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बस स्टैंड के लिए नहीं हो सकी जमीन चिह्नित

Wed, 04 Jan 2017 01:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 04 Jan 2017 01:36 AM IST
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 Just could not stand to identify land
parking, lalitpur news - फोटो : demo
शहर के बीचोंबीच मुहल्ला घुसयाना में संचालित हो रहे अंतर्राज्यीय बस अड्डा से यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है। बस अड्डा के विकास में एमईएस हमेशा रोड़ा बनता आता आया है। बस अड्डा को बीच शहर से बाहर स्थापित कराने के लिए डीएम ने हवाई पट्टी के पास नजूल की जमीन को चिह्नित करने के लिए बीते मार्च माह में एसडीएम को निर्देशित किया था। एक वर्ष बीतने वाला है, लेकिन अभी तक जमीन का चिह्निकरण नहीं हो पाया है, जिससे हालात जस के तस बने हुए हैं।
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शहर के मुहल्ला घुसयाना में संचालित हो रहा संत कबीरदास बस अड्डा शहर का इकलौता बस स्टैंड है और इसे अंतर्राज्जीय बस अड्डा का दर्जा प्राप्त है। यहां से प्रतिदिन डेढ़ सौ से अधिक बसों का संचालन किया जाता है, लेकिन बीच शहर में स्थित होने के कारण नागरिकों को सड़कों पर जाम लगने और सड़क हादसों जैसी समस्याओं के जूझना पड़ता है। करीब एक वर्ष पूर्व मुहल्ला घुसयाना में ही रहने वाले एक मासूम छात्र को स्कूल जाते समय बस से रौंद दिया था, जिसमें बालक का एक पैर कट गया था। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों की मांग पर डीएम डा. रुपेश कुमार ने बस अड्डा को शहर सीमा से बाहर स्थापित कराने का निर्णय लिया था। उन्होंने मार्च माह की शुरुआत में सदर उपजिलाधिकारी रमेश चंद्र को निर्देशित करके गल्ला मंडी के आगे स्थित हवाई पट्टी के पास नजूल की जमीन को चिह्नित करके जल्द ही रिपोर्ट प्रेषित करने के निर्देश दिए थे।
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डीएम के निर्देशों को करीब एक वर्ष बीतने वाला है, लेकिन अभी तक बस अड्डा के लिए शहर के बाहर जमीन चिह्नित नहीं की जा सकी है। मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है, जिससे शहरवासियों को आज भी भारी ट्रैफिक की स्थिति का हर रोज सामना करना पड़ता है। बसों के संचालन वाले मार्गों पर जैसे अभिलाषा पेट्रोल पंप चौराहा, राजकीय पुस्तकालय चौराहा, जेल चौराहा, बयाना नाला, इलाईट चौराहा मुख्य स्थलों पर सबसे अधिक जाम की स्थिति बनती है और सड़क हादसे की भी हमेशा संभावना बनी रहती है।
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इसके अलावा बेलगाम टैक्सी चालक भी इन बसों की सवारी को अपने टैक्सी में बैठाने की होड़ में चौराहों और सड़कों पर जमा लगा देते हैं। इस होड़ में कई राहगीर इन बेलगाम टैक्सियों की चपेट में आकर दुर्घटना का शिकार बन जाते हैं। यदि बस स्टैंड को शहर के बाहर स्थापित कर दिया जाए तो नागरिकों को जाम से राहत मिल सकेगी और साथ ही शहर में भरमार हो चुकी टैक्सियों के सीमित हो चुके क्षेत्र में भी बढ़ोत्तरी होगी।

मिल सकेगी मूलभूत सुविधाएं
शहर का बस स्टैंड केवल नाम के लिए ही अंतर्राज्जीय बस अड्डा है। वर्तमान में जिस जगह बस स्टैंड संचालित हो रहा है, वहां मूलभूत सुविधाओं का जमकर टोटा है। केवल सीसी कंक्रीट से बने मैदान पर ही बस अड्डा संचालित हो रहा है, न सुरक्षा के लिए यहां चाहरदीवारी है और न ही यात्रियों की सुविधा के प्रतीक्षालय, टिकट घर और केंटीन की कोई सुविधा उपलब्ध है। इस बस अड्डा के आसपास की जमीन एमईएस की है, जो यहां के विकास में हमेशा रोड़ा बनती है। यदि बस अड्डा को नजूल की जमीन पर स्थापित कर दिया जाए तो हो सकता है आने वाले दिनों में यात्रियों को कड़ाके की सर्दी, धूप व बरसात से बचाव के लिए प्रतीक्षालय, टिकट घर, शौचालय, पेयजल आदि मूलभूत सुविधाएं जिला प्रशासन व नगर पालिका या शासन द्वारा उपलब्ध कराई जा सकती हैं।

अतिक्रमण का सहारा
वैसे तो अतिक्रमण से हमेशा ही असुविधाएं होती है, लेकिन स्थानीय बस स्टैंड अवैध अतिक्रमण व कब्जा करके संचालित हो रही अस्थाई दुकानें, होटले, लकड़ी-लोहे के खोखे ही बस अड्डा पर एक दिन में आने वाले हजारों यात्रियों के लिए बहुत बड़ा सहारा है। इन पर बिकने वाला खाद्य पदार्थ यात्रियों की भूख तो मिटाता ही साथ ही सर्दी, बरसात और धूप से बचने के लिए बस स्टैंड पर केवल इन्हीं का सहारा है।

पुलिस बूथ बना शोपीस
वर्तमान बस स्टैंड पर चारदीवारी के साथ-साथ बैरीकेडिंग की कोई व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण बस चालक मनमर्जी से बसों को कहीं भी खड़ा कर देते हैं। विगत वर्ष स्कूली छात्र के साथ हुई दुर्घटना के बाद जिला प्रशासन के निर्देशन पर बसों को व्यवस्थित खड़ा कराने व टैक्सियों पर लगाम कसने के लिए पुलिस बूथ बनाया गया था। इसमें कोतवाली पुलिस के सिपाही को नियुक्त किया गया था, शुरुआत में तो इस बूथ पर सिपाई ड्यूटी करते दिखाई दिए लेकिन इसके बाद यह बूथ मात्र शोपीस बन कर रह गया है।


जल्द होगा जमीन का चिह्निकरण
इस संबंध में सदर एसडीएम रमेश चंद्र ने बताया कि जल्द की जमीन का चिह्निकरण किया जाएगा। यदि बस स्टैंड के लिए शहर की सीमा पर नजूल की जमीन उपलब्ध नहीं होगी तो ग्राम सभा की जमीन को उपलब्ध कराने की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
रमेश चंद्र
सदर उपजिलाधिकारी, ललितपुर।
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