जिससे बमुश्किल 20 नलों में ही पानी आ रहा है।
अमर उजाला की खबरें लाईं रंग
पाली के लोग स्वीकारते हैं कि अमर उजाला की खबरें रंग र्लाइं। 11 अप्रैल को शीर्षक '' रसातल मे पानी, बदतर जिंदगानी,, 8 मई को '' नीलकंठ की धरा पर सूखने लगे है कंठ'' 10 जून को''' नलों मे 10 मिनट ही रहा पानी,, तो 6 वार्डों के लोग परेशान,,, आदि समाचार प्रमुखता से प्रकाशित किये गए जिसके चलते पाली को भी पाइप जल योजना में शामिल किया गया। इससे गांधी चौक, सहरिया मुहल्ला, मधवा पूरा , रावसहाव मुहल्ला में इस योजना का भरपूर लाभ मिल रहा है। इस योजना के तहत हैंडपंपों में लाइन डालकर लोगों के घरों तक पानी पहुंचाया जा रहा है। यह पानी पीने योग्य नहीं है। हां. अन्य जरूरतें जरूर पूरी हो रही हैं।
नगर पंचायत पाली के चेयरमैन रामकुमार चौरसिया का कहना है कि पेयजल समस्या से निपटने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है। जिलाधिकारी, जलनिगम, सांसद उमा भारती को पत्र व ज्ञापन सौंपकर नील कंठ मार्ग पर पानी की टंकी के निर्माण की मांग लंबे समय से की जा रही है लेकिन समस्या जस की तस बनी है। बिना टंकी निर्माण के पेयजल किल्लत खत्म नहीं होगी।
पानी के नमूनों की हो जांच
पूर्व पार्षद भरत चौरसिया का कहना है कि पाली में पेयजल लोगों के बीच बड़ी समस्या है। हैंडपंपों का पानी पीने योग्य नहीं है। कुएं भी बदहाल हैं। पानी के नमूनों की जांच होनी चाहिए। इसके साथ ही जलसंस्थान को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
नेता बस वोट मांगने आते
पुष्पेन्द्र चौरसिया का कहना है कि नेता वोट मांगने आते है। जनप्रतिनिधि बनने के बाद कभी पलट कर नहीं देखते कि जिनसे हम वायदे कर आये वो आमजन किस हाल में हैं। कोई जनप्रतिनिधि दावे के साथ यह नहीं कह सकता कि लोगों की समस्या निराकरण के लिए जमीनी स्तर पर कोई काम किया है। और फिर अगले चुनाव मे वोट पाने के लिए मौका मौका चिल्लाते रहते है । ऐसे मे मूलभूत समस्याएं कम कहां होगी ।
सहरिया बस्ती मे रहने वाली रजनी कुशवाहा का कहना है कि पाइप जलयोजना से मुहल्ले में पानी की समस्या कम हुई है लेकिन पेयजल के लिए अभी भी भटकना पड़ता है ।
दाल भी नहीं पकती
हैडपंप का पानी इतना खारा है कि दाल भी ठीक से नहीं पकती, दूध में डालो तो दूध खराब हो जाता है । ऐसे में कस्बे के बाहर लगे हैंडपंपों से पानी लाना पड़ता है ।
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पाली की आबादी लगभग 22 हजार है। लगभग पच्चीस सौ मकान हैं, जिनमें से मात्र 542 में ही पानी के कनेक्शन हैं। इनमें भी कई उपभोक्ताओं के घरों में पानी नही पहुंच रहा है। 2001 से पहले तक पाली की
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पेयजल व्यवस्था जलनिगम के हवाले थी। रणछोर धाम से निकलने वाली बेतवा नदी का पानी धौर्रा से सप्लाई होकर पाली के उपभोक्ताओं को मिलता था। सन 2001 में जलनिगम की सारी व्यवस्थाएं जल संस्थान के पास आ गई तो लोगों को लगा कि पेयजल समस्या दूर होगी, लेकिन अब भी यहां पानी का संकट बरकरार है। यहां पानी की टो टंकियां थीं। जल निगम की टंकी जवाब दे गयी है। सिर्फ बड़ी टंकी का ही सहारा है। चार नलकूप हैं, जिनमें से दो बंद हैं। पर्याप्त बिजली न मिलने से यह नलकूप टंकी को कभी पूरा नहीं भर पाते जिसके चलते आपूर्ति पटरी से उतरी रहती है। वार्ड नंबर 4,5,7,9,10 मे पानी कहीं कम तो कहीं बिल्कुल नहीं पहुंचता है। टिपुआ, मंदिर मुहल्ला, मधवापूरा, मस्जिद मुहल्ला में पानी नहीं पहुंचता है। ऐसे हालातों में 245 हैंडपंप का ही आसरा है। दिनभर हैंडपंपों पर भीड़ रहती है।
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नलकूप नहीं हुआ सफल
नगर पंचायत ने 13 वें वित्त आयोग से नीलकंठ मार्ग पर नलकूप खुदवाया गया था। इसका पानी तो मीठा निकला लेकिन जलधारा पर्याप्त नहीं निकली जिससे बमुश्किल 20 नलों में ही पानी आ रहा है।
अमर उजाला की खबरें लाईं रंग
पाली के लोग स्वीकारते हैं कि अमर उजाला की खबरें रंग र्लाइं। 11 अप्रैल को शीर्षक '' रसातल मे पानी, बदतर जिंदगानी,, 8 मई को '' नीलकंठ की धरा पर सूखने लगे है कंठ'' 10 जून को''' नलों मे 10 मिनट ही रहा पानी,, तो 6 वार्डों के लोग परेशान,,, आदि समाचार प्रमुखता से प्रकाशित किये गए जिसके चलते पाली को भी पाइप जल योजना में शामिल किया गया। इससे गांधी चौक, सहरिया मुहल्ला, मधवा पूरा , रावसहाव मुहल्ला में इस योजना का भरपूर लाभ मिल रहा है। इस योजना के तहत हैंडपंपों में लाइन डालकर लोगों के घरों तक पानी पहुंचाया जा रहा है। यह पानी पीने योग्य नहीं है। हां. अन्य जरूरतें जरूर पूरी हो रही हैं।
नगर पंचायत पाली के चेयरमैन रामकुमार चौरसिया का कहना है कि पेयजल समस्या से निपटने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है। जिलाधिकारी, जलनिगम, सांसद उमा भारती को पत्र व ज्ञापन सौंपकर नील कंठ मार्ग पर पानी की टंकी के निर्माण की मांग लंबे समय से की जा रही है लेकिन समस्या जस की तस बनी है। बिना टंकी निर्माण के पेयजल किल्लत खत्म नहीं होगी।
पानी के नमूनों की हो जांच
पूर्व पार्षद भरत चौरसिया का कहना है कि पाली में पेयजल लोगों के बीच बड़ी समस्या है। हैंडपंपों का पानी पीने योग्य नहीं है। कुएं भी बदहाल हैं। पानी के नमूनों की जांच होनी चाहिए। इसके साथ ही जलसंस्थान को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
नेता बस वोट मांगने आते
पुष्पेन्द्र चौरसिया का कहना है कि नेता वोट मांगने आते है। जनप्रतिनिधि बनने के बाद कभी पलट कर नहीं देखते कि जिनसे हम वायदे कर आये वो आमजन किस हाल में हैं। कोई जनप्रतिनिधि दावे के साथ यह नहीं कह सकता कि लोगों की समस्या निराकरण के लिए जमीनी स्तर पर कोई काम किया है। और फिर अगले चुनाव मे वोट पाने के लिए मौका मौका चिल्लाते रहते है । ऐसे मे मूलभूत समस्याएं कम कहां होगी ।
सहरिया बस्ती मे रहने वाली रजनी कुशवाहा का कहना है कि पाइप जलयोजना से मुहल्ले में पानी की समस्या कम हुई है लेकिन पेयजल के लिए अभी भी भटकना पड़ता है ।
दाल भी नहीं पकती
हैडपंप का पानी इतना खारा है कि दाल भी ठीक से नहीं पकती, दूध में डालो तो दूध खराब हो जाता है । ऐसे में कस्बे के बाहर लगे हैंडपंपों से पानी लाना पड़ता है ।