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खास से ‘आम’ बनी झांसी संसदीय सीट
Tue, 09 Apr 2019 01:00 AM IST
Pragyan dubey
lalitpur
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Published by: Pragyan dubey
Updated Tue, 09 Apr 2019 01:00 AM IST
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प्रशासन
- फोटो : amar ujala
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ललितपुर। झांसी संसदीय क्षेत्र अबकी बार ‘खास’ नहीं बल्कि ‘आम’ हो गया है। लगातार 10 साल तक केंद्रीय मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व करने वाला यह क्षेत्र वीआईपी श्रेणी में शुमार था, लेकिन अबकी बार ऐसा कोई बड़ा चेहरा चुनाव मैदान में नहीं है।
2009 में कांग्रेस के टिकट पर दिल्ली पहुंचे प्रदीप जैन ‘आदित्य’ पहली बार चुनाव जीते थे। राहुल गांधी के करीबी और युवा होने के कारण उनमें कुछ नया कर गुजरने का जज्बा देखकर तत्कालीन डॉ. मनमोहन सिंह सरकार में केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई। बुंदेलखंड से पहली बार उन्हें केंद्र सरकार में इतना बड़ा प्रतिनिधित्व मिला था। इसी का नतीजा था कि झांसी-ललितपुर संसदीय क्षेत्र वीआईपी श्रेणी में शुमार हो गया। उनके कार्यकाल में ही देश के दूसरे केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय और रेल नीर प्लांट की सौगात संसदीय क्षेत्र को मिली थी। अन्य विकास कार्य भी कराए थे, लेकिन केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय बहुत बड़ी सौगात थी। केंद्र सरकार ने बुंदेलखंड की बदहाली दूर करने के लिए विशेेष पैकेज भी दिया था।
इसके बाद हुए लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लहर चली और उमा भारती सांसद बन गईं। चूंकि उमा भारती भाजपा में बड़ा नाम था और पहले अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री रह चुकीं थीं, इसलिए माना जा रहा था कि वह दोबारा मंत्रिमंडल में शामिल होंगी और हुआ भी यही। पहले उन्हें जल संसाधन और नदी विकास मंत्रालय दिया गया, इसके बाद पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। उनके कार्यकाल की बड़ी उपलब्धि डिफेंस कॉरिडोर है, जिससे आने वाले समय में बुंदेलखंड की तस्वीर बदल जाएगी। उन्होंने पहूज नदी को गोद लिया, जिससे उम्मीद जागी थी कि नदी साफ-सुथरी हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। उनके कार्यकाल में कई सड़कों का सुधार किया गया, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों का सफर आरामदायक हो गया।
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वीआईपी क्षेत्र होने के नाते तत्कालीन समाजवादी पार्टी की सरकार में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ललितपुर में रोडवेज डिपो की सौगात दी, जो बहुत बड़ी उपलब्धि थी। झांसी शहर को बी-2 श्रेणी का दर्जा दिया गया। लेकिन, अबकी बार तीनों प्रमुुख प्रत्याशी पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। इसमें भारतीय जनता पार्टी से अनुराग शर्मा, समाजवादी व बहुजन समाज पार्टी गठबंधन से पूर्व एमएलसी श्याम सुंदर सिंह और कांग्रेस व जन अधिकार पार्टी से एडवोकेट शिवचरण कुशवाहा किस्मत आजमा रहे हैं।
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2009 में कांग्रेस के टिकट पर दिल्ली पहुंचे प्रदीप जैन ‘आदित्य’ पहली बार चुनाव जीते थे। राहुल गांधी के करीबी और युवा होने के कारण उनमें कुछ नया कर गुजरने का जज्बा देखकर तत्कालीन डॉ. मनमोहन सिंह सरकार में केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई। बुंदेलखंड से पहली बार उन्हें केंद्र सरकार में इतना बड़ा प्रतिनिधित्व मिला था। इसी का नतीजा था कि झांसी-ललितपुर संसदीय क्षेत्र वीआईपी श्रेणी में शुमार हो गया। उनके कार्यकाल में ही देश के दूसरे केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय और रेल नीर प्लांट की सौगात संसदीय क्षेत्र को मिली थी। अन्य विकास कार्य भी कराए थे, लेकिन केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय बहुत बड़ी सौगात थी। केंद्र सरकार ने बुंदेलखंड की बदहाली दूर करने के लिए विशेेष पैकेज भी दिया था।
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इसके बाद हुए लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लहर चली और उमा भारती सांसद बन गईं। चूंकि उमा भारती भाजपा में बड़ा नाम था और पहले अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री रह चुकीं थीं, इसलिए माना जा रहा था कि वह दोबारा मंत्रिमंडल में शामिल होंगी और हुआ भी यही। पहले उन्हें जल संसाधन और नदी विकास मंत्रालय दिया गया, इसके बाद पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। उनके कार्यकाल की बड़ी उपलब्धि डिफेंस कॉरिडोर है, जिससे आने वाले समय में बुंदेलखंड की तस्वीर बदल जाएगी। उन्होंने पहूज नदी को गोद लिया, जिससे उम्मीद जागी थी कि नदी साफ-सुथरी हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। उनके कार्यकाल में कई सड़कों का सुधार किया गया, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों का सफर आरामदायक हो गया।
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वीआईपी क्षेत्र होने के नाते तत्कालीन समाजवादी पार्टी की सरकार में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ललितपुर में रोडवेज डिपो की सौगात दी, जो बहुत बड़ी उपलब्धि थी। झांसी शहर को बी-2 श्रेणी का दर्जा दिया गया। लेकिन, अबकी बार तीनों प्रमुुख प्रत्याशी पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। इसमें भारतीय जनता पार्टी से अनुराग शर्मा, समाजवादी व बहुजन समाज पार्टी गठबंधन से पूर्व एमएलसी श्याम सुंदर सिंह और कांग्रेस व जन अधिकार पार्टी से एडवोकेट शिवचरण कुशवाहा किस्मत आजमा रहे हैं।