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विवेकानंद पार्क में न बेंच न कुर्सी, कचरे से उठ रही बदबू
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ललितपुर। शहर के नझाई बाजार स्थित स्वामी विवेकानंद पार्क अनदेखी की भेंट चढ़ रहा है। पार्क में न तो बैठने के लिए बेंच व कुर्सियां हैं और न ही पीने के लिए पानी की सुविधा है। पार्क दोनों ओर से अतिक्रमण की जद में बना हुआ हैं। एक ओर डाले जा रहे कचरे से दुर्गंध उठ रही है। ऐसे में पार्क के अंदर तक जाने से लोग कतरा रहे हैं।
शहर में नझाई बाजार स्थित विवेकानंद पार्क पार्क सब्जी मंडी के बीच में बना है। इसके मुख्य गेट पर ही सब्जी विक्रेताओं का अतिक्रमण है। इससे लोग पार्क के अंदर तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
वहीं, पार्क की बाउंड्री पर दुकानदारों ने दोनों ओर से झोपड़ी डाल दीं है। इससे पार्क नजर तक नहीं आ रहा है। एक ओर पार्क के बगल में बाउंड्री से सटकर कचरा डाला जा रहा है। कचरे की मात्रा अधिक होने से काफी दूरी पर सड़क पर फैल रहा है। जानवर इसे खाने को घूमते रहते हैं। इससे कचरा अधिक दूरी पर फैल गया है। सुबह भले ही इसका उठान होता हो, लेकिन दोपहर में यह क्षेत्र डंपिंग स्थल नजर आता है। इसको लेकर स्थानीय दुकानदार काफी परेशान है। अधिक दिनों तक पड़े रहने से दुर्गंध उठ रही है। ऐसे में लोग पार्क में नहीं ठहरते हैं और ठहरें भी तो कैसे जब बैठने को बेंच व कुर्सियां तक नहीं है। स्थानीय लोग कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
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शहर में नझाई बाजार स्थित विवेकानंद पार्क पार्क सब्जी मंडी के बीच में बना है। इसके मुख्य गेट पर ही सब्जी विक्रेताओं का अतिक्रमण है। इससे लोग पार्क के अंदर तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
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वहीं, पार्क की बाउंड्री पर दुकानदारों ने दोनों ओर से झोपड़ी डाल दीं है। इससे पार्क नजर तक नहीं आ रहा है। एक ओर पार्क के बगल में बाउंड्री से सटकर कचरा डाला जा रहा है। कचरे की मात्रा अधिक होने से काफी दूरी पर सड़क पर फैल रहा है। जानवर इसे खाने को घूमते रहते हैं। इससे कचरा अधिक दूरी पर फैल गया है। सुबह भले ही इसका उठान होता हो, लेकिन दोपहर में यह क्षेत्र डंपिंग स्थल नजर आता है। इसको लेकर स्थानीय दुकानदार काफी परेशान है। अधिक दिनों तक पड़े रहने से दुर्गंध उठ रही है। ऐसे में लोग पार्क में नहीं ठहरते हैं और ठहरें भी तो कैसे जब बैठने को बेंच व कुर्सियां तक नहीं है। स्थानीय लोग कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
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