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माटी मोल बिक रही सब्जी

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Mon, 27 Apr 2020 07:48 PM IST
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matimol bik rahi sabji
टमाटर की फसल के साथ राव यादवेंद्र सिंह - फोटो : AMAR UJALA
लॉकडाउन की वजह से सीमाओं पर आवागमन ठप है। इससे सब्जी पैदा करने वाले किसानों का बुरा हाल है। उनकी सब्जी जिले में माटी मोल बिक रही है। इससे सब्जी की खेती करने वाले किसानों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। गर्मी में फसल की कीमत अच्छी मिलती है, लेकिन इस बार किसानों को लगभग दस करोड़ रुपये का नुकसान होना तय है। तहसील ललितपुर के अंतर्गत ग्राम रजवारा, पनारी, बिरारी, कचनोंदा, मैलवारा, मसौरा, जिजयावन सहित कई गांवों में किसान सब्जी की खेती करते हैं। लौकी, टमाटर, तरोई, गोभी, ककड़ी, टिंडा आदि की पैदावार करते हैं। यह सब्जी झांसी, मध्यप्रदेश के सागर, टीकमगढ़, विदिशा, इंदौर आदि जिलों में जाती थी, क्योंकि इन जिलों के सब्जी कारोबारी स्वयं आकर यहीं से सब्जी ले जाते थे। इससे किसानों को यह फायदा होता था कि उन्हें भाड़ा खर्च नहीं करना पड़ता था, मंडी के भी चक्कर नहीं लगाने पड़ते थे और कारोबारी घर बैठे सब्जी ले जाते थे। जो टमाटर गर्मियों में बीस से पच्चीस रुपये प्रति किलोग्राम बिकता था, अब वह एक रुपये प्रति किलोग्राम के भाव से बिक रहा है। खेती करने वाले किसान डेढ़ सौ एकड़ से अधिक जमीन में सब्जी उगाते हैं। इसमें एक करोड़ रुपये के आसपास खर्च होता है, क्योंकि बीज अस्सी हजार रुपये प्रति किलोग्राम मिलता है। क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सब्जियां पैदा होती है, जो ललितपुर सब्जी मंडी सहित मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों में बेची जाती हैं। मौसम के अनुसार कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करने में भी किसानों का बहुत पैसा खर्च होता है। जिले में टमाटर की खपत सबसे अधिक होती, यही कारण है कि सौ एकड़ में टमाटर पैदा होता है, अन्य पचास एकड़ में तरोई, मूली, धनिया, लौकी, ककड़ी और रौंसा की फली पैदा होती है। टमाटर एक एकड़ में पैदा करने के लिए पचास हजार रुपये की लागत आती है। जबकि, फसल बिकने पर करीब डेढ़ से पौने दो लाख रुपये की आमदनी हो जाती है। ग्राम रजवारा में पिछले दस साल से बंटाई से खेती करते चले आ रहे गांव के रज्जूलाल कुशवाहा का कहना है कि लॉक डाउन की वजह से पूरा कारोबार चौपट हो गया। लागत निकालने में भी परेशानी आ रही है। सब्जी की उचित कीमत नहीं मिलने से किसान बर्बाद हो रहा है। खेतों के अासपास घूम रहे छुट्टा जानवरों से खेतों की रखवाली करने में ही सर्वाधिक परेशानी हो रही है। -------------------------- सब्जी का मुख्य केंद्र है बिरारी तहसील के अंतर्गत ग्राम बिरारी में सब्जी का प्रशिक्षण केंद्र है। यहां आसपास के गांवों के किसान सब्जी पैदा करने में रुचि लेते हैं। लेकिन, कोरोना के कारण किसानों का सब कुछ बरबाद हो गया है। ----------------------- पिछले साल की तरह इस साल भी मैंने ककड़ी, टिंडा और धनिया की खेती की है। लेकिन, लॉकडाउन की वजह से बाजार जाने की हिम्मत नहीं होती है। सब्जी में इस बार भारी नुकसान हुआ है। - तोरन कुशवाहा --------------- डेढ़ एकड़ में लौकी औरर तरोई की फसल बोई थी। फसल तैयार है, लेकिन लाकडाउन नहीं खुलने के कारण बाजार नहीं मिल पा रहा है। इसलिए फसल में नुकसान है। - रामगोपाल राय ----------------------
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