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साख बचाए रखने के लिए अब इस्तीफा का सहारा

Wed, 07 Dec 2016 12:46 AM IST
lalitpur
lalitpur Updated Wed, 07 Dec 2016 12:46 AM IST
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nager palika development
ललितपुर - फोटो : amar ujala
नगर पालिका विगत डेढ़ वर्षों से आर्थिक तंगी से जूझ रही है, ऐसे बुरे समय में नगर पालिका के कुछ पार्षदों ने अपनी साख बचाने के लिए इस्तीफा का सहारा लेना शुरू कर दिया है। अब तक तीन पार्षदों ने अपना इस्तीफा नगर पालिका अधिशासी अधिकारी को सौंप दिया है, वहीं सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बहुत जल्द ही दो अन्य पार्षद भी अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं।
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वित्तीय वर्ष 2015-16 की शुरुआत से ही नगर पालिका विभागीय बजट के अभाव के कारण आर्थिक तंगी से जूझ रही है। करीब एक वर्ष से विकास कार्य पूरी तरह से ठप पड़े हुए हैं। विकास कार्यों के अभाव में पार्षदों ने एक वर्ष तो किसी तरह निकाल दिया है, लेकिन अब पार्षदों को चुनावी वर्ष की समस्या सताने लगी है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 के मद्देनजर कभी भी आदर्श आचार संहिता लागू हो सकती है। इसको देेखते हुए नगर पालिका के कई पार्षदों ने अब विभाग में विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त बजट आने की उम्मीद छोड़ दी है। यही करण है कि अब नगर पालिका के कई वार्ड पार्षदों ने आने वाले नगर पालिका चुनाव को देखते हुए वार्ड की जनता में अपनी अच्छी छवि बनाए रखने व अपनी साख बचाए रखने के लिए इस्तीफा देने का सहारा लेना शुरू कर दिया है। इसमें पार्षदों की भी मजबूरी है, क्योंकि विकास कार्यों के अभाव में त्रस्त जनता का उन्हें जमकर विरोध करना पड़ता है। वहीं, निर्माण कार्यों का टेंडर होने के बाद भी नगर पालिका का कोई ठेकेदार निर्माण कार्य करने को तैयार नहीं है। वर्तमान में नगर पालिका ठेकेदारों के करोड़ों रुपये की कर्जदार बन गई है, पुराने भुगतान नहीं होने के कारण कोई ठेकेदार कार्य करने के लिए राजी भी नहीं हो रहा है।
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यह तीन पार्षद दे चुके अपना इस्तीफा
वार्ड नंबर 02 के पार्षद केके पंथ ने अक्टूबर माह में ही नगर पालिका अधिशासी अधिकारी राकेश कुमार को अपना इस्तीफा सौंप दिया था। इस्तीफा देने के पीछे उन्होंने क्षेत्र में सड़क व नाली के निर्माण कार्य का नहीं होना और नियमित रुप से वार्ड में सफाई नहीं होने की बात बताई थी। वहीं, उन्होंने बताया कि डेढ़ वर्ष से उनके वार्ड में कोई भी निर्माण कार्य नहीं हुए हैं। श्मशान घाट के पास वाले मार्ग के निर्माण कार्य का टेंडर जून वर्ष 2015 में हो चुका है, इसके बावजूद अभी तक निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया है। वहीं, क्षेत्र की मार्ग प्रकाश व्यवस्था भी पूरी तरह से चौपट पड़ी हुई है। उक्त कारणों के ही चलते वार्ड नंबर 20 के पार्षद आशाराम कुशवाहा ने अपना इस्तीफा अधिशासी अधिकारी को सौंपा है। इसके अलावा पार्षद की मुख्य समस्या वार्ड में सार्वजनिक नाली व सड़कों पर हो रहे अतिक्रमण हैं। इसके संबंध में उन्होंने अनेकों बार नगर पालिका व जिला प्रशासन से लिखित रुप से शिकायत की और बिना अतिक्रमण हटाए व बिना नाली निर्माण किए हो रहे सड़क का निर्माण कार्य से उनको नाराजगी है। वहीं, वार्ड नंबर 14 के पार्षद मो. इदरीश राईन ने भी हाल ही में हुई बोर्ड बैठक में अपना इस्तीफा अधिशासी अधिकारी को सौंप दिया है। इसमें उन्होंने वार्ड में अधूरे पड़े निर्माण कार्यों के प्रति नाराजगी बताते हुए सफाई , मार्ग प्रकाश व्यवस्था पर भी अपनी नाराजगी व्यक्त करने हुए अपना इस्तीफा सौंपा है। वार्ड 5 की पार्षद रजनी रजक ने बताया कि उन्हें विकास कार्यों को लेकर नगर पालिका की ओर से आश्वासन मिला है। अगर जनवरी तक वादा पूरा नहीं किया जाता है, इस्तीफा दिया जाएगा। वहीं एक और वार्ड के पार्षद ने भी इस्तीफा देने का मन बना लिया है। गौरतलब है कि पार्षद इससे भलीभांति जानते हैं कि अधिशासी अधिकारी व नगर पालिका अध्यक्ष के पास इस्तीफा स्वीकार करने का अधिकार नहीं है। पार्षद केवल अपने क्षेत्र की जनता के बीच अपनी साख बचाए रखने के लिए इस्तीफा का सहारा ले रहे हैं।
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ऐसे बढ़ी आर्थिक तंगी
विगत कुछ माह पूर्व से नगर पालिका की सीमा विस्तार होने की कार्रवाई ने रफ्तार पकड़ ली थी और विगत अप्रैल माह में जनपद दौरे पर आए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जल्द ही सीमा विस्तार होने की घोषणा करके नगर पालिका को यह उम्मीद जाग दी थी शायद सीमा विस्तार होने के बाद विभाग को अतिरिक्त बजट की उपलब्ध हो सकेगा। इसके अलावा नगर पालिका अध्यक्ष सुभाष जायसवाल ने भी इस बजट की समस्या से निपटने के लिए हाल ही में खाली जमीन की नीलामी करके दुकानें के निर्माण के लिए किराए पर देने की योजना बनाई थी। लेकिन नोटबंदी के कारण कोई भी बोलीदाता नीलामी बैठक में शामिल होने के नहीं आया।



शासन ने माह फरवरी वर्ष 2015 से नगर पालिका में तैनात संविदा सफाई कर्मचारियों का मानदेय 3,600 रुपये से बढ़ाकर करीब पांच गुना 17 हजार  रुपये से अधिक कर दिया है। वर्तमान में 222 सफाई कर्मी कार्यरत हैं, जिन पर  अब 38.42 लाख रुपये प्रतिमाह खर्च हो रहा है। नगर पालिका का खर्च तो बढ़  गया लेकिन शासन ने विभाग का बजट बढ़ाने के बदले बजट में कमी कर दी है। वर्ष 2014-15 में शासन से 21.68 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे, जिसमें वेतन व पेंशन व्यय 6.78 करोड़ रुपये व विकास खर्च 14.90 करोड़ रुपये थे। लेकिन वर्ष 2015-16 में वार्षिक बजट घटकर कुल 15.48 करोड़ रुपये मिला, इसमें वेतन व पेंशन व्यय में पूर्व से करीब दो गुना बढ़कर 10 करोड़ रुपये खर्च हुआ। तब से लेकर आज तक नगर पालिका आर्थिक तंगी से जूझ रही है। वहीं, नगर पालिका ने भी विगत वर्ष जून माह में अपनी हैसियत से काफी आगे बढ़कर करोड़ों रुपये के निर्माण कार्यों का प्रस्ताव कर दिया था। वर्तमान में नगर पालिका को शासन से प्रत्येक माह कुल 1.49 करोड़ रुपये  उपलब्ध कराए जाते हैं। इनमें से 1.10 करोड़ रुपये प्रत्येक माह स्थाई सफाई कर्मचारियों, विभागीय कर्मियों व अधिकारियों का वेतन, आउट सोर्सिंग  कर्मचारियों संविदा सफाई कर्मचारियों का मानेदय, सफाई-वाहन आदि पर व्यय होते हैं। बजट में कमी व व्यय में बढ़ोत्तरी होने के कारण विभाग में आर्थिक समस्या की यह स्थिति पैदा हुई है।
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