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Lalitpur News: कुलियों के लिए बैठने का इंतजाम न आराम करने का
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। एक जमाना था, जब रेलवे स्टेशनों पर कुलियों के बगैर यात्रियों का काम नहीं चलता था। अब वक्त बदल गया है। रेलवे स्टेशनों पर कुलियों को दो वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल हो रहा है।
ललितपुर रेलवे स्टेशन पर अप और डाउन दोनों तरफ से करीब 50-60 यात्री ट्रेनों का स्टापेज है। बावजूद इसके कुलियों को पर्याप्त मात्रा में लगेज उठाने को नहीं मिलता। इस स्टेशन पर 9 कुली पंजीकृत हैं। ये दिन में 12-12 घंटे की ड्यूटी करते हैं।
इस दौरान कुलियों को सिर्फ 150 से 250 तक की मजदूरी मिल पाती है। कुलियों ने बताया कि उन लोगों को जो भी मजदूरी मिलती है, उसी को वह लोग मिलकर आपस में बांट लेते हैं।
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कभी तो ऐसा भी हो जाता है, जब इससे भी कम मजदूरी मिलती है। महंगाई के इस दौर में घर परिवार चलाना काफी मुश्किल हो जाता है।
रेलवे विभाग के अंग माने जाने वाले इन कुलियों के लिए रेलवे स्टेशन पर भी कोई इंतजाम नहीं है। इन्हें बैठने या आराम करने के लिए कोई जगह या कमरा नहीं है।
यहां तक कि टिफिन रखने के लिए भी स्थान नहीं है। कुलियाें ने बताया कि स्टेशन पर मौजूद बेंचों पर जब भी वह लोग आराम करने को बैठते हैं तो यात्री आ जाते हैं और उन्हें उठा देते हैं। रात के समय हालत ज्यादा खराब हो जाती है। बेंचों पर यात्री सो जाते हैं।
इस कारण वह लोग अपनी लगेज गाड़ी पर ही लेट जाते हैं और जैसे ही स्टेशन पर कोई ट्रेन आती है तो भागकर सामान की तलाश में पहुंच जाते हैं। लेकिन कई बार ग्राहक न मिलने पर काफी निराशा होती है। ा
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ललितपुर। एक जमाना था, जब रेलवे स्टेशनों पर कुलियों के बगैर यात्रियों का काम नहीं चलता था। अब वक्त बदल गया है। रेलवे स्टेशनों पर कुलियों को दो वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल हो रहा है।
ललितपुर रेलवे स्टेशन पर अप और डाउन दोनों तरफ से करीब 50-60 यात्री ट्रेनों का स्टापेज है। बावजूद इसके कुलियों को पर्याप्त मात्रा में लगेज उठाने को नहीं मिलता। इस स्टेशन पर 9 कुली पंजीकृत हैं। ये दिन में 12-12 घंटे की ड्यूटी करते हैं।
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इस दौरान कुलियों को सिर्फ 150 से 250 तक की मजदूरी मिल पाती है। कुलियों ने बताया कि उन लोगों को जो भी मजदूरी मिलती है, उसी को वह लोग मिलकर आपस में बांट लेते हैं।
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कभी तो ऐसा भी हो जाता है, जब इससे भी कम मजदूरी मिलती है। महंगाई के इस दौर में घर परिवार चलाना काफी मुश्किल हो जाता है।
रेलवे विभाग के अंग माने जाने वाले इन कुलियों के लिए रेलवे स्टेशन पर भी कोई इंतजाम नहीं है। इन्हें बैठने या आराम करने के लिए कोई जगह या कमरा नहीं है।
यहां तक कि टिफिन रखने के लिए भी स्थान नहीं है। कुलियाें ने बताया कि स्टेशन पर मौजूद बेंचों पर जब भी वह लोग आराम करने को बैठते हैं तो यात्री आ जाते हैं और उन्हें उठा देते हैं। रात के समय हालत ज्यादा खराब हो जाती है। बेंचों पर यात्री सो जाते हैं।
इस कारण वह लोग अपनी लगेज गाड़ी पर ही लेट जाते हैं और जैसे ही स्टेशन पर कोई ट्रेन आती है तो भागकर सामान की तलाश में पहुंच जाते हैं। लेकिन कई बार ग्राहक न मिलने पर काफी निराशा होती है। ा