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अब तक नहीं मिल सका एक भी नसबंदी फेल पीड़ित को मुआवजा

Thu, 16 Sep 2021 01:02 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 16 Sep 2021 01:02 AM IST
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no vasectomy compensation
hospital 1.jpg - फोटो : hospital 1.jpg
ललितपुर। नसबंदी फेल होने पर पीड़ितों को भले ही 60 हजार रुपये का मुआवजा देने का प्रावधान हो, लेकिन जनपद में 11 वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद भी अब तक किसी को मुआवजा नहीं मिल पाया गया है। जबकि यहां पर अब तक 108 नसबंदी फेल होने के मामले सामने आ चुके हैं। इससे योजनाओं की हकीकत का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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वर्ष 2010 में शासन द्वारा नसबंदी फेल होने पर मुआवजा देने का प्रावधान किया गया था। प्रावधान के अनुसार इसमें पीड़ित (महिला) को 30 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाता है, जिसे बीते वर्षों में बढ़ाकर 60 हजार रुपये कर दिया गया है। हैरत की बात यह है कि यहां पर अब तक न तो किसी पीड़ित को पुरानी राशि 30 हजार रुपये का मुआवजा मिला और ही नई बढ़ाई गई राशि 60 हजार रुपये मिल पाई है। योजना की शुरूआत में शासन ने 2010 में नसबंदी फेल होने पर आईसीआईसी कंपनी से पीड़ित को मुआवजा देने के लिए अनुबंध किया था। कंपनी का कार्य संतोषजनक न पाए जाने पर वर्ष 2015 में शासन ने मुआवजा की देने की जिम्मेदारी अपने हाथों में ली। तब आए नसबंदी के लगभग 12 आवेदनों पर विचार तक नहीं किया गया। 2015 के बाद 34 नए मामलों में किसी को भी मुआवजा नहीं मिल पाया है। कई आवेदनों पर विचार नहीं किया गया, जिसका कारण आवेदन तय समय सीमा में विभाग को न दिए जाना पाया गया। 2017-18 सत्र के दो आवेदन पात्र हैं, जिन्हें अब तक मुआवजा नहीं मिल पाया। वर्ष 2018-19 में भी 60 मामले आए, इन्हें भी अब तक मुआवजा राशि नहीं मिल पाई।
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इस तरह करना होती क्लेम प्रक्रिया
नसबंदी के ऑपरेशन होने के बाद भी यदि महिला का गर्भधारण हो जाए तो उसे 90 दिन में क्लेम करना अनिवार्य है। इससे पहले अल्ट्रासाउंड करना होगा। अल्ट्रासाउंड न कराए जाने पर विभाग द्वारा भी अल्ट्रासाउंड कराया जाएगा। गर्भ ठहरने की पुष्टि होने के 90 दिन बीतने के बाद के आवेदन करने पर विचार नहीं किया जाएगा। साथ ही जिस अस्पताल में नसबंदी कराई, वहीं पर क्लेम के लिए आवेदन करना होता है। साक्ष्य के लिए अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट संलग्न करनी होती है।
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फेल नसबंदी का क्लेम न मिलने के कई कारण रहे हैं। इनमें शुरूआत में शासन ने जिस कंपनी से अनुबंध किया, उसने बीच में ही अनुबंध तोड़ दिया। कुछ महिलाओं ने गर्भधारण की पुष्टि के 90 दिन के बाद आवेदन किया। इससे आवेदकों को मुआवजा राशि नहीं मिल पाई। दो आवेदन जांच में सही पाए गए, जिन्हें भी अब तक राशि शासन से प्राप्त नहीं हुई।
- डॉ अजय भाले, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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