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सौजना गौशाला में गोंवश की मृत्यु मामले की होगी मजिस्ट्रीयल जांच

Mon, 21 Dec 2020 12:59 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 21 Dec 2020 12:59 AM IST
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magistrial investigation sojna cowshelter
गौशाला का निरीक्षण करते डीएम - फोटो : LALITPUR
ललितपुर। विकासखंड महरौनी के अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल सौजना में गोवंश की मृत्यु के मामले की मजिस्ट्रीयल जांच कराई जाएगी। उप जिलाधिकारी मड़ावरा एसपी सिंह को जांच के लिए नामित किया गया है। उधर, लापरवाही बरतने के मामले में कइयों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
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जिलाधिकारी अन्नावि दिनेशकुमार ने गोवंश आश्रय स्थल सौजना का निरीक्षण किया। इस दौरान शेड के नीचे कमजोर गोवंश पाए गए। इसके अलावा पुराना भूसा व पशुओं की गंदगी का सूखा मिश्रण भी मिला। गोवंश आश्रय स्थल सौजना में 01 से 19 दिसंबर तक कुल सात गोवंश मृत हुए थे, जिनका निस्तारण किया जा चुका है। मृतक गोवंशों की शव-विच्छेदन की रिपोर्ट के अनुसार 03 वृद्धावस्था के कारण और 02 न्यूमोनिया के कारण मृत्यु हुई है। अन्य की रिपोर्ट आना बाकी है। गोवंशों की भोजन, पानी, शेड आदि व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया गया। गोशाला में 1063 गोवंश दर्ज हैं। गोवंश आश्रय स्थल में 59.4 क्विटंल भूसा एवं 12.5 क्विंटल चोकर उपलब्ध है। मौके पर दैनिक साफ-सफाई का कार्य प्रगति पर पाया गया। जिस शेड के नीचे कमजोर गोवंश थे, वहां पर पुराना भूसा व पशुओं की गंदगी का सूखा मिश्रण पाया गया। उपस्थित केयरटेकर ने बताया कि पक्की फर्श पर गोवंशो के बैठने व ठंड से बचाने हेतु पुराना खराब भूसा फर्श पर डाला गया था।
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गोशाला में पीने के पानी हेतु सबमरसेबल पंप की व्यवस्था है, लेकिन चरही नहीं है। गड्ढे में पानी इकट्ठा कर गोवंश को पिलाया जाता है। गोवंशों के सर्दी से बचाव हेतु अलाव एवं तिरपाल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। निरीक्षण के समय अपर जिलाधिकारी वित्त/राजस्व अनिल कुमार मिश्र, तहसीलदार श्रीकृष्ण तहसीलदार जिला पंचायत राज अधिकारी अवधेश प्रताप सिंह, पशु चिकित्साधिकारी रंजीत कुशवाहा एवं क्षेत्रीय लेखपाल उपस्थित रहे। उधर, जिलाधिकारी ने गोवश आश्रय स्थल सौजना में गोवंश की मौत के मामले की मजिस्ट्रीयल जांच के निर्देश दिए हैं।
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गौरतलब है कि 15 दिसंबर को मंडलायुक्त ने ग्राम भौरसिल गोवंश आश्रय स्थल का निरीक्षण किया गया था। इसमें मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि जनपद की समस्त गोशालाओं का स्वयं स्थलीय निरीक्षण करते रहें तथा बीमार एवं कमजोर गोवंशो का समुचित उपचार एवं देखभाल करते रहे। मौके पर बीमार, वृद्ध एवं कमजोर गोवंश को अलग शेल्टर में रखने, अलाव की नियमित व्यवस्था तथा काउ कोट हेतु तहसीलदार को निर्देशित किया गया था। मौके पर मौजूद तहसीलदार ने पॉलीथिन से शेड को चारों तरफ से ढंकने तथा अलाव जलाने की कार्रवाई की थी।
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