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दैवी आपदा में छह महीने में 56 लोगों की हुई मौतें

Sat, 25 Sep 2021 01:23 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 25 Sep 2021 01:23 AM IST
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natural disaster, 56 died in six month
granite mine.jpg - फोटो : granite mine.jpg
ललितपुर। जिले में दैवी आपदा से मरने वालों की संख्या में लगातार इजाफा होता जा रहा है। बीते छह महीने में 56 लोगों की मौत हुई है। जिसमें सांप के काटने से मरने वालों की संख्या 30 हो गई है। जबकि अकेले आकाशीय बिजली गिरने से ही 15 और पानी में डूबने से अब तक 11 लोगों की मौत चुकी है।
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बारिश के दिनों में दैवीय आपदा से मरने वालों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। इनमें पानी में डूबने, सांप के काटने और बिजली गिरने की घटनाएं होने से जिले में जनहानि हुई है। इसमें सबसे अधिक 30 मौत अकेले सांप के डसने से हुई हैं। शुक्रवार को ही तालबेहट क्षेत्र के ग्राम बौलाई में एक युवक की सांप के काटने से मौत हुई है। वहीं जून माह से अब तक बिजली गिरने से 15 लोगों की मौत हुई हैं।
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इसी प्रकार जिले में कुआं, तालाब या पोखर में गिरने से मरने वालों की संख्या भी 13 रही है। मृतकाें में से 44 मृतकों के परिजनों को शासन द्वारा स्वीकृत आर्थिक सहायता के रूप में चार-चार लाख रुपये की राशि उपलब्ध करा दी गई है। जिसके तहत प्रशासन द्वारा इसके लिए अब तक एक करोड़ 76 लाख रुपये मृतकों के परिजनों को दिए गए हैं।
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जिला अस्पताल में है सांप के डसने का इलाज
जिला अस्पताल में सांप के डसने से पीड़ित मरीजों के लिए इंजेक्शन और दवाएं उपलब्ध रहती हैं। यदि सांप के काटने पर तत्काल मरीज को जिला अस्पताल तक पहुंचा दिया जाता है, तो उसका उपचार होकर उसे बचाया जा सकता है। लेकिन अधिकांश लोग सांप के काटने पर जिला अस्पताल या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र न ले जाकर झाड़फूूंक के चक्कर में भटकते रहते हैं और इसी देरी की वजह से उस व्यक्ति के शरीर में सांप का जहर तेजी से फैल जाता है और उसकी मौत हो जाती है।
बिजली कड़कने पर पेड़ के नीचे जाने से बचें
मौसम खराब होने और बिजली कड़कने पर लोगों को पेड़ के नीचे जाने से बचना चाहिए और यदि खेतों में फंस जाएं तो ऐसे लोगों को घुटनों के बल बैठ जाना चाहिए। इसके साथ ही यदि मोबाइल लिए हो तो बंद कर देना चाहिए। अगर आकाश में बिजली कड़क रही है, तो कभी भी हाथ में धातु से बनी चीजों को न पकड़ें और आकाशीय बिजली कड़कने के समय बिजली या टेलीफोन के खंभों आदि से दूर रहे।

झाड़-फूक में विश्वास न रखें, शीघ्र ही नजदीकी अस्पताल में इलाज कराएं और जिला अस्पताल में ऐसे मरीजों के लिए इंजेक्शन व दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। बिजली गिरने के मामले में भी यदि मरीज बिना समय गंवाए अस्पताल पहुंच जाता है तो उसकी जान बचने की उम्मीद बनी रहती है। - डॉ.राजेंद्र प्रसाद, सीएमएस।
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