{"_id":"57362bd74f1c1b6d0c919a0f","slug":"jobber-with-a-price-to-lure-more-farmers","type":"story","status":"publish","title_hn":"अधिक दाम देकर किसानों को लुभा रहे आढ़तिया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अधिक दाम देकर किसानों को लुभा रहे आढ़तिया
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 14 May 2016 01:02 AM IST
विज्ञापन
anaz, lalitpur news
- फोटो : demo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ललितपुर। सूखे की मार झेल रहे बुंदेलखंड में कम उत्पादन की मार किसानों के साथ-साथ सरकारी गेहूं क्रय केंद्रों पर भी पड़ रही है। क्रय केंद्र 5.50 लाख क्विंटल लक्ष्य के मुकाबले अब तक 1.88 लाख क्विंटल हुई गेहूं की खरीद हुई है। क्रय केंद्रों पर किसानों को 1525 रुपये प्रति क्विंटल दिए जा रहे हैं, जबकि मंडी के आढ़तिया 1600 से 200 रुपये प्रति क्विंटल देकर किसानों को लुभा रहे हैं। गेहूं खरीद लक्ष्य से 3.61 लाख क्विंटल पीछे होने के कारण अफसरों के माथे पर शिकन है।
जनपद में 98 सरकारी क्रय केंद्र खोले गए हैं, जिनके माध्यम से सरकारी दरों पर गेहूं खरीद की जा रही है। इसके लिए पर्याप्त गोदामों की व्यवस्था कर ली गई, लेकिन इस बार सूखा के कारण किसानों की आर्थिक स्थिति काफी खराब है। इस बार सरकार द्वारा 5.50 लाख क्विंटल गेहूं की खरीद का लक्ष्य दिया गया है।
गेहूं का इस बार सरकारी रेट पर 1,525 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। लेकिन, गल्ला मंडी में आढ़तियों द्वारा 1,600 रुपये से लेकर दो हजार रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीद हो रही है। इस कारण सूखा से तंगहाल किसान सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने को तैयार नहीं हैं। सरकारी क्रय केंद्रों पर अब तक कुल 1.88 लाख क्विंटल खरीद लगभग 28.73 करोड़ रुपये में हुई है। पीसीएफ ने दो दिन पूर्व तक 93.130 क्विंटल गेहूं करीब 14.18 करोड़ रुपये से खरीदा था।
विज्ञापन
डिप्टी आरएमओ संजय श्रीवास्तव ने बताया कि अब तक 1.13 करोड़ रुपये बकाया है, जिसे आरटीजीएस के माध्यम से किसानों तक पहुंचाया जा रहा है। जनपद के अधिकांश किसान सरकारी केंद्रों पर गेहूं न ले जाकर प्राइवेट आढ़तियों की दुकानों पर बेच रहे हैं।
इससे क्रय केंद्र प्रभारी चिंतित हैं और किसी भी प्रकार लक्ष्य के करीब पहुंचने की योजना तैयार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एफसीआई, पीसीएफ एवं मंडी सचिव स्तर पर क्रय केंद्र प्रभारियों पर शिकंजा कसने की रणनीति तैयार कर लक्ष्य पूरा करने की कवायद तेज कर दी है।
विज्ञापन
जनपद में 98 सरकारी क्रय केंद्र खोले गए हैं, जिनके माध्यम से सरकारी दरों पर गेहूं खरीद की जा रही है। इसके लिए पर्याप्त गोदामों की व्यवस्था कर ली गई, लेकिन इस बार सूखा के कारण किसानों की आर्थिक स्थिति काफी खराब है। इस बार सरकार द्वारा 5.50 लाख क्विंटल गेहूं की खरीद का लक्ष्य दिया गया है।
विज्ञापन
गेहूं का इस बार सरकारी रेट पर 1,525 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। लेकिन, गल्ला मंडी में आढ़तियों द्वारा 1,600 रुपये से लेकर दो हजार रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीद हो रही है। इस कारण सूखा से तंगहाल किसान सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने को तैयार नहीं हैं। सरकारी क्रय केंद्रों पर अब तक कुल 1.88 लाख क्विंटल खरीद लगभग 28.73 करोड़ रुपये में हुई है। पीसीएफ ने दो दिन पूर्व तक 93.130 क्विंटल गेहूं करीब 14.18 करोड़ रुपये से खरीदा था।
विज्ञापन
डिप्टी आरएमओ संजय श्रीवास्तव ने बताया कि अब तक 1.13 करोड़ रुपये बकाया है, जिसे आरटीजीएस के माध्यम से किसानों तक पहुंचाया जा रहा है। जनपद के अधिकांश किसान सरकारी केंद्रों पर गेहूं न ले जाकर प्राइवेट आढ़तियों की दुकानों पर बेच रहे हैं।
इससे क्रय केंद्र प्रभारी चिंतित हैं और किसी भी प्रकार लक्ष्य के करीब पहुंचने की योजना तैयार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एफसीआई, पीसीएफ एवं मंडी सचिव स्तर पर क्रय केंद्र प्रभारियों पर शिकंजा कसने की रणनीति तैयार कर लक्ष्य पूरा करने की कवायद तेज कर दी है।