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Lalitpur News: खरीद केंद्रों पर सवा दो माह से नहीं हुई मक्के की खरीद
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सत्यापन ही नहीं करा पा रहे अधिकारी, औने पौने दाम पर मक्का बेचने को मजबूर किसान
खरीद के लिए बनाए गए हैं दो केंद्र, सौ मीट्रिक टन खरीद का मिला है लक्ष्य
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। मक्के की सरकारी खरीद के लिए क्रय केंद्र खुलने के बाद भी किसानों को अब तक कोई लाभ नहीं मिल सका है। किसानों को मजबूरी में मंडी में औने-पौने दाम पर ही मक्का बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है। विभागीय कमी के चलते किसानों को खरीद केंद्रों का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
इस बार भी किसानों को मक्के की फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए जिले में दो मक्का क्रय केंद्र खोले गए हैं। सवा दो माह पहले खोले गए दोनों खरीद केंद्रों पर कुल सौ मीट्रिक टन मक्का खरीद का लक्ष्य रखा गया था। जिले में इस वर्ष खरीफ के सीजन में मक्के की फसल की बोआई 32,031 हेक्टेयर लक्ष्य के सापेक्ष 33,165 हेक्टेयर में की गई थी।
कृषि विभाग के आकलन के अनुसार, इस वर्ष जिले में मक्के की फसल का अनुमानित उत्पादन भी लगभग 3,648.15 मीट्रिक टन होना बताया जा रहा है। शासन से जनपद में मक्के की खरीद के लिए ग्राम रोंड़ा व महरौनी में खरीद केंद्र खोले गए हैं और शासन ने इस बार मक्का की एमएसपी 2400 रुपये प्रति क्विंटल तय की है। वहीं, विभागीय प्रक्रिया के चलते इस बार भी सत्यापन नहीं होने के चलते अब तक मक्का की खरीद शुरू ही नहीं हो सकी है।
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कृषि विभाग की ओर से इस बार सेटेलाइट से खेतों का सत्यापन कराया गया है। इसमें जो फसल बोई गई है, वही फसल पोर्टल पर फीड की गई है। ऐसे में खरीद केंद्रों पर जो किसान पंजीकरण करा रहे हैं, उनके खेतों के नंबर पर मक्का की फसल दर्ज नहीं दिखने के कारण सत्यापन भी नहीं हो पा रहा है। इसके चलते, जनपद में अब तक मक्का खरीद का आंकड़ा शून्य ही बना हुआ है।
22 दिन में कैसे होगा लक्ष्य पूरा
मक्का खरीद के लिए अभी अधिकारियों द्वारा सत्यापन का कार्य किया जा रहा है। खरीद के लिए अब मात्र 22 दिन का समय ही शेष बचा है। ऐसे में यदि सत्यापन हो जाता है तो बंद होने से पहले मक्के की खरीद का खाता तो खुल ही जाएगा। फिलहाल सत्यापन का कार्य अभी चल रहा है।
वर्जन
किसान ने पंजीकरण करा रहे हैं लेकिन मक्के की खरीद के लिए तकनीकी कारणों से सत्यापन नहीं हो पा रहा है। इस वजह से मक्का की खरीद शुरू नहीं हो सकी है। -चामुंडा प्रसाद पांडेय, डिप्टी आरएमओ
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खरीद के लिए बनाए गए हैं दो केंद्र, सौ मीट्रिक टन खरीद का मिला है लक्ष्य
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। मक्के की सरकारी खरीद के लिए क्रय केंद्र खुलने के बाद भी किसानों को अब तक कोई लाभ नहीं मिल सका है। किसानों को मजबूरी में मंडी में औने-पौने दाम पर ही मक्का बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है। विभागीय कमी के चलते किसानों को खरीद केंद्रों का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
इस बार भी किसानों को मक्के की फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए जिले में दो मक्का क्रय केंद्र खोले गए हैं। सवा दो माह पहले खोले गए दोनों खरीद केंद्रों पर कुल सौ मीट्रिक टन मक्का खरीद का लक्ष्य रखा गया था। जिले में इस वर्ष खरीफ के सीजन में मक्के की फसल की बोआई 32,031 हेक्टेयर लक्ष्य के सापेक्ष 33,165 हेक्टेयर में की गई थी।
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कृषि विभाग के आकलन के अनुसार, इस वर्ष जिले में मक्के की फसल का अनुमानित उत्पादन भी लगभग 3,648.15 मीट्रिक टन होना बताया जा रहा है। शासन से जनपद में मक्के की खरीद के लिए ग्राम रोंड़ा व महरौनी में खरीद केंद्र खोले गए हैं और शासन ने इस बार मक्का की एमएसपी 2400 रुपये प्रति क्विंटल तय की है। वहीं, विभागीय प्रक्रिया के चलते इस बार भी सत्यापन नहीं होने के चलते अब तक मक्का की खरीद शुरू ही नहीं हो सकी है।
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कृषि विभाग की ओर से इस बार सेटेलाइट से खेतों का सत्यापन कराया गया है। इसमें जो फसल बोई गई है, वही फसल पोर्टल पर फीड की गई है। ऐसे में खरीद केंद्रों पर जो किसान पंजीकरण करा रहे हैं, उनके खेतों के नंबर पर मक्का की फसल दर्ज नहीं दिखने के कारण सत्यापन भी नहीं हो पा रहा है। इसके चलते, जनपद में अब तक मक्का खरीद का आंकड़ा शून्य ही बना हुआ है।
22 दिन में कैसे होगा लक्ष्य पूरा
मक्का खरीद के लिए अभी अधिकारियों द्वारा सत्यापन का कार्य किया जा रहा है। खरीद के लिए अब मात्र 22 दिन का समय ही शेष बचा है। ऐसे में यदि सत्यापन हो जाता है तो बंद होने से पहले मक्के की खरीद का खाता तो खुल ही जाएगा। फिलहाल सत्यापन का कार्य अभी चल रहा है।
वर्जन
किसान ने पंजीकरण करा रहे हैं लेकिन मक्के की खरीद के लिए तकनीकी कारणों से सत्यापन नहीं हो पा रहा है। इस वजह से मक्का की खरीद शुरू नहीं हो सकी है। -चामुंडा प्रसाद पांडेय, डिप्टी आरएमओ