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Lalitpur News: तीन वर्ष से नहीं दवाएं, मिलता है सिर्फ परामर्श
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। बजट होने के बाद भी मेडिकल कॉलेज परिसर स्थित आयुर्वेदिक अस्पताल में तीन वर्षों से दवाओं की कमी है। मरीजों को यहां सिर्फ चिकित्सकीय परामर्श ही मिल पा रहा है। वह बाहर से दवाइयां खरीदने को मजबूर हैं।
लंबे समय से अव्यवस्था के चलते मरीजों की संख्या भी कम हो गई है। जहां पहले 45-50 मरीज आते थे, वहीं अब 15-20 तक ही आ रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में शासन ने एक ही छत के नीचे सभी विधाओं से उपचार की सुविधा देने के लिए आयुष भवन का निर्माण करायाथा। होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक व यूनानी विधा से यहां उपचार की सुविधा है। लेकिन आयुर्वेदिक अस्पताल मरीजों को सुविधाएं देने में हांफ रहा है।
यहां आने वाले मरीजों को मात्र उपचार ही मिल रहा है। चिकित्सक मजबूरन एलोपैथी दवाइयां लिख रहे हैं। कई मरीज एतराज भी जताते हैं। निर्धन तबके के मरीज पैसों के अभाव में दवा नहीं खरीद पा रहे हैं।
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आधी हो गई मरीजों की संख्या : आयुष भवन में संचालित आयुर्वेदिक अस्पताल में पहले 45-50 मरीज आते थे, उन्हें दवाइयां भी मिलती थीं। लंबे समय से दवाइयां न मिलने से मरीजों ने आना बंद कर दिया है। वर्तमान में मरीजों की संख्या 15 से 20 तक आ गई है।
पहले मिलती थीं ये दवाइयां : चंद्रप्रभा वटी, पूर्नवामंदुर, शंख भस्म, अर्जुनारिष्ट, धरती लोह, सुदर्शन चूर्ण, कुटकाघन वटी, गोदंती भस्म, अर्जुन चूर्ण, सितोपलादि चूर्ण, अविपातिकर चूर्ण, आगतुंदी वटी, अशोकारिष्ट, त्रिफला, योगराज गुगूल, गिलोय घनवटी, कुर्मायाशव, दष्मूलारिष्ट, आनंद भैरवा रस, आयरन टैबलेट, कैल्शियम आदि दवा मिलती थी।स
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ललितपुर। बजट होने के बाद भी मेडिकल कॉलेज परिसर स्थित आयुर्वेदिक अस्पताल में तीन वर्षों से दवाओं की कमी है। मरीजों को यहां सिर्फ चिकित्सकीय परामर्श ही मिल पा रहा है। वह बाहर से दवाइयां खरीदने को मजबूर हैं।
लंबे समय से अव्यवस्था के चलते मरीजों की संख्या भी कम हो गई है। जहां पहले 45-50 मरीज आते थे, वहीं अब 15-20 तक ही आ रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में शासन ने एक ही छत के नीचे सभी विधाओं से उपचार की सुविधा देने के लिए आयुष भवन का निर्माण करायाथा। होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक व यूनानी विधा से यहां उपचार की सुविधा है। लेकिन आयुर्वेदिक अस्पताल मरीजों को सुविधाएं देने में हांफ रहा है।
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यहां आने वाले मरीजों को मात्र उपचार ही मिल रहा है। चिकित्सक मजबूरन एलोपैथी दवाइयां लिख रहे हैं। कई मरीज एतराज भी जताते हैं। निर्धन तबके के मरीज पैसों के अभाव में दवा नहीं खरीद पा रहे हैं।
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आधी हो गई मरीजों की संख्या : आयुष भवन में संचालित आयुर्वेदिक अस्पताल में पहले 45-50 मरीज आते थे, उन्हें दवाइयां भी मिलती थीं। लंबे समय से दवाइयां न मिलने से मरीजों ने आना बंद कर दिया है। वर्तमान में मरीजों की संख्या 15 से 20 तक आ गई है।
पहले मिलती थीं ये दवाइयां : चंद्रप्रभा वटी, पूर्नवामंदुर, शंख भस्म, अर्जुनारिष्ट, धरती लोह, सुदर्शन चूर्ण, कुटकाघन वटी, गोदंती भस्म, अर्जुन चूर्ण, सितोपलादि चूर्ण, अविपातिकर चूर्ण, आगतुंदी वटी, अशोकारिष्ट, त्रिफला, योगराज गुगूल, गिलोय घनवटी, कुर्मायाशव, दष्मूलारिष्ट, आनंद भैरवा रस, आयरन टैबलेट, कैल्शियम आदि दवा मिलती थी।स