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जिले के 132 विद्यालयों का ही हो पाया कायाकल्प
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प्राथमिक विद्यालय नई बस्ती देहरे बाबा का भवन(कायाकल्प योजना)
- फोटो : LALITPUR
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ललितपुर। तमाम प्रयासों के बाद भी जिले के केवल 132 परिषदीय विद्यालयों को ही बुनियादी सुविधाओं से लैस किया जा सका है। कायाकल्प योजना के तहत शासन ने 14 पैरामीटर्स निर्धारित किए हैं, इसके मुताबिक ही विद्यालयों में निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। कई ग्राम पंचायतें बजट की कमी के चलते इन कार्यों को पूरा नहीं करा पाई हैं, जिस कारण अनेक विद्यालयों में कार्य अधूरे पड़े हैं।
परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों की सुविधाओं को ध्यान में रखकर कायाकल्प योजना चलाई जा रही है। इसके अंतर्गत विद्यालयों में निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। इनमें शुद्ध एवं सुरक्षित पेयजल, बालक शौचालय, बालिका शौचालय, दिव्यांग सुलभ शौचालय, रसोईघर का टाइलीकरण, कक्षों की फर्श का टाइलीकरण, विद्यालय परिसर में दिव्यांग सुलभ रैंप एवं रैलिंग, विद्यालय का विद्युत संयोजन, शौचालय, मूत्रालय में नल जल आपूर्ति, मल्टीपल हैंड वाशिंग यूनिट, श्यामपट्ट, विद्यालय की समुचित रंगाई, पुताई, कक्षों में उपयुक्त वायरिंग और विद्युत उपकरण शामिल हैं। इन चौदह पैरामीटर पर जिले के 132 विद्यालय ही खरे उतरे हैं। अन्य विद्यालयों में कोई न कोई कमी रह गए हैं, जिस वजह से ऐसे विद्यालयों को कायाकल्प योजना में पूर्ण नहीं माना गया है।
जिले में इतने हैं विद्यालय
जिले में 1353 परिषदीय विद्यालय हैं, इनमें 862 प्राथमिक विद्यालय, 319 पूर्व माध्यमिक विद्यालय, 172 कंपोजिट विद्यालय संचालित हैं।
ग्राम की सड़क, नाली पर रहा ध्यान
ग्राम प्रधानों ने गांव की सड़क, नाली के निर्माण को वरीयता दी। इसकी वजह एक यह भी रही कि वर्तमान वर्ष में पंचायत चुनाव होने जा रहे हैैं। इससे विद्यालय के कई कार्य पिछड़ गए।
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शासन ने कायाकल्प के अंतर्गत चौदह पैरामीटर तय किए हैं। अधिकांश विद्यालयों में दिव्यांग सुलभ शौचालय पूर्ण होने हैं। इस वजह से कई विद्यालय सूची में शामिल नहीं हो पाए हैं।
रामप्रवेश, बीएसए
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परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों की सुविधाओं को ध्यान में रखकर कायाकल्प योजना चलाई जा रही है। इसके अंतर्गत विद्यालयों में निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। इनमें शुद्ध एवं सुरक्षित पेयजल, बालक शौचालय, बालिका शौचालय, दिव्यांग सुलभ शौचालय, रसोईघर का टाइलीकरण, कक्षों की फर्श का टाइलीकरण, विद्यालय परिसर में दिव्यांग सुलभ रैंप एवं रैलिंग, विद्यालय का विद्युत संयोजन, शौचालय, मूत्रालय में नल जल आपूर्ति, मल्टीपल हैंड वाशिंग यूनिट, श्यामपट्ट, विद्यालय की समुचित रंगाई, पुताई, कक्षों में उपयुक्त वायरिंग और विद्युत उपकरण शामिल हैं। इन चौदह पैरामीटर पर जिले के 132 विद्यालय ही खरे उतरे हैं। अन्य विद्यालयों में कोई न कोई कमी रह गए हैं, जिस वजह से ऐसे विद्यालयों को कायाकल्प योजना में पूर्ण नहीं माना गया है।
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जिले में इतने हैं विद्यालय
जिले में 1353 परिषदीय विद्यालय हैं, इनमें 862 प्राथमिक विद्यालय, 319 पूर्व माध्यमिक विद्यालय, 172 कंपोजिट विद्यालय संचालित हैं।
ग्राम की सड़क, नाली पर रहा ध्यान
ग्राम प्रधानों ने गांव की सड़क, नाली के निर्माण को वरीयता दी। इसकी वजह एक यह भी रही कि वर्तमान वर्ष में पंचायत चुनाव होने जा रहे हैैं। इससे विद्यालय के कई कार्य पिछड़ गए।
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शासन ने कायाकल्प के अंतर्गत चौदह पैरामीटर तय किए हैं। अधिकांश विद्यालयों में दिव्यांग सुलभ शौचालय पूर्ण होने हैं। इस वजह से कई विद्यालय सूची में शामिल नहीं हो पाए हैं।
रामप्रवेश, बीएसए