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Lalitpur News: कृष्ण बनाम गांधी पर लोहिया ने दिया था घंटाघर के मैदान में विशेष भाषण

Sat, 06 Apr 2024 01:44 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 06 Apr 2024 01:44 AM IST
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Lohia had given a special speech on Krishna vs Gandhi in the Ghantaghar grounds.
रवि शंकर सेन
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ललितपुर। समाजवादी विचारधारा के जनक डॉ. राममनोहर लोहिया जनपद में दो बार आए थे। पहली बार वर्ष 1960 में नवनिर्मित घंटाघर का उद्घाटन के दौरान उन्होंने जो भाषण दिया था उसे आज भी लोग याद करते हैं। प्रबुद्ध वर्ग के अनुसार डॉ. लोहिया ने हिंसा और अहिंसा पर एटम और गांधी का उदाहरण पेश किया था। ऐसा उदाहरण किसी नेता ने किसी मंच पर नहीं दिया। साथ ही भगवान कृष्ण के राजनैतिक कौशल को भी गांधी जी से जोड़ा था।

साहित्यकार सुरेश सोनी बताते हैं कि उनके पिता दुर्गाप्रसाद के साथ डॉ. लोहिया के नजदीकी संबंध थे। वह बताते थे कि पहली बार राममनोहर लोहिया 20 अप्रैल 1960 में आए थे, शहर की शान माने जाने वाले घंटाघर का उद्घाटन उन्होने ही किया था। नगर पालिका अध्यक्ष शादीलाल दुबे के कार्यकाल में घंटाघर का निर्माण कराया गया था। लोहिया से उद्घाटन कराने के लिए उन्होंने हिंदी के अंकों वाली चार घड़ियां लगवाईं थीं। नगर पालिका के एक कर्मचारी को भेजकर यह घड़ियां कलकत्ता से मंगाई गई थी। राममनोहर लोहिया ने उद्घाटन कार्यक्रम में आयोजित जनसभा में उन्होंने ऐतिहासिक भाषण दिया था, जिसकी शिलापट्टिका बाद में यहां पर चस्पा कराई गई। उन्होंने कहा था कि इस युग की दो महान घटनाएं हैं एटम और गांधी देखें किसकी जीत होती है। उन्होंने इन दो शब्दों में हिंसा व अहिंसा दोनों के समर्थकों को परिभाषित कर दिया था। साथ ही कृष्ण और गांधी को परिभाषित किया था। जनपद में लोहिया की समाजवादी विचारधारा को मनाने वाले तब से लेकर अब तक कई लोग मौजूद हैं। राजनैतिक जानकार रामदास मुंशी बताते हैं कि दूसरी बार डॉ. लोहिया का आगमन वर्ष 1965 के करीब हुआ था, तब भी आननफानन उनकी जनसभा का आयोजन किया गया। उस समय पत्रकारों ने उनसे सवाल किया कि आप कड़वा बोलते हैं, तो उन्होंने जवाब दिया था, कि वर्तमान में देश में पतझड़ का मौसम हैं, इस मौसम में कोयल की तरह मीठा नहीं बोला जाता है। अब वैसे नेता की सभाओं के लिए पुराने राजनैतिक लोग तरसते हैं।
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