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Lalitpur News: क्षत्रिय महासभा ने मनाया महाराणा प्रताप का जन्मोत्सव
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। अखिल भरतीय क्षत्रिय महासभा ने मेवाड़ नरेश महाराजा महाराणा प्रताप का प्रकट दिवस मनाया। वक्ताओं ने उनके शौर्य व पराक्रम की कहानियां लोगों को बताईं।
जिलाध्यक्ष बृजेंद्र सिंह परमार ने कहा कि 9 मई 1540 को राजस्थान के कुंभलगढ़ में उनका जन्म हुआ था। वह मेवाड़ के 13वें राजा थे। राघवेंद्र सिंह बघेल ने कहा कि महाराणा प्रताप की वीरता जगजाहिर है। उनके एक पुत्र तेज सिंह एवं पुत्री का नाम तारा था। कुछ दिनों महाराणा प्रताप ने जंगलों में घास की रोटी खाई। परिवार की चिंता न करते हुए उन्होंने भील आदिवासियों एवं लोगड़िया लुहार को साथ लेकर मुगलों को धूल चटाई।
जिला महामंत्री भगवत सिंह बैस ने कहा कि 1576 में हल्दीघाटी का युद्ध मेवाड़ के राणा प्रताप सिंह और मुगल सम्राट अकबर की सेना के बीच लड़ा गया था। मुगलों को उन्होंने करारी मात दी। महाराणा प्रताप को एक बार उनके ही अपनों की दोगली नीति से हार का सामना करना पड़ा था। बैठक में धर्मेंद्र सिंह राठौड़, चंद्रपाल सिंह परमार, धर्मेंद्र सिंह परमार, भूपेंद्र सिंह तोमर, बॉबी राजा, बबलू राजा आदि मौजूद रहे।
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ललितपुर। अखिल भरतीय क्षत्रिय महासभा ने मेवाड़ नरेश महाराजा महाराणा प्रताप का प्रकट दिवस मनाया। वक्ताओं ने उनके शौर्य व पराक्रम की कहानियां लोगों को बताईं।
जिलाध्यक्ष बृजेंद्र सिंह परमार ने कहा कि 9 मई 1540 को राजस्थान के कुंभलगढ़ में उनका जन्म हुआ था। वह मेवाड़ के 13वें राजा थे। राघवेंद्र सिंह बघेल ने कहा कि महाराणा प्रताप की वीरता जगजाहिर है। उनके एक पुत्र तेज सिंह एवं पुत्री का नाम तारा था। कुछ दिनों महाराणा प्रताप ने जंगलों में घास की रोटी खाई। परिवार की चिंता न करते हुए उन्होंने भील आदिवासियों एवं लोगड़िया लुहार को साथ लेकर मुगलों को धूल चटाई।
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जिला महामंत्री भगवत सिंह बैस ने कहा कि 1576 में हल्दीघाटी का युद्ध मेवाड़ के राणा प्रताप सिंह और मुगल सम्राट अकबर की सेना के बीच लड़ा गया था। मुगलों को उन्होंने करारी मात दी। महाराणा प्रताप को एक बार उनके ही अपनों की दोगली नीति से हार का सामना करना पड़ा था। बैठक में धर्मेंद्र सिंह राठौड़, चंद्रपाल सिंह परमार, धर्मेंद्र सिंह परमार, भूपेंद्र सिंह तोमर, बॉबी राजा, बबलू राजा आदि मौजूद रहे।
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