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संस्कारों एवं नैतिक मूल्यों की स्थापना को भगवत नाम जप आवश्यक: राजेंद्र दास
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ग्राम लड़वारी धर्म सभा का आयोजन करते जगत गुरू राजेन्द्रदास देवाचार्य महाराज
- फोटो : LALITPUR
बार (ललितपुर)। ग्राम बार में जगतगुरु मलूकपीठाधीश्वर देवाचार्य राजेंद्र दास महाराज का मंगल आगमन हुआ। उन्होंने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि आज की पीढ़ी संस्कार विहीन होकर पाश्चात्य संस्कृति का अंधानुकरण कर रही है। हमें समय रहते युवा पीढ़ी को संस्कार एवं ज्ञान संपन्न बनाना होगा, तभी भारत देश तप, ज्ञान एवं संस्कार से संपन्न होगा एवं विश्व पटल पर भारत देश जगतगुरु के रूप में प्रतिष्ठित होगा।
उन्होंने कहा कि भारत के तपोमय ऋषियों ने साधना, उपासना एवं आराधना की वैज्ञानिक पद्धति प्रदान की है। हमें ब्रह्म मुहूर्त से रात्रि पर्यंत वैदिक पद्धति के अनुसार अपना कार्य करना चाहिए। उन्होंने श्रीराम नाम जप की महिमा का आध्यात्मिक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि चंदन नगर की इस धरा पर श्रीनृसिंह मंदिर के जीर्णोद्धार के बाद जब मंदिर में भगवान की प्राण प्रतिष्ठा होगी, तब इस पावन भूमि पर सैकड़ों महान संत विभूतियों का समागम होगा।
संचालन कर रहे नेहरू महाविद्यालय के संस्कृत विभागाध्यक्ष डा. ओमप्रकाश शास्री ने जगतगुरु महाराज का अभिनंदन करते हुए कहा कि बुंदेलखंड की धरती पर संत परंपरा का गौरवशाली इतिहास रहा है। इस अवसर पर महंत गंगा दास महराज, महंत अनिरुद्ध दास महाराज, सीताराम दास महाराज, राजीव बबेले सप्पू, निखिल तिवारी, अशोक गोस्वामी, अजय पटैरिया, कल्पनीत सिंह लोधी, विवेक सरैया, श्रीकांत करोलिया, राजाराम गोस्वामी, चंद्रशेखर दास महाराज झूमरनाथ, प्रमोद पांडेय, रामकुमार रावत, रोहित मिश्रा, आशुतोष गोस्वामी आदि मौजूद रहे।
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इसके बाद राजेंद्र दास महाराज का काफिला ग्राम लड़वारी पहुंचा, जहां पूर्व ग्राम प्रधान धीरज सिंह परमार की अगुवाई में ग्राम वासियों ने उनका ग्राम लड़वारी तिगैला स्थित मंदिर पर स्वागत किया। इसके बाद महाराज ग्राम लिधौरा टीकमगढ़ मध्य प्रदेश की ओर रवाना हो गए।
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उन्होंने कहा कि भारत के तपोमय ऋषियों ने साधना, उपासना एवं आराधना की वैज्ञानिक पद्धति प्रदान की है। हमें ब्रह्म मुहूर्त से रात्रि पर्यंत वैदिक पद्धति के अनुसार अपना कार्य करना चाहिए। उन्होंने श्रीराम नाम जप की महिमा का आध्यात्मिक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि चंदन नगर की इस धरा पर श्रीनृसिंह मंदिर के जीर्णोद्धार के बाद जब मंदिर में भगवान की प्राण प्रतिष्ठा होगी, तब इस पावन भूमि पर सैकड़ों महान संत विभूतियों का समागम होगा।
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संचालन कर रहे नेहरू महाविद्यालय के संस्कृत विभागाध्यक्ष डा. ओमप्रकाश शास्री ने जगतगुरु महाराज का अभिनंदन करते हुए कहा कि बुंदेलखंड की धरती पर संत परंपरा का गौरवशाली इतिहास रहा है। इस अवसर पर महंत गंगा दास महराज, महंत अनिरुद्ध दास महाराज, सीताराम दास महाराज, राजीव बबेले सप्पू, निखिल तिवारी, अशोक गोस्वामी, अजय पटैरिया, कल्पनीत सिंह लोधी, विवेक सरैया, श्रीकांत करोलिया, राजाराम गोस्वामी, चंद्रशेखर दास महाराज झूमरनाथ, प्रमोद पांडेय, रामकुमार रावत, रोहित मिश्रा, आशुतोष गोस्वामी आदि मौजूद रहे।
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इसके बाद राजेंद्र दास महाराज का काफिला ग्राम लड़वारी पहुंचा, जहां पूर्व ग्राम प्रधान धीरज सिंह परमार की अगुवाई में ग्राम वासियों ने उनका ग्राम लड़वारी तिगैला स्थित मंदिर पर स्वागत किया। इसके बाद महाराज ग्राम लिधौरा टीकमगढ़ मध्य प्रदेश की ओर रवाना हो गए।