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शहर में अवैध तरीके से संचालित हो रही दूध डेरियां
lalitpur
Updated Sat, 01 Oct 2016 01:07 AM IST
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प्रशासन
- फोटो : amar ujala
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ललितपुर। शहर में अवैध तरीके से संचालित हो रही दूध डेरियों को शहर सीमा से बाहर नहीं किया जा सका है, जबकि इसकी जिम्मेदारी शासन ने नगर पालिका के साथ-साथ जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन को दी थी। महीनों बीतने के बाद भी प्रशासन द्वारा इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
शहर के बीचों-बीच घनी बस्तियों में संचालित इन दूध डेरियों से स्थानीय लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। खुले मैदानों में पड़े गोबर के ढेरों में मच्छरों के साथ-साथ अनेकों बीमारियां पनप रहीं हैं। इनको शहर से हटाने की बात तो दूर की बात, नगर पालिका अब तक शहर में संचालित दूध डेरियों की सूची तक तैयार नहीं कर पाया है।
शहर में संचालित होने वाली दूध डेरियों से शहरवासियों को काफी दिक्कतों का सामना पड़ता है। पशुपालक अपने पशुओं को शहर की सड़कों पर आवारा छोड़ देते हैं, जिससे राहगीर आए दिन दुर्घटनाओं का शिकार बनते हैं। वहीं पशुओं के गोबर को पशुपालकों द्वारा तबेले के आस-पास की खुले मैदानों में फेंक दिया जाता है, जिसका सफाई कर्मचारियों द्वारा कभी उठान भी नहीं किया जाता है। इस गोबर में मच्छरों से साथ-साथ अन्य बीमारियां भी पनपने लगती हैं, जिससे स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य का खतरा बढ़ जाता है। इन सभी समस्याओं केे देखते हुए प्रदेश शासन के मुख्य सचिव ने विगत 20 अप्रैल को इस संबंध में शासनादेश जारी किया था कि शहरी क्षेत्रों में संचालित दूध डेरियों को शहर सीमा से बाहर किया जाए। शासन ने इसकी जिम्मेदारी नगर पालिका ही नहीं बल्कि जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन को सौंपी थी। शहर में संचालित समस्त डेरियों को शहर सीमा से बाहर करने के लिए शासन ने तीन माह का समय दिया था। लापरवाही बरतने पर लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने को भी कहा था।
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शासन के आदेश को जारी हुए तीन माह की जगह करीब छह माह बीतने वाले हैं लेकिन अभी तक इन अवैध दूध डेरियों के खिलाफ कोई कार्रवाई शुरु नहीं की गई है। इसके लिए जिलाधिकरी द्वारा एक समिति का गठन किया जाना था, जिसका सदस्य अपर जिलाधिकारी को व सदस्य अपर पुलिस अधीक्षक, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी व नगर पालिका अधिशासी अधिकारी को नामित किया जाना था। जिलाधिकारी द्वारा अभी तक न तो समिति का गठन किया गया है और न ही नगर पालिका ने शहर में संचालित दूध डेरियों की सूची तैयार हो पाई है। अधिकारियों की लापरवाही के कारण शहर वासियों की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं।
जगह-जगह लगे हैं गोबर के ढेर, फैला रहे बीमारियां
शहर के लगभग समस्त मुहल्लों में दूध डेरियों का संचालन किया जा रहा है। घनी आबादी वाले क्षेत्रों में संचालित हो रही दूध डेरियों के स्वामियों द्वारा गाय व भैंसों का गोबर तबेले के ही आस-पास खाली पड़े खुले मैदानों में फेंक दिया जाता है। नगर पालिका के सफाई कर्मचारी भी इस गोबर का उठान नहीं करते हैं, जिससे यह ऐसे ही पड़ा रहता है जिससे मच्छरों से साथ कई बीमारियां भी पनपने लगती हैं।
शहर में मुहल्ला नेहरू नगर, आजादपुरा, नई बस्ती, गांधीनगर, लेड़ियापुरा, करीम नगर, तालाबपुरा, डोड़ाघाट, लक्ष्मीपुरा, सरायपुरा, नदीपुरा, गोविंदनगर, चौकाबाग, घुसयान, पिसनारी बाग, तालाब का बंध, तुवन टीला, अजीतापुरा, रामनगर, खिरकापुरा, विष्णुपुरा, बड़ापुरा, नझाई बाजार, जुगपुरा समेत अन्य मुहल्लों में भी दूध डेरियों केे संचालन हो रहा है। इन मुहल्लों के खाली प्लाटों पर भारी मात्रा में गोबर एकत्रित है, जिससे स्थानीय लोगों को काफी परेशानियां का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा यह पशु सड़कें पर निकलते हैं तो राहगीरों का काफी दिक्कतें होती हैं।कई राहगीर दुर्घटनाओं को शिकार बन जाते हैं।
भैंसों के कारण बस स्टैंड, सीसीआईसी मार्ग, पुलिस अधीक्षक आवास के सामने वाला मार्ग, आजादचौक, मवेशी बाजार, पानी की टंकी, जेल चौराहा आदि मार्ग प्रत्येक दिन सुबह के समय घंटों तक बाधित रहते हैं। यातायात भी बाधित होता है और राहगीरों को तमाम तरह की समस्याएं झेलनी पड़ती हैं। कई बार वाहन भी क्षतिग्रस्त हो जाते हैं।
घर के पीछे वर्षों से गोबर जमा है, नगर पालिका के कर्मचारियों से उठान करने का बोला तो वह कहते हैं कि उनका काम गंदगी उठाने का है गोबर नहीं। इन गोबर फेंकने वालों के खिलाफ भी कोई कार्रवाई नहीं की जाती है।
हिमांशु मिश्रा
आजादपुरा निवासी
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इनका कहना है
समय सीमा निकल गई, लेकिन सर्वे शुरु है। स्टाफ की कमी की वजह से सर्वे समय से पूरा नहीं हो पाया है। जल्द ही सर्वे पूरा कराकर कार्रवाई की जाएगी। राकेश कुमार अधिशासी अधिकारी
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शहर के बीचों-बीच घनी बस्तियों में संचालित इन दूध डेरियों से स्थानीय लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। खुले मैदानों में पड़े गोबर के ढेरों में मच्छरों के साथ-साथ अनेकों बीमारियां पनप रहीं हैं। इनको शहर से हटाने की बात तो दूर की बात, नगर पालिका अब तक शहर में संचालित दूध डेरियों की सूची तक तैयार नहीं कर पाया है।
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शहर में संचालित होने वाली दूध डेरियों से शहरवासियों को काफी दिक्कतों का सामना पड़ता है। पशुपालक अपने पशुओं को शहर की सड़कों पर आवारा छोड़ देते हैं, जिससे राहगीर आए दिन दुर्घटनाओं का शिकार बनते हैं। वहीं पशुओं के गोबर को पशुपालकों द्वारा तबेले के आस-पास की खुले मैदानों में फेंक दिया जाता है, जिसका सफाई कर्मचारियों द्वारा कभी उठान भी नहीं किया जाता है। इस गोबर में मच्छरों से साथ-साथ अन्य बीमारियां भी पनपने लगती हैं, जिससे स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य का खतरा बढ़ जाता है। इन सभी समस्याओं केे देखते हुए प्रदेश शासन के मुख्य सचिव ने विगत 20 अप्रैल को इस संबंध में शासनादेश जारी किया था कि शहरी क्षेत्रों में संचालित दूध डेरियों को शहर सीमा से बाहर किया जाए। शासन ने इसकी जिम्मेदारी नगर पालिका ही नहीं बल्कि जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन को सौंपी थी। शहर में संचालित समस्त डेरियों को शहर सीमा से बाहर करने के लिए शासन ने तीन माह का समय दिया था। लापरवाही बरतने पर लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने को भी कहा था।
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शासन के आदेश को जारी हुए तीन माह की जगह करीब छह माह बीतने वाले हैं लेकिन अभी तक इन अवैध दूध डेरियों के खिलाफ कोई कार्रवाई शुरु नहीं की गई है। इसके लिए जिलाधिकरी द्वारा एक समिति का गठन किया जाना था, जिसका सदस्य अपर जिलाधिकारी को व सदस्य अपर पुलिस अधीक्षक, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी व नगर पालिका अधिशासी अधिकारी को नामित किया जाना था। जिलाधिकारी द्वारा अभी तक न तो समिति का गठन किया गया है और न ही नगर पालिका ने शहर में संचालित दूध डेरियों की सूची तैयार हो पाई है। अधिकारियों की लापरवाही के कारण शहर वासियों की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं।
जगह-जगह लगे हैं गोबर के ढेर, फैला रहे बीमारियां
शहर के लगभग समस्त मुहल्लों में दूध डेरियों का संचालन किया जा रहा है। घनी आबादी वाले क्षेत्रों में संचालित हो रही दूध डेरियों के स्वामियों द्वारा गाय व भैंसों का गोबर तबेले के ही आस-पास खाली पड़े खुले मैदानों में फेंक दिया जाता है। नगर पालिका के सफाई कर्मचारी भी इस गोबर का उठान नहीं करते हैं, जिससे यह ऐसे ही पड़ा रहता है जिससे मच्छरों से साथ कई बीमारियां भी पनपने लगती हैं।
शहर में मुहल्ला नेहरू नगर, आजादपुरा, नई बस्ती, गांधीनगर, लेड़ियापुरा, करीम नगर, तालाबपुरा, डोड़ाघाट, लक्ष्मीपुरा, सरायपुरा, नदीपुरा, गोविंदनगर, चौकाबाग, घुसयान, पिसनारी बाग, तालाब का बंध, तुवन टीला, अजीतापुरा, रामनगर, खिरकापुरा, विष्णुपुरा, बड़ापुरा, नझाई बाजार, जुगपुरा समेत अन्य मुहल्लों में भी दूध डेरियों केे संचालन हो रहा है। इन मुहल्लों के खाली प्लाटों पर भारी मात्रा में गोबर एकत्रित है, जिससे स्थानीय लोगों को काफी परेशानियां का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा यह पशु सड़कें पर निकलते हैं तो राहगीरों का काफी दिक्कतें होती हैं।कई राहगीर दुर्घटनाओं को शिकार बन जाते हैं।
भैंसों के कारण बस स्टैंड, सीसीआईसी मार्ग, पुलिस अधीक्षक आवास के सामने वाला मार्ग, आजादचौक, मवेशी बाजार, पानी की टंकी, जेल चौराहा आदि मार्ग प्रत्येक दिन सुबह के समय घंटों तक बाधित रहते हैं। यातायात भी बाधित होता है और राहगीरों को तमाम तरह की समस्याएं झेलनी पड़ती हैं। कई बार वाहन भी क्षतिग्रस्त हो जाते हैं।
घर के पीछे वर्षों से गोबर जमा है, नगर पालिका के कर्मचारियों से उठान करने का बोला तो वह कहते हैं कि उनका काम गंदगी उठाने का है गोबर नहीं। इन गोबर फेंकने वालों के खिलाफ भी कोई कार्रवाई नहीं की जाती है।
हिमांशु मिश्रा
आजादपुरा निवासी
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इनका कहना है
समय सीमा निकल गई, लेकिन सर्वे शुरु है। स्टाफ की कमी की वजह से सर्वे समय से पूरा नहीं हो पाया है। जल्द ही सर्वे पूरा कराकर कार्रवाई की जाएगी। राकेश कुमार अधिशासी अधिकारी