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Lalitpur News: हल्कू बनकर किसान खेत पर काट रहे पूस की रात
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ललितपुर/सिलावन। मुंशी प्रेमचंद्र की कहानी पूस की रात के किसान हल्कू जैसी दशा ललितपुर के किसानों की है। जिले के किसान हल्कू बनकर फसल को नीलगाय और अन्ना जानवरों ने बचाने के लिए खेत पर मचान बनाकर सर्द रात गुजार रहे हैं। नीलगायों का झुंड खेत में घुसकर सारी फसल को बर्बाद न कर दे, इस डर से किसान रातभर जागकर फसल की रखवाली कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि जानवरों के फसल बर्बाद होने के बाद सरकार मुआवजा नहीं देती है। ऐसे में उन्हें ही फसल की रखवाली करनी पड़ रही है।
महरौनी तहसील के छपरट, गगनियां, चौकी, दिगवार, गुंद्रापुर, पठा, मिदरवाहा, किसरदा, पचौंडा, चक, समोगर, कुरौरा, भौरट, भैरा, सतलींगा, गुमची, बम्हौरी बहादुर सिंह, पड़वा, पाह, बूटी, अजनौरा, बिल्ला, गंगचारी, बनौनी, जरया, कलौथरा, बैरबारा, बजर्रा, सिलावन, टेंनगा आदि गांव वन प्रभाग क्षेत्र छपरट से सटे हुए हैं। जंगली इलाका होने के कारण यहां नीलगायों का आतंक चरम पर है। नील गाय खेतों में चना, मटर व गेहूं की फसल बर्बाद कर देती हैं।
ऐसे में किसान को फसल बचाने के लिए खेत पर जाग रहे हैं। किसानों का कहना है कि पहले ही प्राकृतिक आपदा के चलते फसल प्रभावित हुई है। अब अन्ना जानवर और नीलगाय फसल बर्बाद कर रहे हैं। सैकड़ों किसानों की रबी की फसल बर्बाद हो चुकी है। इससे आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।
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किसानों का कहना है कि अब तो नीलगाय हमलावर भी हो जाती हैं। कई किसान नीलगाय के हमले से चुटहिल भी हो चुके हैं। नीलगाय के आतंक से त्रस्त किसान कई सालों से वन विभाग के अधिकारियों से वन क्षेत्र में तार बाउंड्री लगवाने की मांग करते चले आ रहे हैं, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। किसानों ने अन्ना जानवर और नीलगायों द्वारा नष्ट हुई फसल का सरकार से मुआवजा दिलाने की मांग की है।
नील गाय से किसान परेशान हैं। रात के अंधेरे में नील गाय का झुंड खेतों में घुस जाता है और फसल को खाकर व रौंदकर नष्ट कर देता है। अब तो दिन में भी नील गाय खेत पर धावा बोल देती हैं। यदि वन क्षेत्र की सीमा पर बारह फीट ऊंची जालीदार तार बाउंड्री लग जाए तो काफी हद तक इस समस्या से निजात मिल सकती हैं। - कुंजन सिंह, किसान, गगनियां गांव
किसानों के लिए नीलगाय और आवारा जानवरों की समस्या नासूर बनती जा रही है। जानवरोंके आतंक से फसल को बचाने के लिए मय परिवार के डेरा खेतों पर ही जमा हुआ है। यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो किसानों को खेती किसानी छोड़ने पर मजबूर होना पड़ेगा। - सुजान सिंह, किसान, गांव किसरदा
क्षेत्र में आवारा जानवर और नीलगाय की समस्या विकराल होती जा रही है। जानवर फसल को काफी क्षति पहुंचा रहे हैं। खेतों की सुरक्षा करना मुश्किल हो रहा है। जनप्रतिनिधियों को भी इससे कोई सरोकार नहीं है। जानवरों द्वारा नष्ट फसल पर सरकार मुआवजा देना सुनिश्चित करे। - अमोलक सिंह, किसान गांव किसरदा
वन क्षेत्र में नीलगायों की तादाद दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। यदि यही स्थिति रही तो आने वाले समय में इनके आतंक से किसानों को गांव भी खाली करना पड़ सकता है। सरकार आवारा जानवरों व जंगली गायों से फसल की सुरक्षा की व्यवस्था कराए। -राघवेंद्र, किसान, समोगर गांव
नीलगाय की समस्या काफी तेजी से बढ़ रही है। सरकार को इसके लिए ठोस उपाय करने चाहिए। यदि सरकार फसल नष्ट करने वाली नीलगायों की नसबंदी करने की योजना बनाती है, तो इससे प्रजनन क्षमता कम होगी। साथ जानवरों द्वारा नष्ट फसल का मुआवजा भी मिलना चाहिए। - हाकिम सिंह, ग्राम प्रधान, किसरदा
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महरौनी तहसील के छपरट, गगनियां, चौकी, दिगवार, गुंद्रापुर, पठा, मिदरवाहा, किसरदा, पचौंडा, चक, समोगर, कुरौरा, भौरट, भैरा, सतलींगा, गुमची, बम्हौरी बहादुर सिंह, पड़वा, पाह, बूटी, अजनौरा, बिल्ला, गंगचारी, बनौनी, जरया, कलौथरा, बैरबारा, बजर्रा, सिलावन, टेंनगा आदि गांव वन प्रभाग क्षेत्र छपरट से सटे हुए हैं। जंगली इलाका होने के कारण यहां नीलगायों का आतंक चरम पर है। नील गाय खेतों में चना, मटर व गेहूं की फसल बर्बाद कर देती हैं।
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ऐसे में किसान को फसल बचाने के लिए खेत पर जाग रहे हैं। किसानों का कहना है कि पहले ही प्राकृतिक आपदा के चलते फसल प्रभावित हुई है। अब अन्ना जानवर और नीलगाय फसल बर्बाद कर रहे हैं। सैकड़ों किसानों की रबी की फसल बर्बाद हो चुकी है। इससे आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।
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किसानों का कहना है कि अब तो नीलगाय हमलावर भी हो जाती हैं। कई किसान नीलगाय के हमले से चुटहिल भी हो चुके हैं। नीलगाय के आतंक से त्रस्त किसान कई सालों से वन विभाग के अधिकारियों से वन क्षेत्र में तार बाउंड्री लगवाने की मांग करते चले आ रहे हैं, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। किसानों ने अन्ना जानवर और नीलगायों द्वारा नष्ट हुई फसल का सरकार से मुआवजा दिलाने की मांग की है।
नील गाय से किसान परेशान हैं। रात के अंधेरे में नील गाय का झुंड खेतों में घुस जाता है और फसल को खाकर व रौंदकर नष्ट कर देता है। अब तो दिन में भी नील गाय खेत पर धावा बोल देती हैं। यदि वन क्षेत्र की सीमा पर बारह फीट ऊंची जालीदार तार बाउंड्री लग जाए तो काफी हद तक इस समस्या से निजात मिल सकती हैं। - कुंजन सिंह, किसान, गगनियां गांव
किसानों के लिए नीलगाय और आवारा जानवरों की समस्या नासूर बनती जा रही है। जानवरोंके आतंक से फसल को बचाने के लिए मय परिवार के डेरा खेतों पर ही जमा हुआ है। यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो किसानों को खेती किसानी छोड़ने पर मजबूर होना पड़ेगा। - सुजान सिंह, किसान, गांव किसरदा
क्षेत्र में आवारा जानवर और नीलगाय की समस्या विकराल होती जा रही है। जानवर फसल को काफी क्षति पहुंचा रहे हैं। खेतों की सुरक्षा करना मुश्किल हो रहा है। जनप्रतिनिधियों को भी इससे कोई सरोकार नहीं है। जानवरों द्वारा नष्ट फसल पर सरकार मुआवजा देना सुनिश्चित करे। - अमोलक सिंह, किसान गांव किसरदा
वन क्षेत्र में नीलगायों की तादाद दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। यदि यही स्थिति रही तो आने वाले समय में इनके आतंक से किसानों को गांव भी खाली करना पड़ सकता है। सरकार आवारा जानवरों व जंगली गायों से फसल की सुरक्षा की व्यवस्था कराए। -राघवेंद्र, किसान, समोगर गांव
नीलगाय की समस्या काफी तेजी से बढ़ रही है। सरकार को इसके लिए ठोस उपाय करने चाहिए। यदि सरकार फसल नष्ट करने वाली नीलगायों की नसबंदी करने की योजना बनाती है, तो इससे प्रजनन क्षमता कम होगी। साथ जानवरों द्वारा नष्ट फसल का मुआवजा भी मिलना चाहिए। - हाकिम सिंह, ग्राम प्रधान, किसरदा