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Lalitpur News: यहां से जुड़ी रहीं मशहूर शायर मुनव्वर राणा की यादें

Tue, 16 Jan 2024 02:45 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 16 Jan 2024 02:45 AM IST
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Memories of famous poet Munawwar Rana remain linked here.
अमर उजाला ब्यूरो
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ललितपुर। दुनिया को अलविदा कह गए मशहूर शायर मुनव्वर राणा की यादें जनपद से भी जुड़ी रही हैं। वर्ष 2015 में सदनशाह दरगाह में हुए अखिल भारतीय मुशायरा कार्यक्रम में वह आए थे। उन्होंने अपनी शायरी सुनाकर श्रोताओं के दिलों में जगह बना ली थी। इस दौरान उन्होंने शायर ललितपुरी की गजल की किताब का विमोचन भी किया था। उनके निधन पर साहित्यिक संस्था गुलिस्तान ए अदब ने श्रद्धांजलि सभा की। शायरों और कवियों ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए पंक्तियों के माध्यम से अपनी पीड़ा व्यक्त कर श्रद्धासुमन अर्पित किए।

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सदन शाह दरगाह पर आयोजित मुशायरा में उन्हें आमंत्रित किया था। उनको समर्पित पंक्तियां, बो क्या गए रौनके दुनियां चली गई, वीरान होके रह गई हैं महफिलें...उनके अचानक दुनिया से जाने से सभी को गहरा दुख हुआ है।-असर ललितपुरी, शायर
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मुनव्वर राणा की शायरी दिल को छू जाती थीं, उनके निधन से अपूर्णीय क्षति हुई है। उनको श्रद्धासुमन अर्पित करने के लिए पंक्तियों की चंद लाइनें, जिसकी ऊंचाई पे पंकज शायरी को नाज, देखते ही देखते कल वो इमारत गिर गई...। कवि पंकज अंगार
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जाने माने शायर मुनव्वर राणा के निधन से साहित्य जगत दुखी है। हिंदुस्तानी शायरी का पैगंबर चला गया। उनकी उर्दू शायरी गहराई से भरी थी। उन्होंने साहित्य की दुनिया पर एक स्थायी प्रभाव छोड़ा है। उनका शेर तुम्हारी महफिलों में हम बड़े बूढ़े जरूरी हैं, अगर हम भी नहीं होंगे तो पगड़ी कौन बांधेगा... आज भी मुझे याद है।-कवि पंकज पंडित

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शायर मुनव्वर राणा के निधन से साहित्य जगत की अपूर्णीय क्षति हुई है। जहनों से अगर लोग यूं बीमार रहेंगे, फूलों की तरह देश में किरदार रहेंगे, शाखों की कली तोड़ ही डालेगी ये दुनिया, जब तक खुशबुओं के खरीददार रहेंगे...। सोनिया शवनम, शायर

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उनके इंतकाल से साहित्य जगत की अपूर्णीय क्षति हुई है। उन्हें समर्पित चंद पंक्तियां, दौरे नफरत के अंधेरों को मिटाने के लिए, शम्मा ए अम्न जलाते थे मुनव्वर राणा, उनकी खुशबू से महकती है अदब की दुनिया, गुल मुहब्बत के खिलाते थे मुनव्वर राणा...।-जहीर ललितपुरी, शायर

---------अरमान कुरैशी
मुनव्वर राणा से मिलकर जाना कि वह कितने सरल थे। उनकी पक्तियां, छू नहीं सकती मौत भी आसानी से इसको, यह बच्चा अभी मां की दुआ ओढ़े हुए है... ऐसे महान शायर को भुला पाना संभव नहीं होगा।-अरमान अजीज कुरैशी, अधिवक्ता


----------श्रद्धांजलि सभा में रहे ये लोग
साहित्यक संस्था गुलिस्तान ए अदब ने शोकसभा कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। शोकसभा में शायर असर ललितपुरी, जहीर ललितपुरी, शिवनारायण, अबरार दानिश, अमृतलाल, अख्तर जलील, वसीम असर, शाकिर अली, मासूम कौसर, गणेश बाबू, चाहत ललितपुरी, राधेश्याम, इदरीश आदि मौजूद रहे।
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