{"_id":"5fe798f78ebc3e3d9133424f","slug":"mahant-giri-gadi-remove-his-identy-lalitpur-news-jhs184501312","type":"story","status":"publish","title_hn":"संरक्षण के अभाव में पहचान खो रही है महंत गिरी की गढ़ी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संरक्षण के अभाव में पहचान खो रही है महंत गिरी की गढ़ी
झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 27 Dec 2020 01:41 AM IST
विज्ञापन
महंत गिरी की गढ़ी
- फोटो : LALITPUR
Link Copied
ललितपुर। कभी नागा साधुओं की साधना स्थली रही महंत गिरी की गढ़ी वर्तमान में सरंक्षण के अभाव से अपना अस्तित्व खोती जा रही है। इन्हें संरक्षण मिल जाए तो यह भव्य पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो सकता है। जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर जखौरा ब्लॉक का गांव है सिरसी। यहां पर करीब पांच सौ वर्ष पूर्व गिरि परिवार के नागा साधु रहा करते थे। तत्कालीन समय में यह चंदेरी के महाराजा शिशुपाल सिंह का क्षेत्र हुआ करता था और यह स्थान सिरसागढ़ के नाम से प्रसिद्ध था। पौराणिक कथाओं के अनुसार महाराजा शिशुपाल का हाथी यहां गिरकर मर गया था। महाराज को किसी ने नागा साधु के बारे में बताया। साधु हाथी के पास गए और अपने कमंडल का जल छिड़का। जल छिड़कते ही हाथी जीवित हो उठा। इस चमत्कार ने महाराजा को बहुत प्रभावित किया और उन्होंने साधु से कुछ मांगने को कहा लेकिन साधु ने कुछ लेने से इंकार कर दिया। बाद में शिशुपाल ने यहां पर स्थापित किले को उक्त नागा साधु को रहने के लिए दे दिया। पहले महंत ने यहां जीवित समाधि ली थी ने अपने शिष्य को इस साधना स्थली का दूसरा महंत घोषित किया था। ऐसी मान्यता है कि इस महंत की समाधि जो भी व्यक्ति मन्नत मांगता है वह अवश्य पूरी होती है। इसके बाद दूसरे से लेकर 12वें साधु तक गुरु चेला परंपरा के अनुसार यहां महंत होते रहे और समाधि लेते रहे। 13वें महंत के रूप में गोवर्धन गिरी ने गद्दी संभाली। इन्होंने शादी की और गिरी परिवार के वंशज बढ़े। वर्तमान में इनके पुत्र विश्वंभर गिरी 14वें महंत के रूप में साधना का कार्य संभाले हुए हैं।
विज्ञापन
महंत विश्वंभर गिरी के बड़े पुत्र अमन गिरी ने बताया कि महंत गिरी की गढ़ी के नाम से विख्यात यह किला पांच एकड़ क्षेत्र में फैला है। यहां विभिन्न मंदिरों / समाधियों / आवासीय भवनों का निर्माण किया गया है। इन मंदिरो के गर्भगृह मे शिवलिंग स्थापित है। इनमें से गढ़ी के आवासीय भवनों के प्रवेश- द्वार के सामने बने हुए समाधि के गर्भगृह में स्थापित शिवलिंग महत्वपूर्ण है। इस समाधि के बारे में कहा जाता है कि यह प्रथम महंत की समाधि है। प्रवेश द्वार से घुसते ही समाधि से पहले यज्ञशाला है जहां हवन और आहुतियां होती हैं। वर्तमान में गढ़ी के अधिकांश हिस्से जीर्णशीर्ण हो चुके हैं, जबकि कुछ हिस्से धराशायी भी हो चुके हैं। गांव के पश्चिम दिशा में खेड़र नदी के तट पर समाधान घाट नाम से प्रसिद्ध स्थान पर महंत जी के लगभग तीस सहयोगियों की समाधियों के ऊपर छोटे- बड़े आकार के मंदिर बनाए गए हैं, जिनमें शिवलिंग स्थापित हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे| Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।