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Lalitpur: जवानी में उम्रकैद से बरी हत्यारोपियों को बुढ़ापे में हवालात, राज खुला तो तत्काल रिहाई के आदेश

Thu, 19 Mar 2026 11:59 AM IST
दीपक महाजन अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क Published by: दीपक महाजन Updated Thu, 19 Mar 2026 11:59 AM IST
सार

जब पुराने मामलों की सुनवाई शुरू हुई तो राज खुला। पता लगा कि पुलिस हिरासत में अदालत में पेश बुजुर्ग 39 साल पहले ही दोषमुक्त हो चुके हैं।
 

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Lalitpur: Murder accused acquitted of life imprisonment in their youth are locked up in old age
कोर्ट (प्रतीकात्मक फोटो) - फोटो : एएनआई

विस्तार

बाबुओं (लिपिक) की गलती के कारण 39 साल पहले जवानी में उम्रकैद से बरी दो हत्यारोपियों को बुढ़ापे में हवालात मिली। राज खुला तो बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उन्हें तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है।
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यह आदेश न्यायमूर्ति चंद्र धारी सिंह, न्यायमूर्ति देवेंद्र सिंह प्रथम की खंडपीठ ने ललितपुर निवासी शिवचरण और हजारी लाल की 39 साल पुरानी अपील पर सुनवाई करते हुए दिया है। गैर जमानती वारंट पर दोनों को ललितपुर पुलिस ने गिरफ्तार कर कोर्ट में हाजिर किया था।
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मामला ललितपुर के पूराकलां थाना क्षेत्र का है। 1986 में ट्रायल कोर्ट से हत्या में मिली उम्रकैद को शिवचरण, हजारी लाल, जगन्नाथ व सरदार सिंह ने दो अलग-अलग आपराधिक अपील में चुनौती दी थी। 16 नवंबर 1987 को हाईकोर्ट की एक अन्य खंडपीठ ने सभी को निर्दोष पाते हुए बरी कर दिया था।
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फाइलों में दब गया इन्साफ
हैरानी की बात यह रही कि 1987 में सुनाया गया दोषमुक्ति का फैसला कोर्ट के रिकॉर्ड में सही ढंग से दर्ज ही नहीं हो पाया। तब से अब तक अभिलेखों में केस लंबित दिखता रहा। हाल ही में जब यह पुराना मामला दोबारा लिस्ट हुआ और वकील पेश नहीं हुए तो कोर्ट ने फरवरी 2026 में दोनों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया। इसके बाद पुलिस ने दोनों बुजुर्गों को गिरफ्तार कर लिया और कोर्ट में पेश किया।



सुनवाई के दौरान खुला राज
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि शिवचरण, हजारी लाल की ओर से दाखिल अपील का फैसला दूसरे आरोपियों जगन्नाथ व सरदार सिंह की अपील में पारित फैसलों में दर्ज था। लेकिन, लिपिकीय त्रुटि के कारण वह दूसरी फाइल में वह आदेश दर्ज नहीं हुआ। इसके कारण शिवचरण और हजारी लाल की फाइल लंबित मामलों की श्रेणी में शामिल हो गई। जब पुराने मामलों की सुनवाई शुरू हुई तो राज खुला। पता लगा कि पुलिस हिरासत में अदालत में पेश बुजुर्ग 39 साल पहले ही दोषमुक्त हो चुके हैं।


यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि रजिस्ट्री के बाबुओं और वकीलों की चूक के कारण उन लोगों को हिरासत में लिया गया, जो दशकों पहले बरी हो चुके थे।
-इलाहाबाद हाईकोर्ट
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