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घरों में रहकर सादगी से मनाया गया मुहर्रम
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महरौनी में घर में रखे ताजिया के आगे मोहर्रम मनाने के दौरान उपस्थित बच्चे।
- फोटो : LALITPUR
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ललितपुर-बानपुर। जिले में शुक्रवार को मुहर्रम घरों में रहकर मनाया गया। ताजियादारों ने कोरोना गाइड लाइन का पालन करते हुए अपने घरों के बार ताजिया रखकर रस्म अदायगी की और फातिहा ख्वानी के बाद कर्बला में दफना दिया।
बताते चलें कि कोरोना संक्रमण को नजर में रखते हुए सरकार ने पर्वों को लेकर दिशानिर्देश जारी किए थे, इसी के अनुसार शुक्रवार को 10वीं का मुहर्रम सादगी से मनाया गया। शहर में आजाद चौक, अजीतापुरा, कसाईमंडी सहित कई मोहल्लों में ताजियों को घरों के बाहर रखकर फातिहा ख्वानी की। इसके बाद कुछ लोग करबला पहुंचे और ताजिया को दफना दिया गया। हालांकि आज परंपरा के मुताबिक ताजिया जुलूस न निकलने पर घंटाघर पर लोग नहीं पहुंचे।
उधर, कस्बा बानपुर में हर जगह ताजियादारी होती रही। बता दें कि कस्बे में ताजियादारी की प्रथा सदियों से अनवरत जारी है। लेकिन आज कस्बे में पूरी तरह सन्नाटा छाया रहा। लोगो ने अपने घरों में रहकर ही फातिहा ख्वानी की।
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कस्बा बानपुर में किसी भी प्रकार के जुलूस का कोई आयोजन नही किया। बताते चलें कि इस्लामी कलेंडर के प्रथम महीने मुहर्रम की दस तारीख को कर्बला के मैदान में हजरत इमाम हुसैन को धोखे से जालिम बादशाह यजीद के हाथों शहीद कर दिया गया था। उन्हीं की याद में सारी दुनियां के मुस्लिम धर्मावलंबी मातम मनाते हैं। बानपुर थानाध्यक्ष अलमा अहिरवार के नेतृत्व में फोर्स मुस्तैद रही ।
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बताते चलें कि कोरोना संक्रमण को नजर में रखते हुए सरकार ने पर्वों को लेकर दिशानिर्देश जारी किए थे, इसी के अनुसार शुक्रवार को 10वीं का मुहर्रम सादगी से मनाया गया। शहर में आजाद चौक, अजीतापुरा, कसाईमंडी सहित कई मोहल्लों में ताजियों को घरों के बाहर रखकर फातिहा ख्वानी की। इसके बाद कुछ लोग करबला पहुंचे और ताजिया को दफना दिया गया। हालांकि आज परंपरा के मुताबिक ताजिया जुलूस न निकलने पर घंटाघर पर लोग नहीं पहुंचे।
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उधर, कस्बा बानपुर में हर जगह ताजियादारी होती रही। बता दें कि कस्बे में ताजियादारी की प्रथा सदियों से अनवरत जारी है। लेकिन आज कस्बे में पूरी तरह सन्नाटा छाया रहा। लोगो ने अपने घरों में रहकर ही फातिहा ख्वानी की।
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कस्बा बानपुर में किसी भी प्रकार के जुलूस का कोई आयोजन नही किया। बताते चलें कि इस्लामी कलेंडर के प्रथम महीने मुहर्रम की दस तारीख को कर्बला के मैदान में हजरत इमाम हुसैन को धोखे से जालिम बादशाह यजीद के हाथों शहीद कर दिया गया था। उन्हीं की याद में सारी दुनियां के मुस्लिम धर्मावलंबी मातम मनाते हैं। बानपुर थानाध्यक्ष अलमा अहिरवार के नेतृत्व में फोर्स मुस्तैद रही ।