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आंकड़े बाजी की बाजीगरी में फंसा किसानों को बीमा क्लेम
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- फोटो : kisan.jpg
वललितपुर। वर्ष 2019 में नष्ट हुई खरीफ की फसल का बीमा क्लेम भुगतान विभागीय आंकड़ों की बाजीगरी में फंस गया है। जहां विभागीय अधिकारी लगभग 4500 किसानों को बीमा क्लेम से वंचित बता रहे हैं, वहीं किसान संगठन 15 से 20 हजार किसानों को बीमा से वंचित होने की बात कर रहे। ऐसे में किसानों का बीमा क्लेम भुगतान नहीं हो पा रहा है। किसान लगातार क्लेम की मांग को लेकर अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, जहां मायूसी हाथ लग रही है।
एक ओर उत्तर प्रदेश सरकार चार वर्ष पूरे होने पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर रही है, गोष्ठियों में किसानों को योजनाएं गिनाई जा रहीं है लेकिन यहां किसानों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के चलते किसानों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। जिले में प्रधानमंत्री फसल बीमा क्लेम भुगतन को लेकर बनी हुई है। जिले में वर्ष 2019 में खरीफ की फसल कटाई के दस दिन पहले लगातार हुई बारिश से नष्ट हो गई थी। जिसकी जांच केंद्र व राज्य सरकार की टीमों द्वारा की गई थी। जिसमें 70 प्रतिशत से अधिक नुकसान होना आंका गया था।
इस दौरान 1 लाख 51 हजार किसानों ने खरीफ की फसल का बीमा कराया था। जिसमें अब तक लगभग 15 हजार से अधिक किसानों को बीमा क्लेम का भुगतान नहीं हो सका है। अब क्लेम भुगतान का मामला आंकड़ों की बाजीगरी में फंस कर रह गया है। इसमें अधिकारी एक लाख 40 हजार किसानों को बीमा क्लेम भुगतान होने का दावा कर रहे हैं लेकिन किसान संगठन विभागीय आंकड़ों को गलत बता रहे हैं। विभाग का कहना है कि 4500 किसान बीमा क्लेम से वंचित हैं। जबकि किसान संगठन 15 से 20 हजार किसानों को क्लेम से वंचित बता रहे हैं। ऐसे में किसान बीमा के लिए परेशान हो रहा है। जबकि जिम्मेदार उदासीनता बरत रहे हैं।
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वर्ष 2019 खरीफ फसल केे बीमा क्लेम को लेकर अधिकारी स्थित स्पष्ट नहीं कर पा रहे हैं। अब भी लगभग 20 हजार से अधिक किसान बीमा क्लेम से वंचित हैं। बाबूलाल दुबे
अध्यक्ष प्रगतिशील किसान जन मोर्चा
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बीमा क्लेम भुगतान को लेकर किसानों को लगातार गुमराह किया जा रहा है। अधिकारियों के चक्कर काट कर परेशान हो रहे हैं। रंजीत यादव, जिलाध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन
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एक ओर उत्तर प्रदेश सरकार चार वर्ष पूरे होने पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर रही है, गोष्ठियों में किसानों को योजनाएं गिनाई जा रहीं है लेकिन यहां किसानों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के चलते किसानों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। जिले में प्रधानमंत्री फसल बीमा क्लेम भुगतन को लेकर बनी हुई है। जिले में वर्ष 2019 में खरीफ की फसल कटाई के दस दिन पहले लगातार हुई बारिश से नष्ट हो गई थी। जिसकी जांच केंद्र व राज्य सरकार की टीमों द्वारा की गई थी। जिसमें 70 प्रतिशत से अधिक नुकसान होना आंका गया था।
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इस दौरान 1 लाख 51 हजार किसानों ने खरीफ की फसल का बीमा कराया था। जिसमें अब तक लगभग 15 हजार से अधिक किसानों को बीमा क्लेम का भुगतान नहीं हो सका है। अब क्लेम भुगतान का मामला आंकड़ों की बाजीगरी में फंस कर रह गया है। इसमें अधिकारी एक लाख 40 हजार किसानों को बीमा क्लेम भुगतान होने का दावा कर रहे हैं लेकिन किसान संगठन विभागीय आंकड़ों को गलत बता रहे हैं। विभाग का कहना है कि 4500 किसान बीमा क्लेम से वंचित हैं। जबकि किसान संगठन 15 से 20 हजार किसानों को क्लेम से वंचित बता रहे हैं। ऐसे में किसान बीमा के लिए परेशान हो रहा है। जबकि जिम्मेदार उदासीनता बरत रहे हैं।
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वर्ष 2019 खरीफ फसल केे बीमा क्लेम को लेकर अधिकारी स्थित स्पष्ट नहीं कर पा रहे हैं। अब भी लगभग 20 हजार से अधिक किसान बीमा क्लेम से वंचित हैं। बाबूलाल दुबे
अध्यक्ष प्रगतिशील किसान जन मोर्चा
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बीमा क्लेम भुगतान को लेकर किसानों को लगातार गुमराह किया जा रहा है। अधिकारियों के चक्कर काट कर परेशान हो रहे हैं। रंजीत यादव, जिलाध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन