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पाली की लालिमा पर कुदरत का कहर
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पाली। कड़ाके की ठंड और कोहरे के साथ गिरने वाले पाले के कारण पान की खेती खराब हो रही है। अब तक पान की खेती में चालीस से साठ फीसदी तक नुकसान हो गया है। अधिक पाला गिरने से पान के पत्ते काले पड़कर बेकार हो रहे हैं। मौसम ऐसे ही बना रहा तो पान की खेती करने वाले किसानों के सामने रोजी - रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। जिसके चलते किसान चिंतित और परेशान हैं।
पाली को पान की नगरी के नाम से जाना जाता है। इसके पीछे का कारण यहां की आधी आबादी पान की खेती करके अपने परिवार के लिए जीवकोपार्जन का साधन जुटाती हैं। वक्त के बदलते रुख के साथ पान की खेती का दायरा सिकुड़ता जा रहा है। प्राकृतिक आपदा के कारण पान किसानों के कई परिवार पाली से पलायन भी कर रहे हैं। चौरसिया समाज के अधिकांश लोगों का मुख्य व्यवसाय पान की खेती है। पांच सौ से ज्यादा परिवार इसकी खेती पर आश्रित हैं, पाला गिरने से किसान बेचैन हैं।
जहां शासन से पान की खेती को कृषि का दर्जा प्राप्त नहीं है। वहीं, पान प्रशिक्षण केंद्र अपने आप में खुद बीमार है, जिसके कारण पान किसानों की किसी प्रकार की कोई मदद नहीं हो पाती। ठंड एवं कोहरे के प्रकोप के कारण पान की लहलहाती फसलों की रंगत उतर गई है, जो काले होकर जमीन पर टपक रहे हैं। पान किसानों ने कोहरे को अंगारे की संज्ञा दी है, जिसके प्रकोप से पान के पत्ते काले होकर मुरझा रहे हैं, जिससे पत्ते में जगह - जगह कतरन हो रही है। साथ ही बेलों के डंठल भी इतने कमजोर हो गए हैं कि मामूली स्पर्श और हवा के झोंकों से पान बेल का साथ छोड़ जमीन पर गिर जाता है। वहीं, मौसम के मिजाज से इसमें कई प्रकार के रोग भी पनप रहे हैं।
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मैदानी क्षेत्र के पान बरेजों में ज्यादा नुकसान देखने को मिल रहा है। जो किसान ठीक से अपने बरेजों को छाया नहीं दे पा रहे हैं, उनकी पान की खेती पर ज्यादा खतरा है। शीत लहर, कोहरा और भीषण ठंड से झुलस चुकी पान की पैदावार का बाजार में कोई मोल नहीं। फसल को देख किसान दुखी और चिंतित है।
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पान किसानों को धूप का इंतजार
पाली। बीस दिनों से सर्दी के तेवर हैं। कोहरा, शीतलहर और बूंदाबांदी हो रही है। सूर्यदेव अंतर्ध्यान हैं। शीतलहर व कोहरे से पान की फसल पर कालिख पुत गई। किसानों का कहना है कि मौसम साफ हो इसके बाद पान पर सूर्यदेव की रोशनी पड़ेगी। इसके बाद मालूम पड़ेगा कि पान की खेती में कितना नुकसान है।
-------------भारी ठंड के कारण मैदानी इलाकों में खड़े पान बरेजों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। नुकसान का आंकलन सत्तर फीसदी तक है, जिससे पान किसानों के सामने संकट आ खड़ा हुआ है।
-हरी चौरसिया
अंगारे ( कोहरे) ने पान की खेती में आग लगा दी। पत्ते में जगह - जगह काले दाग बन गए हैं, जिससे इन पत्तों को तोड़ना किसान की मजबूरी है। सर्दी का सितम कुछ और बढ़ा तो किसानों की हालत और खराब हो जाएगी।
- मुन्नालाल चौरसिया
पाली के पान किसानों के लिए शासन स्तर से कोई सुविधा नहीं है। जो प्रशिक्षण केंद्र है, उससे भी किसानों को कोई मदद नहीं मिलती। फसलों पर तुषारापात का कहर जारी है। मदद जरूरी है, अन्यथा हालात बिगड़े तो पान किसान परिवारों का पलायन होगा।
- श्यामसुंदर चौरसिया
जब भी पान की खेती बर्बाद हुई तो पान किसानों को रोजी- रोटी के लिए महानगरों की ओर पलायन करना पड़ा। मौसम की मार से एक बार फिर पान किसानों के समक्ष ऐसे ही हालात उत्पन्न हो रहे हैं। सरकार से तो कोई मदद मिलती नहीं है।
- गोविंददास चौरसिया
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तीन-चार साल से पान की खेती की अच्छी पैदावार थी, जिससे किसानों ने पान की क्यारियों की संख्या बढ़ा दी थी। लेकिन, अबकी बार हालात फिर खराब हो गए। नुकसान ज्यादा हुआ तो इस खेती से किनारा करना मजबूरी बन जाएगा।
- पुरुषोत्तम चौरसिया
शीतलहर व कोहरे से फसल का पचास से सत्तर फीसदी तक नुकसान हुआ है। अभी भी मौसम खराब है, जिससे हालात और चिंताजनक हैँ। पान बरेजों को बचाने के सारे प्रयास नाकाफी हो रहे हैं। बर्बादी से किसानों के हाथ खाली हो जाएंगे।
- खेमचंद्र , पार्षद प्रतिनिधि व किसान
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पाली को पान की नगरी के नाम से जाना जाता है। इसके पीछे का कारण यहां की आधी आबादी पान की खेती करके अपने परिवार के लिए जीवकोपार्जन का साधन जुटाती हैं। वक्त के बदलते रुख के साथ पान की खेती का दायरा सिकुड़ता जा रहा है। प्राकृतिक आपदा के कारण पान किसानों के कई परिवार पाली से पलायन भी कर रहे हैं। चौरसिया समाज के अधिकांश लोगों का मुख्य व्यवसाय पान की खेती है। पांच सौ से ज्यादा परिवार इसकी खेती पर आश्रित हैं, पाला गिरने से किसान बेचैन हैं।
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जहां शासन से पान की खेती को कृषि का दर्जा प्राप्त नहीं है। वहीं, पान प्रशिक्षण केंद्र अपने आप में खुद बीमार है, जिसके कारण पान किसानों की किसी प्रकार की कोई मदद नहीं हो पाती। ठंड एवं कोहरे के प्रकोप के कारण पान की लहलहाती फसलों की रंगत उतर गई है, जो काले होकर जमीन पर टपक रहे हैं। पान किसानों ने कोहरे को अंगारे की संज्ञा दी है, जिसके प्रकोप से पान के पत्ते काले होकर मुरझा रहे हैं, जिससे पत्ते में जगह - जगह कतरन हो रही है। साथ ही बेलों के डंठल भी इतने कमजोर हो गए हैं कि मामूली स्पर्श और हवा के झोंकों से पान बेल का साथ छोड़ जमीन पर गिर जाता है। वहीं, मौसम के मिजाज से इसमें कई प्रकार के रोग भी पनप रहे हैं।
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मैदानी क्षेत्र के पान बरेजों में ज्यादा नुकसान देखने को मिल रहा है। जो किसान ठीक से अपने बरेजों को छाया नहीं दे पा रहे हैं, उनकी पान की खेती पर ज्यादा खतरा है। शीत लहर, कोहरा और भीषण ठंड से झुलस चुकी पान की पैदावार का बाजार में कोई मोल नहीं। फसल को देख किसान दुखी और चिंतित है।
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पान किसानों को धूप का इंतजार
पाली। बीस दिनों से सर्दी के तेवर हैं। कोहरा, शीतलहर और बूंदाबांदी हो रही है। सूर्यदेव अंतर्ध्यान हैं। शीतलहर व कोहरे से पान की फसल पर कालिख पुत गई। किसानों का कहना है कि मौसम साफ हो इसके बाद पान पर सूर्यदेव की रोशनी पड़ेगी। इसके बाद मालूम पड़ेगा कि पान की खेती में कितना नुकसान है।
-------------भारी ठंड के कारण मैदानी इलाकों में खड़े पान बरेजों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। नुकसान का आंकलन सत्तर फीसदी तक है, जिससे पान किसानों के सामने संकट आ खड़ा हुआ है।
-हरी चौरसिया
अंगारे ( कोहरे) ने पान की खेती में आग लगा दी। पत्ते में जगह - जगह काले दाग बन गए हैं, जिससे इन पत्तों को तोड़ना किसान की मजबूरी है। सर्दी का सितम कुछ और बढ़ा तो किसानों की हालत और खराब हो जाएगी।
- मुन्नालाल चौरसिया
पाली के पान किसानों के लिए शासन स्तर से कोई सुविधा नहीं है। जो प्रशिक्षण केंद्र है, उससे भी किसानों को कोई मदद नहीं मिलती। फसलों पर तुषारापात का कहर जारी है। मदद जरूरी है, अन्यथा हालात बिगड़े तो पान किसान परिवारों का पलायन होगा।
- श्यामसुंदर चौरसिया
जब भी पान की खेती बर्बाद हुई तो पान किसानों को रोजी- रोटी के लिए महानगरों की ओर पलायन करना पड़ा। मौसम की मार से एक बार फिर पान किसानों के समक्ष ऐसे ही हालात उत्पन्न हो रहे हैं। सरकार से तो कोई मदद मिलती नहीं है।
- गोविंददास चौरसिया
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तीन-चार साल से पान की खेती की अच्छी पैदावार थी, जिससे किसानों ने पान की क्यारियों की संख्या बढ़ा दी थी। लेकिन, अबकी बार हालात फिर खराब हो गए। नुकसान ज्यादा हुआ तो इस खेती से किनारा करना मजबूरी बन जाएगा।
- पुरुषोत्तम चौरसिया
शीतलहर व कोहरे से फसल का पचास से सत्तर फीसदी तक नुकसान हुआ है। अभी भी मौसम खराब है, जिससे हालात और चिंताजनक हैँ। पान बरेजों को बचाने के सारे प्रयास नाकाफी हो रहे हैं। बर्बादी से किसानों के हाथ खाली हो जाएंगे।
- खेमचंद्र , पार्षद प्रतिनिधि व किसान
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