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गौना में विंध्याचल पर्वत की पहाड़ियों पर विराजमान हैं वरवासन देवी
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गौना के बिंध्यांचल पर्वत पर विराजमान वरवासन माता
- फोटो : LALITPUR
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डोंगराखुर्द(ललितपुर)। गौना के निकट विध्यांचल पर्वत की पहाड़ियों पर स्थित वरवासन देवी माता के मंदिर में नवरात्र पर भक्तों का तांता लगा है। बताते हैं कि इस मंदिर को निर्माण किसी श्रद्धालु ने नहीं बल्कि माता रानी की कृपा से स्वयं तैयार हुआ माना जाता है।
करीब 500 फिट ऊंचाई पर बने इस मंदिर में जाने के लिए श्रद्धालु सीढ़ियां चढ़कर पहुंच पाते हैं। यहां पर तीन मंदिर और एक बड़ी शिला है उसी के नीचे मंदिर बने हुए हैं। नवरात्र पर यहां दूर दूर से भक्त माता के मंदिर पर दर्शन करने एवं जबारे चढ़ाने आते हैं। मान्यता है कि मां के दरबार में मनौती मांगने वाले की हर इच्छा पूरी होती है। गौना गांव के लोगों का मानना है की माता की कृपा से प्राकृतिक आपदाएं भी टल जाती है और बड़े रुप में जन हानि एवं धन हानि नहीं होती है। महाराजा छत्रसाल ने गौना आकर वरवासन माता के दर्शन कर माता का आशीर्वाद लिया था। बुजुर्गों के अनुसार मंदिर के पीछे ही माता रानी का मायका है और वही पर छोटी देवी का मायका भी स्थित है । मंदिर के आस पास बड़ी संख्या में प्राचीन मूर्तियां बिखरी पड़ी हैं। नवरात्र के अंतिम दिन नौवी को यहां विशाल भंङारा होगा जिसमें दूर दराज से श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करने आते हैं।
वरवासन माता श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। यह प्राचीन प्रसिद्ध मंदिर है नव दुर्गा में दूर दराज से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं और भंङारा करते। नौ दिन तक यहां भक्तों का तांता लगा रहता है।- ढल्लन महाराज
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करीब 500 फिट ऊंचाई पर बने इस मंदिर में जाने के लिए श्रद्धालु सीढ़ियां चढ़कर पहुंच पाते हैं। यहां पर तीन मंदिर और एक बड़ी शिला है उसी के नीचे मंदिर बने हुए हैं। नवरात्र पर यहां दूर दूर से भक्त माता के मंदिर पर दर्शन करने एवं जबारे चढ़ाने आते हैं। मान्यता है कि मां के दरबार में मनौती मांगने वाले की हर इच्छा पूरी होती है। गौना गांव के लोगों का मानना है की माता की कृपा से प्राकृतिक आपदाएं भी टल जाती है और बड़े रुप में जन हानि एवं धन हानि नहीं होती है। महाराजा छत्रसाल ने गौना आकर वरवासन माता के दर्शन कर माता का आशीर्वाद लिया था। बुजुर्गों के अनुसार मंदिर के पीछे ही माता रानी का मायका है और वही पर छोटी देवी का मायका भी स्थित है । मंदिर के आस पास बड़ी संख्या में प्राचीन मूर्तियां बिखरी पड़ी हैं। नवरात्र के अंतिम दिन नौवी को यहां विशाल भंङारा होगा जिसमें दूर दराज से श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करने आते हैं।
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वरवासन माता श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। यह प्राचीन प्रसिद्ध मंदिर है नव दुर्गा में दूर दराज से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं और भंङारा करते। नौ दिन तक यहां भक्तों का तांता लगा रहता है।- ढल्लन महाराज
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