{"_id":"5bdcaee2bdec2269407efb07","slug":"make-patakha-teenager","type":"story","status":"publish","title_hn":"नाबालिगों से बना जा रहे है पटाखे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नाबालिगों से बना जा रहे है पटाखे
jhansi
Updated Sat, 03 Nov 2018 01:39 AM IST
विज्ञापन
नाबालिगों से बना जा रहे है पटाखे
- फोटो : amarujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दीपावली के आने के साथ ही नगर में कई स्थानों पर कानून को ताक पर रखकर पटाखे बनना शुरू हो गए। कुछ स्थानों पर तो ठेकेदार नाबालिगों बच्चों तक से यह जोखिम भरा काम ले रहे है। इन जगहों पर सुरक्षा के भी इंतजाम नहीं है। ऐसे में हादसा होने की हर समय संभावना बनी रहती है।
नगर में चार लोगों के पास पटाखे बनाने का लाइसेंस है। इस समय मात्र तीन लोग ही पटाखे बना रहे है। जिसमें अधिकांश स्थानों पर नशे के आदि और नाबालिगों से काम लिया जा रहा है। जो कभी भी हादसे का कारण बन सकता है। जिन स्थानों पर पटाखे बनाए जा रहे है वहां आग बुझाने के लिए कोई पुख्ता इंतजाम के अलावा सुरक्षा का कोई समुचित व्यवस्था तक नहीं है। इसके अलावा अधिक लाभ की चाह में निर्धारित मजदूरों की जगह अधिक संख्या में लोगों से काम कराया जा रहा है। जिनमें नाबालिग भी शामिल है। यह आतिशबाज अपने लाइसेंस से कई गुना पटाखों का निर्माण कर रहे है। ऐसे में अधिक विस्फोट का भंडारण होने से हादसे की संभावना रहती है। इससे पूर्व नगर में दो बार पटाख निर्माण के दौरान हादसे हो चुके है। इसके बाद भी पुलिस प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।
पटाखा लाइसेंस धारकों द्वारा बच्चों से पटाखे बनबाने के संबंध में जब उपजिलाधिकारी गजल भारद्वाज से उनका पक्ष लिया तो उनका कहना था कि उन्हें निरीक्षण के समय ऐसा कुछ नहीं दिखा। फिर भी यदि ऐसा हो रहा है तो उनकी पुख्ता जानकारी उपलब्ध कराने पर अवश्य कार्रवाई की जाएगी। वही नगर में लगने वाले पटाखा स्थान के संबंध में दो दिन बाद ही निर्णय लिया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
नगर में चार लोगों के पास पटाखे बनाने का लाइसेंस है। इस समय मात्र तीन लोग ही पटाखे बना रहे है। जिसमें अधिकांश स्थानों पर नशे के आदि और नाबालिगों से काम लिया जा रहा है। जो कभी भी हादसे का कारण बन सकता है। जिन स्थानों पर पटाखे बनाए जा रहे है वहां आग बुझाने के लिए कोई पुख्ता इंतजाम के अलावा सुरक्षा का कोई समुचित व्यवस्था तक नहीं है। इसके अलावा अधिक लाभ की चाह में निर्धारित मजदूरों की जगह अधिक संख्या में लोगों से काम कराया जा रहा है। जिनमें नाबालिग भी शामिल है। यह आतिशबाज अपने लाइसेंस से कई गुना पटाखों का निर्माण कर रहे है। ऐसे में अधिक विस्फोट का भंडारण होने से हादसे की संभावना रहती है। इससे पूर्व नगर में दो बार पटाख निर्माण के दौरान हादसे हो चुके है। इसके बाद भी पुलिस प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।
विज्ञापन
पटाखा लाइसेंस धारकों द्वारा बच्चों से पटाखे बनबाने के संबंध में जब उपजिलाधिकारी गजल भारद्वाज से उनका पक्ष लिया तो उनका कहना था कि उन्हें निरीक्षण के समय ऐसा कुछ नहीं दिखा। फिर भी यदि ऐसा हो रहा है तो उनकी पुख्ता जानकारी उपलब्ध कराने पर अवश्य कार्रवाई की जाएगी। वही नगर में लगने वाले पटाखा स्थान के संबंध में दो दिन बाद ही निर्णय लिया जाएगा।
विज्ञापन