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मेडिकल कॉलेज के प्रस्ताव को भूला शासन
ललितपुर/ ब्यूरो
Updated Thu, 28 May 2015 12:58 AM IST
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ललितपुर।
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इसे शासन की उपेक्षा कहें या जनप्रतिनिधियों की उदासीनता कि जिले में
मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए भूमि चिह्नित होने के बाद भी कोई प्रयास
नहीं किए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी
को कोई जानकारी ही नहीं है।
स्वास्थ्य विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी दूर करने के लिए भारत सरकार ने केंद्र पोषित योजना के तहत 55 नए मेडिकल कॉलेज स्थापित करने का निर्णय लिया है, जिसमें ललितपुर जनपद को भी शामिल किया गया। शासन के विशेष सचिव अरिंदम भट्टाचार्य ने पिछले वर्ष 19 फरवरी 2014 को तत्कालीन जिलाधिकारी एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी को पत्र लिखकर मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए भूमि की उपलब्धता का ब्यौरा मांगा था। साथ ही, जिला अस्पताल प्रशासन से जिला चिकित्सालय परिसर में उपलब्ध कुल भूमि और खाली पड़ी भूमि की जानकारी मांगी गई थी। इसके अलावा जिला अस्पताल से 10 किलोमीटर के दायरे में 20 से 30 एकड़ ग्राम सभा अथवा अन्य भूमि का विवरण भी मांगा गया, जिसका अर्जन मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए किया जा सके।
तत्कालीन जिलाधिकारी ओपी वर्मा ने जनपदवासियों के हितों को ध्यान में रखते हुए निकटवर्ती ग्राम बुढ़वार में 35 एकड़ ग्राम सभा की जमीन चिह्नित करके 5 मार्च 2014 को शासन को रिपोर्ट भेज दी थी। तत्कालीन जिलाधिकारी के तबादले के बाद मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए जनपद स्तर पर कोई पहल नहीं की गई। मजे की बात यह है कि जिले में नए मेडिकल कॉलेज की स्थापना के संबंध में मौजूदा मुख्य चिकित्सा अधिकारी को कोई जानकारी ही नहीं है। सीएमओ डॉ. सत्येंद्र कुमार का कहना है कि जबसे उन्होंने जिले में कार्यभार ग्रहण किया है। मेडिकल कॉलेज की स्थापना संबंधी कोई फाइल अथवा तथ्य उनके संज्ञान में नहीं आया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने सीएमएस से मेडिकल कॉलेज की स्थापना से संबंधित पत्रावली मांग ली है।
मेडिकल कॉलेज से मिलेंगी सुविधाएं
12 लाख 86 हजार 860 की आबादी वाले इस जनपद मुख्यालय पर जिला अस्पताल की स्थापना के बाद भी यहां अनेक स्वास्थ्य सुविधाएं नदारद हैं। हड्डी के मामूली आपरेशन के लिए मरीजों को झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है। इसी तरह हृदय, कैंसर, न्यूरोलॉजी सहित अनेक तरह की बीमारियों के समुचित इलाज की सुविधा नहीं है, जबकि जिला अस्पताल में सीमावर्ती जनपदों के मरीज भी बेहतर इलाज की उम्मीद से यहां आते हैं। यहां मेडिकल कॉलेज की स्थापना से सभी क्षेत्र के मरीजों को महानगरों की तरह स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।
जिले में उपलब्ध स्वास्थ्य सेवा
जनपद मुख्यालय पर जिला चिकित्सालय पुरुष व जिला महिला चिकित्सालय, आयुर्वेदिक चिकित्सालय है। विकास खंड स्तर पर चार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, चार प्राथमिक स्वास्थ्य कें द्र स्थापित हैं। सुदूर इलाकों में 198 स्वास्थ्य उपकेंद्र, 23 नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित हैं। हालात यह हैं कि मानव संसाधन के अभाव में दर्जनों स्वास्थ्य उपकेंद्रों में तालाबंदी की स्थिति है। वहीं, ब्लाक व मुख्यालय स्थित अस्पताल भी विशेषज्ञों की कमी से जूझ रहे हैं, जिससे जनपदवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
इनका कहना है -
‘‘जनपद में मेडिकल कॉलेज की स्थापना के पूरी पैरवी की जाएगी। जिला प्रशासन के साथ ही राज्यसभा सांसद डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव द्वारा शासन स्तर पर इसके लिए पहल की जाएगी।’’
राजेश यादव
राज्यसभा सांसद प्रतिनिधि/ उपसभापति सहकारी समिति।
स्वास्थ्य विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी दूर करने के लिए भारत सरकार ने केंद्र पोषित योजना के तहत 55 नए मेडिकल कॉलेज स्थापित करने का निर्णय लिया है, जिसमें ललितपुर जनपद को भी शामिल किया गया। शासन के विशेष सचिव अरिंदम भट्टाचार्य ने पिछले वर्ष 19 फरवरी 2014 को तत्कालीन जिलाधिकारी एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी को पत्र लिखकर मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए भूमि की उपलब्धता का ब्यौरा मांगा था। साथ ही, जिला अस्पताल प्रशासन से जिला चिकित्सालय परिसर में उपलब्ध कुल भूमि और खाली पड़ी भूमि की जानकारी मांगी गई थी। इसके अलावा जिला अस्पताल से 10 किलोमीटर के दायरे में 20 से 30 एकड़ ग्राम सभा अथवा अन्य भूमि का विवरण भी मांगा गया, जिसका अर्जन मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए किया जा सके।
तत्कालीन जिलाधिकारी ओपी वर्मा ने जनपदवासियों के हितों को ध्यान में रखते हुए निकटवर्ती ग्राम बुढ़वार में 35 एकड़ ग्राम सभा की जमीन चिह्नित करके 5 मार्च 2014 को शासन को रिपोर्ट भेज दी थी। तत्कालीन जिलाधिकारी के तबादले के बाद मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए जनपद स्तर पर कोई पहल नहीं की गई। मजे की बात यह है कि जिले में नए मेडिकल कॉलेज की स्थापना के संबंध में मौजूदा मुख्य चिकित्सा अधिकारी को कोई जानकारी ही नहीं है। सीएमओ डॉ. सत्येंद्र कुमार का कहना है कि जबसे उन्होंने जिले में कार्यभार ग्रहण किया है। मेडिकल कॉलेज की स्थापना संबंधी कोई फाइल अथवा तथ्य उनके संज्ञान में नहीं आया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने सीएमएस से मेडिकल कॉलेज की स्थापना से संबंधित पत्रावली मांग ली है।
मेडिकल कॉलेज से मिलेंगी सुविधाएं
12 लाख 86 हजार 860 की आबादी वाले इस जनपद मुख्यालय पर जिला अस्पताल की स्थापना के बाद भी यहां अनेक स्वास्थ्य सुविधाएं नदारद हैं। हड्डी के मामूली आपरेशन के लिए मरीजों को झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है। इसी तरह हृदय, कैंसर, न्यूरोलॉजी सहित अनेक तरह की बीमारियों के समुचित इलाज की सुविधा नहीं है, जबकि जिला अस्पताल में सीमावर्ती जनपदों के मरीज भी बेहतर इलाज की उम्मीद से यहां आते हैं। यहां मेडिकल कॉलेज की स्थापना से सभी क्षेत्र के मरीजों को महानगरों की तरह स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।
जिले में उपलब्ध स्वास्थ्य सेवा
जनपद मुख्यालय पर जिला चिकित्सालय पुरुष व जिला महिला चिकित्सालय, आयुर्वेदिक चिकित्सालय है। विकास खंड स्तर पर चार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, चार प्राथमिक स्वास्थ्य कें द्र स्थापित हैं। सुदूर इलाकों में 198 स्वास्थ्य उपकेंद्र, 23 नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित हैं। हालात यह हैं कि मानव संसाधन के अभाव में दर्जनों स्वास्थ्य उपकेंद्रों में तालाबंदी की स्थिति है। वहीं, ब्लाक व मुख्यालय स्थित अस्पताल भी विशेषज्ञों की कमी से जूझ रहे हैं, जिससे जनपदवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
इनका कहना है -
‘‘जनपद में मेडिकल कॉलेज की स्थापना के पूरी पैरवी की जाएगी। जिला प्रशासन के साथ ही राज्यसभा सांसद डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव द्वारा शासन स्तर पर इसके लिए पहल की जाएगी।’’
राजेश यादव
राज्यसभा सांसद प्रतिनिधि/ उपसभापति सहकारी समिति।