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आलू बीनने की मजदूरी छिन गई, गांव तक पैदल आए

Mon, 30 Mar 2020 11:09 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 30 Mar 2020 11:09 PM IST
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lockdown crisis, lost job
आगरा से लौटे मजदूर - फोटो : LALITPUR
ललितपुर। कोरोना वायरस से कई परिवारों के समक्ष रोजी-रोटी का संकट आन पड़ा है। मजूदरी की उम्मीद में ग्रामीण आगरा गए थे, लेकिन लॉकडाउन होने की वजह से कुछ अधर में लटक गया। मजबूरन, ग्रामीणों को काम से वापस लौटना पड़ा।
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ब्लाक जखौरा के ग्राम ननौरा निवासी ब्रगभान सहरिया, किसन, नारायण समेत सहरिया समुदाय के कई परिवारों के लोग आगरा में मजदूरी करते थे। वहां पर आलू बड़े पैमाने पर पैदा होता है। इस कारण बहुत सा आलू खेतों में ही पड़ा रह जाता है। यह आलू बीनने के लिए मजदूरों को काम पर लगाया जाता है। सीजन होने के कारण इन दिनों अच्छी खासी मजदूरी चल रही थी, लेकिन कोरोना वायरस के कारण देश भर में लॉकडाउन हो गया। मजदूरों को उम्मीद थी कि उनका काम चलता रहेगा, लेकिन बाद में आलू किसानों ने ही काम बंद कर दिया। इस कारण मजदूर बेकार हो गए। उन्हें गांव जाने का फरमान सुना दिया गया।
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मजदूरों ने किसी तरह वहां से आने की तैयारी की, लेकिन आने-जाने का कोई साधन नहीं होने के कारण उन्होंने पैदल ही गांव की ओर चलना शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने आपबीती सुनाते हुए कहा कि तीन दिन तक पैदल चलने के बाद उन्हें एक गाड़ी मिली और वह झांसी तक आ गए। यहां पर ललितपुर जाने के लिए साधन मिल गया और वह गांव पहुंच गए। उनके पास अब खाने- पीने का इंतजाम नहीं है।
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ब्लॉक जखौरा के ग्राम ननौरा से आगरा में आलू बीनने की मजदूरी के लिए गए थे, लेकिन अचानक से काम बंद होने से वापस आ गए हैं।
- ब्रगभान सहरिया
आगरा से चले थे। तीन दिन में अपने जिले में आ सके हैं। आवागमन के साधनों की कमी के कारण बच्चों के साथ पैदल चले।
- किशन ननौरा
अभी लगभग दो सप्ताह पहले ही आगरा मजदूरी के लिए अपने परिवार के साथ गए थे। जहां पर बरसात और अन्य कारणों के चलते कुछ दिन ही काम चल पाया है।
- नारायण सहरिया
मजदूरी में जितने पैसे मिले थे, वह सब अब तक खर्च हो गए हैं। अतिरिक्त कोई पैसों नहीं मिला है। अपना किराया व अन्य खर्च लगाकर पहुुंचे हैं।
- फूलसिंह
रास्ते में आते समय अधिक परेशानी हुई। छोटे बच्चों के साथ होने से खाने- पीने के लिए परेशान रहे। जो कुछ पैसा था वह सब खत्म हो गया है।
- सिया
अब अपने घर पर पहुंचकर कुछ दिन तक गेहूं व अन्य फसलों की कटाई करेंगे। इससे कुछ दिन तक और परिवार का भरण पोषण हो सकेगा।
- पार्वती
देश बंद होने से अब परिवार का भरण पोषण करना मुश्किल हो जाएगा। कहीं भूखे न मरना पड़े। इसका डर सता रहा है।
- कलावती
गांव ननौरा से कुछ ही दिन पहले ही मजदूरी करने के लिए गए थे। अब पता नहीं कि मजदूरी मिलेगी या नहीं।
- कला
परिवार की आर्थिक स्थिति खराब है। सभी लोग मजदूरी करके परिवार का भरण पोषण करते हैं। अब कैसे परिवार का पालन पोषण होगा।
- गनपत
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