{"_id":"5e1e236f8ebc3e4b376805e2","slug":"mnrega-workers-lalitpur-news-jhs157550499","type":"story","status":"publish","title_hn":"मनरेगा मजदूर आर्थिक संकट में","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मनरेगा मजदूर आर्थिक संकट में
विज्ञापन
सिलावन/ललितपुर। मनरेगा मजदूरों की भुगतान अटका पड़ा होने के कारण मजदूरों का मनरेगा से मोहभंग होता जा रहा है। स्थिति यह है कि जिले में मनरेगा के मजदूरों का 57 करोड़ रुपये से अधिक बकाया है।
ग्रामीण मजदूरों का महानगरों की ओर पलायन रोकने और उन्हें गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 2005 में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम की शुरूआत की गई थी। शुरू में देश भर के 200 जिलों को योजना में शामिल किया गया, लेकिन एक अप्रैल 2008 से इसे प्रदेश के सभी जिलों में लागू करके ग्रामीण मजदूरों को हर हाल में साल भर में सौ दिनों के रोजगार की गारंटी दी गई। योजना के संचालन के लिए मनरेगा के तहत जॉब कार्ड धारी मजदूर द्वारा की गई मजदूरी का भुगतान रोजगार के लिए आवेदन करने के 15 दिनों के भीतर किया जाना प्रमुख है। यदि ऐसा नहीं होता है तो बेरोजगारी भत्ता देने का भी प्रावधान है। मनरेगा मजदूरों का समय से भुगतान नहीं हो पा रहा है। वर्ष 2019-20 की एमआईएस फीडिंग देखें तो जिले में 57,69,79,000 रुपये मजदूरों का बकाया चल रहा है।
छह ब्लाकों में 57 करोड़ से अधिक बकायादारी
जिले में छह विकासखंड जिनमें तालबेहट, जखौरा, बार, बिरधा, महरौनी और मड़ावरा शामिल हैं। इन सभी विकास खंडों में मजदूरों का 57,69,79, 000 रुपया अटका पड़ा है। ब्लाक तालबेहट में 7,90,33,000 रुपये जखौरा में 12,87, 98,000 रुपये, ब्लाक बार में 8,83,79,000 रुपये, ब्लाक बिरधा में 10,84,94,000 रुपये, ब्लाक महरौनी में 7,93,82, 000 रुपये और ब्लाक मडावरा 9,28,93,000 रुपये का भुगतान मनरेगा मजदूरों को अटका पड़ा है।
विज्ञापन
स्थानीय स्तर पर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, लेकिन शासन स्तर से दस दिन से पैसा नहीं आ रहा है। जैसे ही पैसा आएगा, जॉब कार्डधारकों के बैंक खाते में पहुंचा दिया जाएगा।
- अनिल कुमार पांडे, मुख्य विकास अधिकारी
विज्ञापन
ग्रामीण मजदूरों का महानगरों की ओर पलायन रोकने और उन्हें गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 2005 में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम की शुरूआत की गई थी। शुरू में देश भर के 200 जिलों को योजना में शामिल किया गया, लेकिन एक अप्रैल 2008 से इसे प्रदेश के सभी जिलों में लागू करके ग्रामीण मजदूरों को हर हाल में साल भर में सौ दिनों के रोजगार की गारंटी दी गई। योजना के संचालन के लिए मनरेगा के तहत जॉब कार्ड धारी मजदूर द्वारा की गई मजदूरी का भुगतान रोजगार के लिए आवेदन करने के 15 दिनों के भीतर किया जाना प्रमुख है। यदि ऐसा नहीं होता है तो बेरोजगारी भत्ता देने का भी प्रावधान है। मनरेगा मजदूरों का समय से भुगतान नहीं हो पा रहा है। वर्ष 2019-20 की एमआईएस फीडिंग देखें तो जिले में 57,69,79,000 रुपये मजदूरों का बकाया चल रहा है।
विज्ञापन
छह ब्लाकों में 57 करोड़ से अधिक बकायादारी
जिले में छह विकासखंड जिनमें तालबेहट, जखौरा, बार, बिरधा, महरौनी और मड़ावरा शामिल हैं। इन सभी विकास खंडों में मजदूरों का 57,69,79, 000 रुपया अटका पड़ा है। ब्लाक तालबेहट में 7,90,33,000 रुपये जखौरा में 12,87, 98,000 रुपये, ब्लाक बार में 8,83,79,000 रुपये, ब्लाक बिरधा में 10,84,94,000 रुपये, ब्लाक महरौनी में 7,93,82, 000 रुपये और ब्लाक मडावरा 9,28,93,000 रुपये का भुगतान मनरेगा मजदूरों को अटका पड़ा है।
विज्ञापन
स्थानीय स्तर पर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, लेकिन शासन स्तर से दस दिन से पैसा नहीं आ रहा है। जैसे ही पैसा आएगा, जॉब कार्डधारकों के बैंक खाते में पहुंचा दिया जाएगा।
- अनिल कुमार पांडे, मुख्य विकास अधिकारी