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वोटों की गांठ नहीं बांध पाए गठबंधन
lalitpur
Updated Thu, 16 Mar 2017 01:01 AM IST
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वोटों की गांठ नहीं बांध पाए गठबंधन
- फोटो : demo
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वोटों की संख्या बढ़ाने के लिए किए गए दलों के गठबंधन विधानसभा चुनाव में कुछ खास प्रदर्शन नहीं कर पाए। ललितपुर सीट पर सपा-कांग्रेस गठबंधन प्रत्याशी को छोड़ दोनों सीटों पर किसी भी गठबंधन का प्रत्याशी अपनी जमानत तक नहीं बचा सका। महरौनी सीट पर तो गठबंधन की गांठ ऐसी खुली कि दोनों पार्टियों के प्रत्याशी आमने-सामने आ गए। हालांकि, सपा ने अपने प्रत्याशी से बाद में पल्ला झाड़ लिया था। ललितपुर सीट पर अपनादल, पीस पार्टी और निषाद पार्टी के संयुक्त प्रत्याशी ने मैदान ही छोड़ दिया था।
जिले की दोनों सीटों पर दो गठबंधन दलों के प्रत्याशी मैदान में थे। एक सबसे चर्चित सपा-कांग्रेस गठबंधन और दूसरा जो अपनी बात जनता तक नहीं पहुंचा पाया अपना दल-पीस पार्टी-निषाद पार्टी गठबंधन। ललितपुर सीट से सपा-कांग्रेस से ज्योति सिंह लोधी मैदान में थीं, जिन्होंने 88687 वोट लेकर न सिर्फ अपनी जमानत बचाई, बल्कि दमदार उपस्थिति का अहसास भी कराया। इस गठबंधन से महरौनी सीट पर कांग्रेस के बृजलाल खाबरी मैदान में थे। लेकिन, सपा ने भी रमेश खटीक को अपना सिंबल दे दिया था। नाम वापसी की डेट निकलने के बाद सपा ने रमेश को हटने के लिए कहा था, लेकिन वह नहीं माने और दोनों प्रत्याशी आमने-सामने लड़े। बृजलाल को 49171 और रमेश को 27031 वोट मिले। दोनों ही अपनी जमानत तक नहीं बचा सके।
दूसरे गठबंधन अपना दल-पीस पार्टी-निषाद पार्टी का ललितपुर सीट पर हाल बेहाल रहा। इस सीट पर पीस पार्टी के इमरान मंसूरी को प्रत्याशी बनाया गया था। उन्होंने नामांकन भी किया था, लेकिन बाद में अपना नाम वापस ले लिया था। इमरान का कहना है कि पारिवारिक कारणों के चलते विधानसभा चुनाव में नामांकन वापस लिया था। अब वह बसपा के लिए काम कर रहे हैं। वहीं, इस गठबंधन से महरौनी सीट पर अपना दल के रामलाल मैदान में थे। वह मुस्लिम, निषाद, कुर्मी और दलित वोट मिलने का दावा कर रहे थे। उन्हें मिले मात्र 1868 वोटों ने सारे दावे खारिज कर दिए। अपना दल के मीडिया प्रभारी देवेंद्र पटेल का कहना है कि अपना दल की अनुप्रिया पटेल ने भाजपा से गठबंधन कर लिया था, जबकि राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्णा पटेल ने पीस पार्टी, निषाद पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा, जिससे मतदाताओं में भ्रम की स्थिति बन गई।
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ये भी रहा रोचक पहलु
महरौनी विधानसभा क्षेत्र से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की उम्मीदवार आराधना ने अकेले चुनाव लड़कर 4603 मत हासिल किए हैं। वहीं, अपना दल के उम्मीदवार रामलाल को महज 1868 वोट मिले। 2012 के चुनाव में अपना दल ने पीस पार्टी व बुंदेलखंड कांग्रेस के साथ गठजोड़ कर चुनाव लड़ा था, जिसमें महरौनी सीट पर इस गठबंधन के उम्मीदवार को 4500 वोट मिले थे।
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जिले की दोनों सीटों पर दो गठबंधन दलों के प्रत्याशी मैदान में थे। एक सबसे चर्चित सपा-कांग्रेस गठबंधन और दूसरा जो अपनी बात जनता तक नहीं पहुंचा पाया अपना दल-पीस पार्टी-निषाद पार्टी गठबंधन। ललितपुर सीट से सपा-कांग्रेस से ज्योति सिंह लोधी मैदान में थीं, जिन्होंने 88687 वोट लेकर न सिर्फ अपनी जमानत बचाई, बल्कि दमदार उपस्थिति का अहसास भी कराया। इस गठबंधन से महरौनी सीट पर कांग्रेस के बृजलाल खाबरी मैदान में थे। लेकिन, सपा ने भी रमेश खटीक को अपना सिंबल दे दिया था। नाम वापसी की डेट निकलने के बाद सपा ने रमेश को हटने के लिए कहा था, लेकिन वह नहीं माने और दोनों प्रत्याशी आमने-सामने लड़े। बृजलाल को 49171 और रमेश को 27031 वोट मिले। दोनों ही अपनी जमानत तक नहीं बचा सके।
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दूसरे गठबंधन अपना दल-पीस पार्टी-निषाद पार्टी का ललितपुर सीट पर हाल बेहाल रहा। इस सीट पर पीस पार्टी के इमरान मंसूरी को प्रत्याशी बनाया गया था। उन्होंने नामांकन भी किया था, लेकिन बाद में अपना नाम वापस ले लिया था। इमरान का कहना है कि पारिवारिक कारणों के चलते विधानसभा चुनाव में नामांकन वापस लिया था। अब वह बसपा के लिए काम कर रहे हैं। वहीं, इस गठबंधन से महरौनी सीट पर अपना दल के रामलाल मैदान में थे। वह मुस्लिम, निषाद, कुर्मी और दलित वोट मिलने का दावा कर रहे थे। उन्हें मिले मात्र 1868 वोटों ने सारे दावे खारिज कर दिए। अपना दल के मीडिया प्रभारी देवेंद्र पटेल का कहना है कि अपना दल की अनुप्रिया पटेल ने भाजपा से गठबंधन कर लिया था, जबकि राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्णा पटेल ने पीस पार्टी, निषाद पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा, जिससे मतदाताओं में भ्रम की स्थिति बन गई।
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महरौनी विधानसभा क्षेत्र से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की उम्मीदवार आराधना ने अकेले चुनाव लड़कर 4603 मत हासिल किए हैं। वहीं, अपना दल के उम्मीदवार रामलाल को महज 1868 वोट मिले। 2012 के चुनाव में अपना दल ने पीस पार्टी व बुंदेलखंड कांग्रेस के साथ गठजोड़ कर चुनाव लड़ा था, जिसमें महरौनी सीट पर इस गठबंधन के उम्मीदवार को 4500 वोट मिले थे।