{"_id":"6abc1e638e3af6767d0411ae","slug":"launch-of-the-childrens-book-gangi-ka-khoju-lalitpur-news-c-131-1-ltp1001-164135-2026-09-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lalitpur News: बाल साहित्य पुस्तक गंगी का खोजू का विमोचन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lalitpur News: बाल साहित्य पुस्तक गंगी का खोजू का विमोचन
Wed, 30 Sep 2026 01:54 AM IST
झांसी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ललितपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, ललितपुर
Updated Wed, 30 Sep 2026 01:54 AM IST
विज्ञापन
ललितपुर। उत्तर प्रदेश की माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने लखनऊ में साहित्यकार नेहा जैन की बाल साहित्य पुस्तक ‘गंगी का खोजू’ का विमोचन किया। इस अवसर पर लेखिका ने मंत्री को अपनी एक अन्य पुस्तक ‘चंद हिस्से सत्त के रेत की धरा पर’ भी भेंट की।
मंत्री गुलाब देवी ने कहा कि वर्तमान समय में आत्मचिंतन प्रेरित करने वाले साहित्य की आवश्यकता है। उन्होंने ‘गंगी का खोजू’ को बच्चों में नैतिक मूल्यों और मानवीय संस्कारों के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। मंत्री ने यह भी कहा कि बाल साहित्य का सृजन कम हो रहा है, जबकि यह बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में सहायक है। नेहा जैन की यह कृति बच्चों के लिए उपयोगी और मार्गदर्शक साबित हो सकती है। मंत्री ने नेहा जैन के आलेख संग्रह ‘चंद हिस्से सत्त के रेत की धरा पर’ की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक सामाजिक विसंगतियों और दोहरे मापदंडों को सामने लाती है। नेहा जैन के लेखन में जीवन के वास्तविक अनुभवों की स्पष्ट झलक दिखती है। उनका साहित्य सामाजिक सरोकारों का जीवंत दस्तावेज है।
विज्ञापन
मंत्री गुलाब देवी ने कहा कि वर्तमान समय में आत्मचिंतन प्रेरित करने वाले साहित्य की आवश्यकता है। उन्होंने ‘गंगी का खोजू’ को बच्चों में नैतिक मूल्यों और मानवीय संस्कारों के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। मंत्री ने यह भी कहा कि बाल साहित्य का सृजन कम हो रहा है, जबकि यह बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में सहायक है। नेहा जैन की यह कृति बच्चों के लिए उपयोगी और मार्गदर्शक साबित हो सकती है। मंत्री ने नेहा जैन के आलेख संग्रह ‘चंद हिस्से सत्त के रेत की धरा पर’ की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक सामाजिक विसंगतियों और दोहरे मापदंडों को सामने लाती है। नेहा जैन के लेखन में जीवन के वास्तविक अनुभवों की स्पष्ट झलक दिखती है। उनका साहित्य सामाजिक सरोकारों का जीवंत दस्तावेज है।
विज्ञापन