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खेत पर मालिकाना हक पाने को जूझ रहे किसान

Mon, 23 Apr 2018 12:39 AM IST
amarujala
amarujala Updated Mon, 23 Apr 2018 12:39 AM IST
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khet pr malikhana hk pane ko jhuj
former, lalitpur news - फोटो : demo
शासन द्वारा बुंदेलखंड के पथरीले एवं बंजर इलाके के किसानों को वर्ग तीन से वर्ग दो बनाने के फरमान का कुछ राजस्व कर्मचारियों पर कोई असर नहीं दिख रहा है। वह गांव में सक्रिय दलालों के माध्यम से किसानों से जमकर वसूली कर रहे है। इन जमीनों पर किसान मालिकाना हक पाने के लिए कई सालों से जूझ रहे है।
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प्रदेश में तालबेहट, ललितपुर एवं मिर्जापुर जिले में ही अधिक मात्रा में वर्ग तीन की भूमि काश्तकारों के नाम दर्ज है। उद्योग रहित इस जनपद में लगभग 14312 हेक्टेअर भूमि पर लगभग 32166 किसान खेती कर अपनी परिवार का भरण पोषण कर रहें है। वहीं, कई सालों से प्राकृतिक आपदा का दंश भी यहां के किसानों को झेलना पड़ रहा है। यहां के किसानों ने कई बार वर्ग तीन से वर्ग एक भूमिधर के अधिकार दिलाने के लिए समय समय पर अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई। जिले के वरिष्ठ अधिवक्ता ओम प्रकाश श्रीवास्तव ने न्यायालय तक दस्तक दी। जिसके बाद सरकार ने वर्ग तीन से वर्ग एक के स्थान पर वर्ग दो वर्ग बनाने के निर्देश जारी किए, जो जनपद के किसानों के साथ सौतेला व्यवहार है।  
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राजस्व अधिकारियों के निर्देश के बावजूद राजस्व कर्मचारियों ने पहले काफी धीमी गति से कार्य शुरू किया। बाद में जब शासन से इसकी समीक्षा हुई तो राजस्व कर्मचारियों ने सूची बनाने का काम युद्ध स्तर पर शुरू किया। इसमें कुछ राजस्व कर्मचारियों ने किसानों को उनकी जमीन सिलिंग में निकलने से बचाने के नाम पर, तो कही अधिकारियों को नजराना देने के और कही जमीन पर वाद विचाराधीन होने के नाम पर जमकर लूट रहे है। इस कार्य में कुछ गांवों में लेखपाल दलालों एवं ग्राम प्रधानों के माध्यम से पैसा वसूल रहे है।   
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लेखपाल नहीं मानें तो होगी कार्रवाई
तालबेहट। मंगलवार को लेखपालों की बैठक ली जा रही है। जिसमें इस विषय पर चर्चा होगी। इसके बाद भी यदि लेखपालों की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं होगा तो अवश्य कार्रवाई की जाएगी। किसानों के हितों का किसी भी दशा में हनन नहीं होने दिया जाएगा।
पदम सिंह, एसडीएम तालबेहट

सात दशक से है परेशान
तालबेइट। इस संबंध में क्षेत्र के अधिकांश किसानों का कहना है कि वह उक्त भूमि पर वह मालिकाना हक पाने के लिए पिछलें सात दशकों से परेशान है। जिसके चलते वह उक्त भूमि पर  न तो किसान क्रेडिट कार्ड बनवा सकते है और न ही उस पर ऋण लेने के लिए पात्र है। इसके अलावा वह उक्त भूमि का बॅटबारा भी नहीं करवा सकते। जिसके चलते सहकाश्तकारों में जो प्रभावशाली होता है वह अन्य किसानों के हिस्से की भूमि पर काबिज होकर किसानी करता है।


कानून की अनदेखी की गई
तालबेहट। इस संबंध में नगर के कई अधिवक्ताओं का मानना है कि जमींदारी हटने के बाद इन किसानों को सीरदार के अधिकार मिलना चाहिए थे परन्तु उस समय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने कानून की अनदेखी करते हुए वर्ग 2 के स्थान पर वर्ग 3 के रूप में दर्ज कर दिया जो किसानो के साथ धोखा है। उनके अनुसार यदि उस समय उन्हें सीरदार श्रेणी दो दर्ज कर दिया जाता तो वह सन 1976 के अनुसार वह अभी तक भूमिधर हो जातें।
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