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चुनाव में रोड़ा बन सकता है मिड डे मील का बकाया
ब्यूराे/अमर उजाला
Updated Wed, 16 Sep 2015 12:25 AM IST
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ललितपुर। पंचायत चुनाव में उतरने का मन बना रहे पूर्व प्रधानों के लिए राह आसान दिखाई नहीं दे रही है। बेसिक शिक्षा विभाग ने मिड डे मील का बकाया जमा नहीं कर रहे एक सौ बयासी पूर्व प्रधानों की सूची चुनाव आयोग को भेज दी है, ऐसी स्थिति में उनकी उम्मीदवारी खटाई में पड़ सकती है।
परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों का ठहराव बनाने के उद्देश्य से संचालित मिड डे मील योजना अनियमितताओं का शिकार हो रही है। पिछले सालों में ग्राम प्रधानों ने मनमाने तरीके से योजना का संचालन किया है। इसका नतीजा यह हुआ कि कई ग्राम पंचायतें आवंटित अनाज व कन्वर्जन कास्ट खर्च नहीं कर पाई हैं। इस तथ्य का खुलासा तब हुआ, जब तत्कालीन बीएसए देवेंद्र कुमार सिंह ने मिड डे मील का लेखा- जोखा तैयार कराया था। इस दौरान जिले की दो सौ सत्तानवें ग्राम पंचायतें मिड डे मील योजना की कर्जदार थी। चिह्नित ग्राम पंचायतों पर तीन करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया हो गया था।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने इस बकाया को वसूलने के लिए पहले प्रधानों को कुछ समय की मोहलत दी। इसके बाद भी नहीं मानें तो दर्जनों ग्राम प्रधानों के खिलाफ थाने में एफआईआर करा दी, जिससे ग्राम प्रधानों में हड़कंप मच गया। कई ग्राम प्रधानों ने बकाया जमा कर दिया तो कइयों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाकर कुछ दिनों की राहत पा ली थी। इस वसूली की कार्रवाई में करीब 67 लाख रुपये का बकाया जमा हो गया था। अवशेष दो करोड़ छियालीस लाख रुपये का बकाया अभी भी पूर्व प्रधानों पर बना हुआ है। पंचायत चुनाव के मद्देनजर बेसिक शिक्षा विभाग ने कर्जदार पूर्व ग्राम प्रधानों की सूची चुनाव आयोग को भेज दी है, जिससे कर्जदार पूर्व प्रधानों की उम्मीदवारी पर संकट के बादल छा सकते हैं।
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विभागीय अफसरों का मानना है कि यदि पूर्व प्रधान अपना बकाया समय रहते जमा नहीं करते हैं तो चुनाव आयोग उनके चुनाव में खलल डाल सकता है। बकाया जमा नहीं होने की स्थिति में उनका पर्चा भी निरस्त किया जा सकता है।
जिला पंचायत चुनाव में जता रहे दावेदारी
कई पूर्व प्रधान वर्तमान में जिला पंचायत व क्षेत्र पंचायत सदस्य के लिए विभिन्न क्षेत्रों से दावेदारी ठोक रहे हैं। अनेक पूर्व प्रधान तो मिड डे मील के बकाये को भी भूल गए हैं और वह अपने चुनाव की तैयारी में लगे हुए हैं।
मनमानी से उबर नहीं पा रही योजना
मिड डे मील योजना ग्राम प्रधानों और प्रधानाध्यापकों की मनमानी से उबर नहीं पा रही है। वर्तमान पंचवर्षीय में भी योजना के साथ खिलवाड़ हुआ है, जिससे कन्वर्जन कास्ट व अनाज के उपभोग के आंकड़े मेल नहीं खा रहे हैं। किसी ग्राम पंचायत ने अनाज कम खर्च किया तो कन्वर्जन कास्ट का ज्यादा इस्तेमाल कर लिया गया है। वहीं, कई ग्राम पंचायतों ने अनाज ज्यादा हजम कर लिया है। सूत्र बताते हैं कि जिले की 93 ग्राम पंचायतों पर पांच कुंतल या इससे अनाज का बकाया हो गया है। इसी तरह करीब एक सौ पैंतीस ग्राम पंचायतों पर कन्वर्जन कास्ट का बकाया हो गया है।
चुनाव के वक्त याद आता बकाया
बेसिक शिक्षा विभाग की लीला निराली है। पांच साल तक विभाग ने चुप्पी नहीं तोड़ी। जैसे ही पंचायत चुनाव आए तो मिड डे मील का बकाया याद आ गया। ढुलमुल कार्यशैली से बकाया लाखों रुपये में पहुंच गया है, जो चर्चा का विषय बना हुआ है।
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परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों का ठहराव बनाने के उद्देश्य से संचालित मिड डे मील योजना अनियमितताओं का शिकार हो रही है। पिछले सालों में ग्राम प्रधानों ने मनमाने तरीके से योजना का संचालन किया है। इसका नतीजा यह हुआ कि कई ग्राम पंचायतें आवंटित अनाज व कन्वर्जन कास्ट खर्च नहीं कर पाई हैं। इस तथ्य का खुलासा तब हुआ, जब तत्कालीन बीएसए देवेंद्र कुमार सिंह ने मिड डे मील का लेखा- जोखा तैयार कराया था। इस दौरान जिले की दो सौ सत्तानवें ग्राम पंचायतें मिड डे मील योजना की कर्जदार थी। चिह्नित ग्राम पंचायतों पर तीन करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया हो गया था।
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जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने इस बकाया को वसूलने के लिए पहले प्रधानों को कुछ समय की मोहलत दी। इसके बाद भी नहीं मानें तो दर्जनों ग्राम प्रधानों के खिलाफ थाने में एफआईआर करा दी, जिससे ग्राम प्रधानों में हड़कंप मच गया। कई ग्राम प्रधानों ने बकाया जमा कर दिया तो कइयों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाकर कुछ दिनों की राहत पा ली थी। इस वसूली की कार्रवाई में करीब 67 लाख रुपये का बकाया जमा हो गया था। अवशेष दो करोड़ छियालीस लाख रुपये का बकाया अभी भी पूर्व प्रधानों पर बना हुआ है। पंचायत चुनाव के मद्देनजर बेसिक शिक्षा विभाग ने कर्जदार पूर्व ग्राम प्रधानों की सूची चुनाव आयोग को भेज दी है, जिससे कर्जदार पूर्व प्रधानों की उम्मीदवारी पर संकट के बादल छा सकते हैं।
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विभागीय अफसरों का मानना है कि यदि पूर्व प्रधान अपना बकाया समय रहते जमा नहीं करते हैं तो चुनाव आयोग उनके चुनाव में खलल डाल सकता है। बकाया जमा नहीं होने की स्थिति में उनका पर्चा भी निरस्त किया जा सकता है।
जिला पंचायत चुनाव में जता रहे दावेदारी
कई पूर्व प्रधान वर्तमान में जिला पंचायत व क्षेत्र पंचायत सदस्य के लिए विभिन्न क्षेत्रों से दावेदारी ठोक रहे हैं। अनेक पूर्व प्रधान तो मिड डे मील के बकाये को भी भूल गए हैं और वह अपने चुनाव की तैयारी में लगे हुए हैं।
मनमानी से उबर नहीं पा रही योजना
मिड डे मील योजना ग्राम प्रधानों और प्रधानाध्यापकों की मनमानी से उबर नहीं पा रही है। वर्तमान पंचवर्षीय में भी योजना के साथ खिलवाड़ हुआ है, जिससे कन्वर्जन कास्ट व अनाज के उपभोग के आंकड़े मेल नहीं खा रहे हैं। किसी ग्राम पंचायत ने अनाज कम खर्च किया तो कन्वर्जन कास्ट का ज्यादा इस्तेमाल कर लिया गया है। वहीं, कई ग्राम पंचायतों ने अनाज ज्यादा हजम कर लिया है। सूत्र बताते हैं कि जिले की 93 ग्राम पंचायतों पर पांच कुंतल या इससे अनाज का बकाया हो गया है। इसी तरह करीब एक सौ पैंतीस ग्राम पंचायतों पर कन्वर्जन कास्ट का बकाया हो गया है।
चुनाव के वक्त याद आता बकाया
बेसिक शिक्षा विभाग की लीला निराली है। पांच साल तक विभाग ने चुप्पी नहीं तोड़ी। जैसे ही पंचायत चुनाव आए तो मिड डे मील का बकाया याद आ गया। ढुलमुल कार्यशैली से बकाया लाखों रुपये में पहुंच गया है, जो चर्चा का विषय बना हुआ है।