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नम आंखों से दी मां जगदम्बे को विदाई, सूने हुए पांडाल
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ललितपुर/मड़ावरा/बार/बानपुर/जखौरा। पांडालों में विराजमान देवी प्रतिमाओं को दशहरा के दिन हवन-पूजन और आरती के बाद विसर्जित किया गया। इसके बाद भक्तों ने मां के जयकारों के साथ शोभायात्रा निकाल कर मातारानी को विदाई दी। शहर से अधिकांश देवी प्रतिमाएं गोविंदसागर बांध में बने कृत्रिम कुंड में विसर्जित की गईं। शहर में श्रद्घालु नव दुर्गा महोत्सव के बाद दशहरा के दिन सुबह से ही हवन पूजन किया गया। इसके बाद आरती की गई। प्रसाद वितरण कर मां के जयकारे लगाए। तत्पश्चात पांडालों से देवी प्रतिमाओं को वाहनों में रखकर शोभायात्रा निकाली।
भक्त डीजे पर बज रहे डीजे की धुन पर थिरकते हुए बांध पहुंचे। जहां पर बने कृत्रिम कुंड में नम आंखों से विसर्जन किया। वहीं, कस्बा बार में शारदीय नवरात्र में नौ दिन तक घर-घर और मंदिरों में मां दुर्गा की पूजा की गई। दशमी को दिन मां दुर्गा की बैंडबाजों के साथ शोभायात्रा निकाली गई। देवी विसर्जन के लिए प्राचीन चंदेलकालीन तालाब राम रामशाह सागर पहुंचे। जहां पर भक्तों ने एक दूसरे का रंग गुलाल लगाया। कस्बा में अनेक जगह सजे मां भवानी के दरबार मां की विदाई के साथ सूने हो गए हैं। देवी विसर्जन शोभायात्रा में आगे बैंडबाजों की धुन पर श्रद्धालु नृत्य करते चल रहे थे। शोभायात्रा महामाई मंदिर से प्रारंभ होकर आजादपुरा, बस स्टैैंड से होते हुए मां विंध्यवासिनी मंदिर से होकर तालाब पहुुंची। मां की आरती के बाद जयकारों से माहौल भक्तिमय बना रहे थे। तालाब पर गोलू लोहिया द्वारा प्रसाद वितरण किया गया। विसर्जन का पूरा कार्यक्रम कैमरे की निगरानी में रहा व पुलिस प्रशासन की व्यवस्था दुरूस्त रही। इस दौरान देवसिंह यादव, ग्राम बार प्रधान रमेश सहरिया, राममनोहर बरसैयां, ओमप्रकाश लोहिया, हरपाल सिसोदिया, पवन रिछारिया, रानू राजा, रानू पटेल, रामलखन यादव, आजाद यादव, विवेक यादव, ब्रजेश गुप्ता, राकेश पटैरिया, राहुल यादव, शिवम मिश्रा, धीरज पांडेय, सुमित गुप्ता आदि भारी संख्या में श्रद्घालु मौजूद रहे। उधर जखौरा में नवमी पर देवी पंडाल में विधि-विधान से हवन पूजन किया गया। आहुति देकर जगत के कल्याण की कामना की गई। सुबह आरती के बाद हवन पूजन किया गया। नौ दिन श्रद्घालु सुबह से ही मंदिरों में जल अर्पित करने के लिए पहुंचते रहे। सुबह शाम पंडालों में आरती व जयकारों से माहौल धर्ममय रहा। शुक्रवार को देवी पंडालों में विधि विधान से हवन पूजन किया गया, इसमें श्रद्धालुओं ने हवन में पूर्णाहुति दी। दोपहर बाद कस्बा में जवारे निकलना शुरू हुए। जवारे की घटयात्रा गांव में भ्रमण के बाद दरवाजे मोहल्ले पर पूरे गांव के जवारे एकत्रित हुए और वहां पूजा व आरती की गई। अंत में बस स्टैंड मानसरोवर तालाब में विसर्जित किया गया।
वहीं, बानपुर में नवरात्र के नौ दिन तक चले त्योहार के अंतिम दिन भक्तों ने भक्ति भाव से मातारानी की पूजा-अर्चना के बाद भक्तों ने शुक्रवार को मां से आशीर्वाद मांगा और उन्हें विदा किया। भक्तों ने वर्ष भर कृपा बनाए रखने की कामना की। विसर्जन यात्राओं की कस्बे में धूम रही। सुबह से गाजे-बाजे, ढोल की तालों और डीजे के साथ श्रद्धालु माता रानी को विदा देने के लिए प्रतिमाओं को जल स्रोतों की तरफ ले गए। इसमें बच्चे, युवा, महिला, पुरुष, बुजुर्ग सभी विसर्जन यात्रा में शामिल हुए। मातारानी की आरती के साथ उन्हें विदा किया गया। उधर, मड़ावरा में नवरात्र के समापन अवसर पर शुक्रवार को दशहरे की धूम के बीच दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन स्थानीय रोहिणी बांध में किया गया। विसर्जन से पूर्व दुर्गा-पांडालों में विधि-विधान से पूर्णाहुति हवन कर महाआरती की गई। वहीं, इस अवसर पर छपरादेवी शक्तिपीठ पर देवाक्लब द्वारा विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। डाक-बंगला के पास भारतीय युवा जागरण संघ व कवराटादेवी मंदिर परिसर के पास राधेक्लब द्वारा महाप्रसाद वितरण किया गया। कवराटा दुर्गामंदिर परिसर में मनोज खटीक परिवार द्वारा विसर्जन के लिये जाने वाली सभी दुर्गा-प्रतिमाओं की महाआरती की गई। प्रशासन की निगरानी व स्थानीय पुलिस की देखरेख में बांध के किनारे बनवाए गए विसर्जन-कुंड में दुर्गा-प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। वहीं विजयदशमी के पर्व पर कस्बे में नवयुवकों द्वारा बुराई के प्रतीक रावण के पुतले को जलाकर लोगों को तमाम बुराइयों को छोड़कर आपसी प्रेमभाव से मिलजुलकर रहने का संदेश दिया। विसर्जन स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था का उपजिलाधिकारी केके सिंह ने निरीक्षण किया। इस दौरान लेखपाल अवधेश कुमार, महेंद्र कुमार, एसआई अभयपाल सिंह, मुलायम सिंह, मनोहरलाल समेत तमाम पुलिस बल मौजूद रहा।
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आपसी बुराइयां भूल खिलाया एक दूसरे को पान
दशहरा पर्व बुराइयों को भूलकर आपसी सौहार्द बनाने व बुराई पर अच्छाई की जीत का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन लोग एक दूसरी की सभी बुराइयों को भूलकर एक दूसरे को गले लगाते हैं। इस दिन मां दुर्गा ने महिषासुर नाम के असुर का वध कर देवताओं को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई थी। साथ ही भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर माता सीता को उसकी कैद से मुक्त कराया था। पर्व को बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। इस दिन लोगों ने अपने शस्त्रों का भी पूजन किया। जिसके बाद सभी ने दशहरा की राम-राम करते हैं और बुराई भुलाकर अपने मित्रों और सहयोगियों को पान खिलाकर विजयदशमी की बधाई दी।
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भक्त डीजे पर बज रहे डीजे की धुन पर थिरकते हुए बांध पहुंचे। जहां पर बने कृत्रिम कुंड में नम आंखों से विसर्जन किया। वहीं, कस्बा बार में शारदीय नवरात्र में नौ दिन तक घर-घर और मंदिरों में मां दुर्गा की पूजा की गई। दशमी को दिन मां दुर्गा की बैंडबाजों के साथ शोभायात्रा निकाली गई। देवी विसर्जन के लिए प्राचीन चंदेलकालीन तालाब राम रामशाह सागर पहुंचे। जहां पर भक्तों ने एक दूसरे का रंग गुलाल लगाया। कस्बा में अनेक जगह सजे मां भवानी के दरबार मां की विदाई के साथ सूने हो गए हैं। देवी विसर्जन शोभायात्रा में आगे बैंडबाजों की धुन पर श्रद्धालु नृत्य करते चल रहे थे। शोभायात्रा महामाई मंदिर से प्रारंभ होकर आजादपुरा, बस स्टैैंड से होते हुए मां विंध्यवासिनी मंदिर से होकर तालाब पहुुंची। मां की आरती के बाद जयकारों से माहौल भक्तिमय बना रहे थे। तालाब पर गोलू लोहिया द्वारा प्रसाद वितरण किया गया। विसर्जन का पूरा कार्यक्रम कैमरे की निगरानी में रहा व पुलिस प्रशासन की व्यवस्था दुरूस्त रही। इस दौरान देवसिंह यादव, ग्राम बार प्रधान रमेश सहरिया, राममनोहर बरसैयां, ओमप्रकाश लोहिया, हरपाल सिसोदिया, पवन रिछारिया, रानू राजा, रानू पटेल, रामलखन यादव, आजाद यादव, विवेक यादव, ब्रजेश गुप्ता, राकेश पटैरिया, राहुल यादव, शिवम मिश्रा, धीरज पांडेय, सुमित गुप्ता आदि भारी संख्या में श्रद्घालु मौजूद रहे। उधर जखौरा में नवमी पर देवी पंडाल में विधि-विधान से हवन पूजन किया गया। आहुति देकर जगत के कल्याण की कामना की गई। सुबह आरती के बाद हवन पूजन किया गया। नौ दिन श्रद्घालु सुबह से ही मंदिरों में जल अर्पित करने के लिए पहुंचते रहे। सुबह शाम पंडालों में आरती व जयकारों से माहौल धर्ममय रहा। शुक्रवार को देवी पंडालों में विधि विधान से हवन पूजन किया गया, इसमें श्रद्धालुओं ने हवन में पूर्णाहुति दी। दोपहर बाद कस्बा में जवारे निकलना शुरू हुए। जवारे की घटयात्रा गांव में भ्रमण के बाद दरवाजे मोहल्ले पर पूरे गांव के जवारे एकत्रित हुए और वहां पूजा व आरती की गई। अंत में बस स्टैंड मानसरोवर तालाब में विसर्जित किया गया।
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वहीं, बानपुर में नवरात्र के नौ दिन तक चले त्योहार के अंतिम दिन भक्तों ने भक्ति भाव से मातारानी की पूजा-अर्चना के बाद भक्तों ने शुक्रवार को मां से आशीर्वाद मांगा और उन्हें विदा किया। भक्तों ने वर्ष भर कृपा बनाए रखने की कामना की। विसर्जन यात्राओं की कस्बे में धूम रही। सुबह से गाजे-बाजे, ढोल की तालों और डीजे के साथ श्रद्धालु माता रानी को विदा देने के लिए प्रतिमाओं को जल स्रोतों की तरफ ले गए। इसमें बच्चे, युवा, महिला, पुरुष, बुजुर्ग सभी विसर्जन यात्रा में शामिल हुए। मातारानी की आरती के साथ उन्हें विदा किया गया। उधर, मड़ावरा में नवरात्र के समापन अवसर पर शुक्रवार को दशहरे की धूम के बीच दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन स्थानीय रोहिणी बांध में किया गया। विसर्जन से पूर्व दुर्गा-पांडालों में विधि-विधान से पूर्णाहुति हवन कर महाआरती की गई। वहीं, इस अवसर पर छपरादेवी शक्तिपीठ पर देवाक्लब द्वारा विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। डाक-बंगला के पास भारतीय युवा जागरण संघ व कवराटादेवी मंदिर परिसर के पास राधेक्लब द्वारा महाप्रसाद वितरण किया गया। कवराटा दुर्गामंदिर परिसर में मनोज खटीक परिवार द्वारा विसर्जन के लिये जाने वाली सभी दुर्गा-प्रतिमाओं की महाआरती की गई। प्रशासन की निगरानी व स्थानीय पुलिस की देखरेख में बांध के किनारे बनवाए गए विसर्जन-कुंड में दुर्गा-प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। वहीं विजयदशमी के पर्व पर कस्बे में नवयुवकों द्वारा बुराई के प्रतीक रावण के पुतले को जलाकर लोगों को तमाम बुराइयों को छोड़कर आपसी प्रेमभाव से मिलजुलकर रहने का संदेश दिया। विसर्जन स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था का उपजिलाधिकारी केके सिंह ने निरीक्षण किया। इस दौरान लेखपाल अवधेश कुमार, महेंद्र कुमार, एसआई अभयपाल सिंह, मुलायम सिंह, मनोहरलाल समेत तमाम पुलिस बल मौजूद रहा।
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आपसी बुराइयां भूल खिलाया एक दूसरे को पान
दशहरा पर्व बुराइयों को भूलकर आपसी सौहार्द बनाने व बुराई पर अच्छाई की जीत का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन लोग एक दूसरी की सभी बुराइयों को भूलकर एक दूसरे को गले लगाते हैं। इस दिन मां दुर्गा ने महिषासुर नाम के असुर का वध कर देवताओं को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई थी। साथ ही भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर माता सीता को उसकी कैद से मुक्त कराया था। पर्व को बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। इस दिन लोगों ने अपने शस्त्रों का भी पूजन किया। जिसके बाद सभी ने दशहरा की राम-राम करते हैं और बुराई भुलाकर अपने मित्रों और सहयोगियों को पान खिलाकर विजयदशमी की बधाई दी।

सिद्घनपुरा से मॉ काली की झांकी को विसर्जन को ले जाते श्रृधालू- फोटो : LALITPUR